डिजिटल युग में भारतीय ज्ञान परंपरा का नया अध्याय, ‘प्रज्ञानम्’ एआई चैटबॉट का उद्घाटन

Mar 26, 2026 - 00:44
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डिजिटल युग में भारतीय ज्ञान परंपरा का नया अध्याय, ‘प्रज्ञानम्’ एआई चैटबॉट का उद्घाटन
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डिजिटल युग में भारतीय ज्ञान परंपरा का नया अध्याय, ‘प्रज्ञानम्’ एआई चैटबॉट का उद्घाटन

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कम शब्दों में कहें तो, श्री देव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय द्वारा विकसित ‘प्रज्ञानम्’ एआई चैटबॉट का भव्य उद्घाटन किया गया है, जो भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

देहरादून। भारतीय ज्ञान परंपरा की समृद्ध विरासत को आधुनिकता के समकक्ष लाने के लिए श्री देव सुमन उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय ने एक अभिनव पहल की है। आज, लोक भवन, देहरादून में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान, ‘प्रज्ञानम्’ नामक एआई चैटबॉट का उद्घाटन किया गया। इस समारोह के मुख्य अतिथि लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (राज्यपाल) थे, जिन्होंने चैटबॉट का शुभारंभ कर इस तकनीकी नवाचार की सराहना की।

उद्घाटन समारोह के मुख्य बिंदु

राज्यपाल ने इस महत्वपूर्ण प्रयास की प्रशंसा करते हुए कहा कि ‘प्रज्ञानम्’ भारतीय ज्ञान परंपरा को डिजिटल माध्यम से आम जनता तक पहुँचाने का सशक्त प्लेटफॉर्म बनेगा। उन्होंने इसे एक दूरदर्शी पहल बताया, जो नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ ज्ञान के प्रसार में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

इस अवसर पर राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत सहित कई संतगण एवं गणमान्य अतिथि उपस्थित थे। उन्होंने विश्वविद्यालय की शोध-उन्मुख सोच, शिक्षण गतिविधियों और नवाचार के प्रति प्रतिबद्धता की भी सराहना की।

‘प्रज्ञानम्’ की विशेषताएँ

विश्वবিদ্যাল के कुलपति प्रो. एन. के. जोशी ने चैटबॉट की विशेषताओं के बारे में बताया कि यह भारतीय ज्ञान प्रणाली—जैसे वेद, उपनिषद, आयुर्वेद, गणित, दर्शन और प्राचीन विज्ञान—पर आधारित एक प्रमाणिक डिजिटल मंच है। यह उपयोगकर्ताओं को त्वरित, सटीक और संदर्भित जानकारी प्रदान करेगा। यह विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और सामान्य नागरिकों के लिए एक डिजिटल ज्ञान सहायक के रूप में कार्य करेगा।

प्रो. जोशी ने बताया कि यह पहल न केवल आत्म-अध्ययन तथा शोध को प्रोत्साहित करेगी, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है।

कार्यक्रम का संचालन और आम जनता के लिए उपलब्धता

कार्यक्रम का संचालन डॉ. गौरव वार्ष्णेय ने किया। ‘प्रज्ञानम्’ एआई चैटबॉट अब ऑनलाइन उपलब्ध है, जिस पर आम नागरिक, विद्यार्थी और शोधार्थी जाकर इसे आसानी से उपयोग कर सकते हैं। इसका लिंक है: प्रज्ञानम्.

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इस तकनीकी नवाचार ने भारतीय ज्ञान परंपरा की पुनर्स्थापना के साथ-साथ आधुनिकता की ओर महत्वपूर्ण कदम बढ़ाने का अवसर प्रदान किया है। इसे देखकर यह स्पष्ट होता है कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने के साथ-साथ उसे नई पीढ़ी के लिए सुलभ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

इस प्रकार के प्रयास न केवल हमारी सभ्यता का सम्मान करते हैं, बल्कि वैश्विक परिदृश्य में भारतीय ज्ञान को भी महत्वपूर्ण स्थान दिलाने की दिशा में अग्रसर हैं।

इसके बारे में और अधिक जानकारी के लिए, कृपया हमारे पोर्टल पर जाएँ: Amrita Bazaar Patrika.

सादर,

टीम अमिता बाजार पत्रिका

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