देहरादून: मेडिकल स्टोर से 20,000 से अधिक प्रतिबंधित दवाएं बरामद, एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज
देहरादून: मेडिकल स्टोर से 20,000 से अधिक प्रतिबंधित दवाएं बरामद, एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज
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कम शब्दों में कहें तो: देहरादून में हाल ही में नशीली दवाओं के अवैध व्यापार के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए एक मेडिकल स्टोर से 20,142 प्रतिबंधित गोलियां और 50 इंजेक्शन बरामद किए गए हैं। इस मामले में एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
नशीली दवाओं के अवैध कारोबार के खिलाफ प्रदेश सरकार ने एक बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। सचिव स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग सचिन कुर्वे के निर्देशों के तहत, कुमाऊं मंडल में औषधि निरीक्षण की विशेष कार्रवाई चल रही है। हाल ही में थाना पुलभट्टा क्षेत्र, जनपद उधम सिंह नगर में एक मेडिकल स्टोर पर स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने छापेमारी की, जहां भारी मात्रा में प्रतिबंधित दवाएं बरामद हुईं।
मेडिकल स्टोर से मिला नशीली दवाओं का जखीरा
मुखबिर की सूचना पर की गई इस छापेमारी में SK मेडिकल स्टोर से 20,142 ट्रामाडोल (Tramadol) और अल्प्राजोलम (Alprazolam) की टैबलेट्स और 50 ट्रामाडोल इंजेक्शन बरामद किए गए हैं। ये दवाएं चिकित्सा उपयोग के लिए निर्धारित हैं, लेकिन बिना वैध पर्चे के इनकी बिक्री पर प्रतिबंध है। स्टोर संचालक शकूर खान को मौके से ही गिरफ्तार कर लिया गया, और उसके खिलाफ थाना पुलभट्टा में धारा 8/22 एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि इतनी बड़ी मात्रा में दवाएं कहां से आईं और इन्हें किसे सप्लाई किया जाना था।
क्रॉस-डिस्ट्रिक्ट निरीक्षण से बढ़ी सख्ती
स्वास्थ्य विभाग ने पारदर्शिता के लिए निरीक्षण प्रणाली में बदलाव किया है। अब औषधि निरीक्षकों के तीन विशेष दल विभिन्न जिलों में तैनात हैं ताकि क्रॉस-डिस्ट्रिक्ट निरीक्षण को सुनिश्चित किया जा सके। इस व्यवस्था से स्थानीय स्तर पर मिलीभगत की आशंका को समाप्त करना और निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करना मुख्य उद्देश्य है। अधिकारियों के अनुसार, आने वाले दिनों में प्रदेशभर में औचक निरीक्षण जारी रहेंगे।
युवाओं को बचाने की मुहिम
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, ट्रामाडोल और अल्प्राजोलम जैसे नशीली दवाओं का दुरुपयोग दिनों-दिन बढ़ता ही जा रहा है। ये दवाएं नशे के रूप में इस्तेमाल की जा रही हैं, जो युवाओं के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकती हैं। सरकार का मानना है कि मेडिकल स्टोरों के माध्यम से हो रही अवैध बिक्री को रोकना जरूरी है। कुमाऊं में की गई यह कार्रवाई इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
नशे के नेटवर्क पर बड़ी चोट
कुमाऊं में हुई इस छापेमारी को नशे के बड़े नेटवर्क पर एक मजबूत प्रहार माना जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग और पुलिस के समन्वय से की गई इस कार्रवाई का उद्देश्य नशे के अवैध कारोबार को समाप्त करना है। इस अभियान ने न केवल अवैध दवा कारोबारियों में हड़कंप मचा दिया है, बल्कि जनता में भी यह विश्वास जगाया है कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है।
स्वास्थ्य सचिव एवं आयुक्त सचिन कुर्वे का बयान
स्वास्थ्य सचिव सचिन कुर्वे ने कहा कि प्रदेश में नशीली दवाओं के अवैध कारोबार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है। उन्होंने बताया कि ट्रामाडोल और अल्प्राजोलम जैसे दवाओं का दुरुपयोग युवाओं को नशे की ओर धकेल रहा है, जिसके खिलाफ कठोर कदम उठाने की आवश्यकता है। आगे कहा गया कि निरंतर औचक निरीक्षण और जांचें जारी रहेंगी।
अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी का बयान
अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी ने कहा, "हमें स्वास्थ्य सचिव द्वारा दिए गए आदेशों के तहत नशीली दवाओं की अवैध बिक्री पर रोक लगाने के लिए पूरी ताकत से काम करना है। तीन विशेष दलों द्वारा निगरानी रखी जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।"
हाल की इस छापेमारी से स्पष्ट है कि सरकार नशे के व्यापार पर पूरी तरह से अंकुश लगाना चाहती है और इस दिशा में कई कठिनाईयों को दूर करते हुए कार्रवाई कर रही है। स्वास्थ्य आदि के संदर्भ में नियमों का पालन करना और लोगों को उनके दुष्प्रभावों से अवगत कराना अत्यंत आवश्यक है।
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सादर, टीम अमृता बाजार पत्रिका (कमलिनी)
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