बंदरों के हमले से महिला घायल, हाथ में आया फ्रैक्चर - जानिए पूरा मामला
बंदरों के हमले से महिला घायल, हाथ में आया फ्रैक्चर - जानिए पूरा मामला
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कम शब्दों में कहें तो, एक 70 वर्षीय महिला की ने बंदरों के हमले से बचने के प्रयास में गंभीर रूप से चोट लग गई, जिससे उनके हाथ में फ्रैक्चर हो गया। यह घटना टिहरी गढ़वाल के ग्राम गौंसारी में हुई है।
क्या हुआ? जानिए घटना का पूरा विवरण
टिहरी गढ़वाल के तहसील गजा के समीप ग्राम गौंसारी में 70 वर्षीय रिखली देवी (पत्नी मदन सिंह चौहान) अपने घर के आंगन में गेहूं सुखा रही थीं। अचानक एक झुंड बंदरों का आंगन में घुस आया और उन्होंने अनाज खाने का प्रयास किया। जब रिखली देवी ने इन बंदरों को भगाने की कोशिश की, तब वे उन पर दौड़ पड़े। घबराई हुई रिखली देवी ने घर के अंदर जाने का प्रयास किया, लेकिन वे संतुलन खो बैठीं और गिर गईं, जिससे उनके हाथ में फ्रैक्चर हो गया।
जरूरी चिकित्सा सहायता
ग्राम प्रधान जयेंद्र सिंह चौहान के अनुसार, पड़ोसियों के शोरगुल करने पर बंदर जल्द ही वहां से दूर भाग गए। घायल महिला को तत्परता से राजकीय एलोपैथिक अस्पताल गजा ले जाया गया, जहां उन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया। चिकित्सकों ने उन्हें एक्स-रे कराने की सलाह दी है।
अगले कदम और ग्रामीणों की सुरक्षा
ग्राम प्रधान जयेंद्र सिंह चौहान ने जानकारी दी कि रिखली देवी के पति, मदन सिंह चौहान, इस समय अपने पुत्र के साथ स्वास्थ्य संबंधी उपचार के लिए दिल्ली गए हुए हैं। अब रिखली देवी भी बेहतर चिकित्सा के लिए अपने पुत्रों के पास दिल्ली या देहरादून जाने की योजना बना रही हैं। इसके साथ ही प्रधान ने वन विभाग से गांव में बंदरों को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाने की भी मांग की है। उनका कहना है कि क्षेत्र में बंदरों का आतंक बढ़ता जा रहा है, जो ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए एक गंभीर समस्या बनती जा रही है।
बंदरों का आतंक: एक चिंता का विषय
हाल के वर्षों में, बंदरों के हमले का यह मामला कोई अकेला नहीं है। उत्तर भारत के विभिन्न क्षेत्रों में इस प्रकार के कई मामले सामने आ चुके हैं, जहां बंदरों के हमले ने ग्रामीणों में न केवल डर पैदा किया है, बल्कि कई लोगों को चोट भी आई है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि इस समस्या का समाधान तभी संभव है जब वन विभाग सक्रिय रूप से इस पर काम करे और ग्रामीणों को सुरक्षित रखने के लिए ठोस कदम उठाए।
इस घटना ने स्थानीय समुदाय में सुरक्षा की भावना पर भी प्रश्नचिन्ह लगाया है। ग्रामीणों को अब खुद ही सावधानी बरतने और इस प्रकार की घटनाओं से बचने के लिए कदम उठाने की आवश्यकता है।
इसके अलावा, स्थानीय प्रशासन को भी इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत है। वही, जिन क्षेत्रों में बंदरों का आतंक है, वहां समाधान के लिए विचार विमर्श होना चाहिए और बेहतर योजना बनानी चाहिए।
भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं से बचने के लिए यदि ठोस उपाय नहीं किए गए, तो यह स्थिति और भी चिंतनीय हो सकती है।
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सादर,
टीम अमrita बाजार पत्रिका
सुनिता शर्मा
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