भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा और भांग अर्पित करने का महत्व : स्वामी रसिक महाराज की शिक्षाएँ

Aug 9, 2026 - 07:44
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भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा और भांग अर्पित करने का महत्व : स्वामी रसिक महाराज की शिक्षाएँ
भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा और भांग अर्पित करने का महत्व : स्वामी रसिक महाराज की शिक्षाएँ

भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा और भांग अर्पित करने का महत्व : स्वामी रसिक महाराज की शिक्षाएँ

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कम शब्दों में कहें तो, शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा और भांग अर्पित करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं। स्वामी रसिक महाराज ने इस पर महत्वपूर्ण insights प्रस्तुत की हैं।

रायवाला, 8 अगस्त। सावन शिवरात्रि के अवसर पर नृसिंह भक्ति सेवा संस्थान एवं सोमेश्वर कीर्तन मण्डली के सौजन्य से कौटिल्य वाटिका वेडिंग प्वाइंट, प्रतीतनगर रायवाला में आयोजित श्रीशिवमहापुराण कथा के दौरान नृसिंह पीठाधीश्वर स्वामी रसिक महाराज, जो कि सनातन धर्म विकास परिषद (उत्तर प्रदेश) के अध्यक्ष हैं, ने श्रद्धालुओं को भगवान शिव की उपासना का आध्यात्मिक महत्व बताया। उन्होंने कहा कि शिवलिंग पर विधिपूर्वक और श्रद्धा सहित बेलपत्र, धतूरा, और भांग अर्पित करने से भगवान शिव विशेष रूप से प्रसन्न होते हैं, जो साधक के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि एवं आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है।

बेलपत्र का आध्यात्मिक महत्व

स्वामी रसिक महाराज के अनुसार, शास्त्रों में उल्लेख है कि त्रिदलयुक्त बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। यह तीन दल ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतिनिधित्व करते हैं और साथ ही सत्त्व, रज और तम गुणों का प्रतीक भी हैं। श्रद्धा से बेलपत्र अर्पित करने से न केवल पापों का क्षय होता है बल्कि शिवकृपा की प्राप्ति भी होती है।

धतूरा का अर्थ और महत्व

स्वामी जी ने आगे कहा कि धतूरा भगवान शिव के वैराग्य और विषपान की स्मृति का प्रतीक है। जब समुद्र मंथन के समय हलाहल विष का पान करके संसार की रक्षा की थी, तब भगवान शिव ने धतूरा को ग्रहण किया। इसे त्याग, तपस्या और लोककल्याण का प्रतीक माना गया है, जो धार्मिक भावना को और भी गहरा करता है।

भांग का संयम और समर्पण

स्वामी जी ने भांग अर्पित करने के आध्यात्मिक अर्थ को भी स्पष्ट करते हुए कहा कि यह इंद्रियों पर संयम, मन की चंचलता का नियंत्रण, और भगवान शिव के प्रति पूर्ण समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि भांग का सेवन केवल पूजा-विधि का हिस्सा है, न कि इसे नशे के लिए उपयोग करना धर्म का उद्देश्य है।

शिवभक्ति का असली अर्थ

कथा के दौरान स्वामी रसिक महाराज ने श्रद्धालुओं से प्रेरित किया कि भगवान शिव की आराधना केवल पूजन सामग्री अर्पित करने तक सीमित न हो, बल्कि उन्हें अपने जीवन में सत्य, संयम, सेवा, करुणा, और सदाचार को अपनाकर ही वास्तविक शिवभक्ति का फल प्राप्त किया जा सकता है।

इस अवसर पर साध्वी मां देवेश्वरी जी, वेदाचार्य सुमन देव कुकरेती, बसन्ती मां के पुजारी आचार्य विनय पोखरियाल, श्री चेतन प्रजापति, श्रीमती बीना विष्ट, श्रीमती अनीता रावत, श्रीमती कमलेश झा, राजेन्द्र कुकरेती, अनिल पंत, करन नेगी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भगवान भोलेनाथ के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।

दैवी कृपा के इस पर्व पर सभी श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से भगवान शिव की आराधना की और उनके आशीर्वाद की प्राप्ति की।

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सादर, टीम अम Rita बजार पत्रिका

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