मुख्यमंत्री धामी ने 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर बुनकरों और हस्तशिल्प कारीगरों को सम्मानित किया

Aug 7, 2026 - 21:44
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मुख्यमंत्री धामी ने 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर बुनकरों और हस्तशिल्प कारीगरों को सम्मानित किया
मुख्यमंत्री धामी ने 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर बुनकरों और हस्तशिल्प कारीगरों को सम्मानित किया

मुख्यमंत्री धामी ने 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर बुनकरों और हस्तशिल्प कारीगरों को सम्मानित किया

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर उत्कृष्ट बुनकरों और हस्तशिल्प कारीगरों को सम्मानित किया।

हथकरघा उत्पाद

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सेवक सदन में उत्तराखंड हथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास परिषद द्वारा आयोजित 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने बिच्छू घास (नेटल फाइबर) से बने पारंपरिक वस्त्र खरीदकर स्थानीय उत्पादों और शिल्पकारों को प्रोत्साहित किया। साथ ही, मुख्यमंत्री ने उत्कृष्ट बुनकरों एवं हस्तशिल्प कारीगरों को सम्मानित किया।

इस समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय हथकरघा दिवस का यह अवसर उन समर्पित कारीगरों के सम्मान का प्रतीक है, जो अपनी कला और मेहनत से हमारे देश की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखे हुए हैं। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड के कारीगर केवल उत्पाद नहीं बनाते हैं, बल्कि उनकी कला में हमारी संस्कृति और परंपराओं की आत्मा भी झलकती है।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि उत्तराखंड की बुनाई और हस्तशिल्प परंपरा अपनी विशेषताओं और विविधता के कारण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रही है। उन्होंने उल्लेख किया कि हर्षिल के ऊनी शॉल, मुनस्यारी और धारचूला की थुलमा, अल्मोड़ा की ट्वीड, छिनका की पंखी, रंगवाली पिछौड़ा, रिंगाल शिल्प, और बिच्छू घास से बने उत्पाद राज्य की सम्पूर्ण लोक विरासत के प्रतीक हैं।

केंद्रीय नेतृत्व के तहत 'वोकल फॉर लोकल' और 'लोकल टू ग्लोबल' जैसे अभियान भी उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय पहचान दे रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अगर उत्तराखंड के उत्पादों को सही ब्रांडिंग और विपणन किया जाए, तो यह कारीगरों की प्रतिभा को विश्व स्तर पर और स्थापित कर सकेगा।

मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार द्वारा हथकरघा एवं हस्तशिल्प क्षेत्र के विकास के लिए उठाए गए कदमों के बारे में भी बताया। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत, जहां 278 बुनकरों और कारीगरों को चार करोड़ रुपये का ऋण दिया गया है, वहीं एक करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी भी दी गई है। इससे 834 लोगों को रोजगार प्राप्त हुआ है।

उन्होंने अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के कारीगरों को प्रशिक्षण देने, वरिष्ठ शिल्पकारों के लिए शिल्पकार पेंशन योजना लागू करने, और उत्कृष्ट कारीगरों को 'उत्तराखंड राज्य शिल्प रत्न' जैसे पुरस्कारों से सम्मानित करने की दिशा में भी कार्य करने के विचार साझा किए।

अन्त में, मुख्यमंत्री ने सभी प्रदेशवासियों से निवेदन किया कि वे स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता दें और जब भी कुछ खरीदें, तो स्थानीय विकल्प को अवश्य विचार करें। उनका कहना था कि हथकरघा या हस्तशिल्प का कोई उत्पाद खरीदना सिर्फ एक वस्तु खरीदना नहीं है, बल्कि एक बुनकर परिवार की आजीविका, एक शिल्पकार के स्वाभिमान और अपनी सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करना है।

इस कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री भरत चौधरी, विधायक सविता कपूर, सचिव विनय शंकर पाण्डेय, बुनकर, हस्तशिल्पी, उद्यमी और महिला शिल्पकार सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

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सादर,
टीम अमृता बाजार पत्रिका

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