सीमांत माणा बना देश का पहला “लखपति दीदी” गांव, महिलाओं ने बढ़ाया मान

Apr 23, 2026 - 07:44
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सीमांत माणा बना देश का पहला “लखपति दीदी” गांव, महिलाओं ने बढ़ाया मान
सीमांत माणा बना देश का पहला “लखपति दीदी” गांव, महिलाओं ने बढ़ाया मान

सीमांत माणा बना देश का पहला “लखपति दीदी” गांव, महिलाओं ने बढ़ाया मान

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कम शब्दों में कहें तो, सीमांत माणा गांव ने “लखपति दीदी” के रूप में अपनी पहचान बनाई है, जहां सभी महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हो गई हैं। इस गांव का विकास कार्य और चारधाम यात्रा के प्रति की गई अपील ने इसे एक नई दिशा दी है।

सीमा के गांव माणा में हाल ही में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने क्षेत्र का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने विकास कार्यों का जायजा लिया और यहाँ की महिला सशक्तिकरण की दिशा में कड़ों पहलों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा को सुरक्षित और प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए सभी को सहयोग करना चाहिए।

मुख्यमंत्री धामी का माणा पहुंचने पर गांव की महिलाओं ने पारंपरिक गीत गाकर उनका स्वागत किया और उन्हें स्थानीय उत्पाद भेंट किए। उन्होंने स्थानीय संस्कृति और परंपराओं की सराहना करते हुए ग्रामीणों का आभार व्यक्त किया।

महिलाओं की मेहनत और इच्छाशक्ति से बने “लखपति दीदी”

मुख्यमंत्री ने माणा गांव की महिलाओं से मिलकर उनके काम की प्रशंसा की। उन्होंने बताया कि सभी 82 महिलाएं “लखपति दीदी” बन चुकी हैं, जिससे माणा उत्तराखंड का पहला शत-प्रतिशत लखपति दीदी गांव बन गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये महिलाएं स्थानीय उत्पादों की सहायता से न केवल अपनी आजीविका को सशक्त कर रही हैं, बल्कि उत्तराखंड की पहचान को भी मजबूत कर रही हैं।

उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सीमांत गांवों के विकास की दिशा में खास ध्यान दिया जा रहा है, जिससे कि जो गांव पहले “अंतिम गांव” कहलाते थे, अब “प्रथम गांव” के रूप में विकसित हो रहे हैं।

स्थानीय उत्पादों के लिए अपील

मुख्यमंत्री ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की कि वे स्थानीय उत्पादों की खरीदारी करें, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले। उन्होंने वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत उत्तराखंड के सीमांत गांवों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार की बात की।

माणा गांव ने स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से विकास का आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया है। यहां की महिलाएं ऊनी वस्त्र, हैंडलूम, फर्नीचर और अन्य उत्पादों का निर्माण कर रही हैं। वे स्वरोजगार के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय होकर आय के नए स्रोत विकसित कर रहीं हैं।

महिला सशक्तिकरण की नई कहानी

ग्राम पंचायत माणा के अंतर्गत 12 स्वयं सहायता समूह कार्यरत हैं और उनकी मेहनत ने माणा को महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बना दिया है। ये महिलाएं कृषि, पशुपालन, होमस्टे, और अन्य लघु उद्योगों के जरिए स्वरोजगार के नए अवसरों की ओर बढ़ रही हैं।

स्थानीय उत्पादों को बाजार में उर्ध्व गया है, जिससे महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनने में मदद मिली है। सभी महिलाओं ने “लखपति दीदी” योजना का लाभ उठाकर अपनी आय में वृद्धि की है।

माणा: विकास का प्रतीक

माणा गांव अब एक ऐसी जगह बन गई है जहां महिलाओं ने न केवल अपने जीवन स्तर को बेहतर किया है, बल्कि उन्होंने अपने क्षेत्र के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि आत्मनिर्भर उत्तराखंड के निर्माण में न केवल राज्य सरकार, बल्कि केंद्र सरकार के सहयोग से यह गांव विकास की नई ऊँचाइयों को छुएगा।

यहां सभी महिलाएं एकजुट होकर अपनी परंपराओं को संजोते हुए एक नई पहचान बना रही हैं। माणा एक अद्भुत उदाहरण है कि कैसे सही दिशा में ठोस प्रयासों के द्वारा समग्र विकास संभव है।

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सादर,

टीम अम Rita बाजार पत्रिका

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