हिमालय से संवाद करती चित्र प्रदर्शनी का उद्घाटन, संस्कृति और इतिहास को जोड़ती
हिमालय से संवाद करती चित्र प्रदर्शनी का उद्घाटन, संस्कृति और इतिहास को जोड़ती
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कम शब्दों में कहें तो देहरादून में दून पुस्तकालय में जर्मन श्लागिंटवाईट बन्धुओं द्वारा निर्मित 170 साल पुराने चित्रों की प्रदर्शनी का उद्घाटन हुआ, जिसमें हिमालय के ऐतिहासिक दृश्य प्रदर्शित किए गए हैं।
देहरादून: दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में शुक्रवार की शाम को एक अद्वितीय प्रदर्शनी का उद्घाटन हुआ, जिसमें जर्मन के श्लागिंटवाईट बन्धुओं द्वारा बनाए गए 170 साल पुराने चित्रों को दर्शाया गया। इस प्रदर्शनी का आयोजन पहाड़ संस्था के सहायक प्रो. शेखर पाठक की पहल पर किया गया, जो इन चित्रों को जर्मनी के म्यूनिख संग्रहालय से लेकर आए हैं।
चित्रों की अद्भुत यात्रा
इस प्रदर्शनी द्वारा प्रदर्शित चित्र, जो हिमालय की अनमोल झलकियां कैद करते हैं, जुलाई 2015 में म्यूनिख में एक संगोष्ठी के दौरान प्रदर्शित किए गए थे। प्रो. पाठक के अनुसार, इस विचार का जन्म तब हुआ जब उन्होंने श्लांगिटवाइट के अभियानों पर चर्चा की थी। चित्रों के निर्माण में प्रो. हरमन क्रुत्जमैन, मैडम स्टेफनी क्लेइट, स्टीफन रिट्टर और अन्य का योगदान महत्वपूर्ण रहा है।
प्रदर्शनी का महत्व
यह प्रदर्शनी देश के विभिन्न हिस्सों की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित रखने और आम जनता के सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उपस्थित दर्शकों को जम्मू कश्मीर, बदरीनाथ, केदारनाथ, मिलम, सुंदरढूंगा और दार्जिलिंग जैसे स्थानों के ऐतिहासिक महत्व की जानकारी मिलेगी। लोग इन चित्रों के माध्यम से लगभग 200 साल पुराने हिमालय की विविधता का अनुभव कर सकेंगे।
विशिष्ट अतिथियों के विचार
उद्घाटन समारोह में प्रो. शेखर पाठक और प्रो. हरमन क्रुत्जमैन ने प्रदर्शनी में शामिल चित्रों के संदर्भ में कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर अपने विचार प्रस्तुत किए। प्रशासन के प्रमुख प्रो. बी.के जोशी ने भी उपस्थित लोगों का स्वागत किया और कहा कि यह प्रदर्शनी न केवल शोधकर्ताओं के लिए, बल्कि आम दर्शकों के लिए भी अनेक दृष्टिकोणों से महत्वपूर्ण होगी।
विभिन्न विषयों पर विचार रखते हुए एन. रविशंकर ने कहा कि आज का आयोजन विभिन्न ज्ञान क्षेत्रों के बीच बौद्धिक विमर्श को और भी विस्तारित करेगा। सर्वे ऑफ इंडिया के एडिशनल सर्वेयर संदीप श्रीवास्त ने भी अपने विचार साझा किए।
प्रदर्शनी की समयावधि और स्थान
यह प्रदर्शनी 1-8 मई, 2026 तक दून पुस्तकालय के तृतीय तल पर प्रातः 11:00 बजे से सायं 6:30 बजे तक निशुल्क उपलब्ध रहेगी। कार्यक्रम की व्यवस्था कार्यक्रम अधिकारी चन्द्रशेखर तिवारी ने की थी, और इसकी सफलता का श्रेय सांस्कृतिक अध्येता डॉ. लोकेश ओहरी को भी जाता है।
समापन
इस अद्भुत प्रदर्शनी का उदघाटन दर्शकों के लिए एक नई जानकारी और अनुभव का स्रोत बनेगा। प्रबुद्ध सहित विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ताओं की उपस्थिति ने इस आयोजन को और भी महत्व दिया। आगामी दिन भी इस प्रदर्शनी को देखने का एक अद्भुत अवसर साबित होंगे, जहां लोग हिमालय के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर से जुड़ सकेंगे।
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Team Amrita Bazaar Patrika, - राधिका जसवाल
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