सीबीआई पूछताछ की सरगर्मी के बीच उर्मिला सनावर गिरफ्तार
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पढ़ें, गिरफ्तारी के मूल कारण, सियासत हुई तेज
पूर्व विधायक सुरेश राठौर की बेटी की शिकायत पर हरिद्वार पुलिस की कार्रवाई
अंकिता प्रकरण में कथित वीआईपी के सवाल और सीबीआई जांच के बीच उर्मिला की भूमिका अहम
अंकिता भंडारी केस फिर सुर्खियों में
नार्को टेस्ट और पूछताछ पर टिकी निगाहें
अविकल उत्तराखण्ड
हरिद्वार। अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी के नाम को लेकर चल रहे विवाद के बीच अभिनेत्री उर्मिला सनावर की गिरफ्तारी ने उत्तराखंड की राजनीति और जांच की दिशा पर एक बार फिर ध्यान केंद्रित कर दिया है।
हरिद्वार पुलिस ने रविवार को सहारनपुर स्थित उनके आवास से उन्हें गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई पूर्व विधायक सुरेश राठौर की बेटी की शिकायत पर दर्ज मुकदमे में की गई है। पुलिस उन्हें हरिद्वार ले आई है और न्यायालय में पेश करने की प्रक्रिया की जा रही है।
हालांकि, उर्मिला की यह गिरफ्तारी जिस शिकायत के आधार पर हुई है, वह रविदास पीठ से जुड़े विवाद, कथित तौर पर पांच करोड़ रुपये की मांग और धमकी देने के आरोपों से संबंधित है। इसे अंकिता भंडारी हत्याकांड में उनकी भूमिका को लेकर किसी निष्कर्ष या आरोपों की पुष्टि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। लेकिन अंकिता प्रकरण में उनके पहले के बयानों, सामने आए कथित ऑडियो-वीडियो और सीबीआई की जांच के संदर्भ में यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण हो गया है।
अंकिता केस में कथित वीआईपी का मुद्दा कैसे आया चर्चा में?
सितंबर 2022 में ऋषिकेश के पास वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी की हत्या हुई थी। इस मामले में तीन आरोपियों को अदालत से उम्रकैद की सजा हो चुकी है। इसके बावजूद कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर सवाल उठते रहे हैं। इसी विवाद ने हाल के महीनों में राजनीतिक तूल पकड़ा।
उर्मिला सनावर ने पूर्व विधायक सुरेश राठौर के साथ कथित बातचीत से जुड़े ऑडियो और अन्य सामग्री सार्वजनिक की थी। इन ऑडियो में कथित वीआईपी के संदर्भ को लेकर चर्चाएं हुईं। उर्मिला के दावों में भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम का नाम भी सामने आया, हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। गौतम ने आरोपों को खारिज किया है। जांच एजेंसियों ने भी अब तक उनके खिलाफ अंकिता हत्याकांड में भूमिका की पुष्टि करने वाला निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया है।
सीबीआई की पूछताछ और नार्को टेस्ट पर सहमति
अंकिता प्रकरण में कथित ऑडियो की जांच के सिलसिले में सीबीआई ने 18 अक्टूबर को उर्मिला सनावर से सहारनपुर में पूछताछ की थी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पूछताछ करीब चार घंटे चली। जांच एजेंसी ने पूर्व विधायक सुरेश राठौर से भी पूछताछ की। इसके बाद सीबीआई ने दोनों को पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट के लिए उनकी स्वतंत्र सहमति जानने के उद्देश्य से देहरादून की विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत में उपस्थित होने का नोटिस दिया।
23 अक्टूबर को उर्मिला सनावर और सुरेश राठौर ने अदालत में प्रस्तावित परीक्षणों के लिए सहमति जताई। हालांकि, सहमति देना और परीक्षण संपन्न होना अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। दोनों को 26 अक्टूबर को दोबारा अदालत में पेश होने के लिए कहा गया है। उर्मिला ने कथित तौर पर अपनी जान को खतरा होने और अतिरिक्त साक्ष्य होने की बात भी रखी है। इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि उनका नार्को टेस्ट हो चुका है या उससे कोई नया तथ्य सामने आ गया है।
गिरफ्तारी का अंकिता जांच से क्या संबंध?
उर्मिला की मौजूदा गिरफ्तारी पूर्व विधायक सुरेश राठौर की बेटी की शिकायत पर दर्ज अलग मुकदमे में हुई है। शिकायत में रविदास पीठ को लेकर विवाद, पांच करोड़ रुपये की कथित मांग और धमकी देने के आरोप हैं। इन आरोपों की जांच और अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच को अलग-अलग देखना आवश्यक है।
फिर भी, गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है जब सीबीआई कथित ऑडियो, उसमें हुई बातचीत और संबंधित व्यक्तियों के बयानों की पड़ताल कर रही है। अब अहम सवाल यह है कि आगे की पूछताछ में उर्मिला कौन-सी सामग्री जांच एजेंसी को उपलब्ध कराती हैं, कथित ऑडियो की फॉरेंसिक जांच से क्या सामने आता है और नार्को व पॉलीग्राफ परीक्षण की प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ती है।
अंकिता को न्याय दिलाने के लिहाज से निर्णायक महत्व आरोपों या राजनीतिक दावों का नहीं, बल्कि स्वतंत्र रूप से सत्यापित साक्ष्यों और जांच के निष्कर्षों का होगा। उर्मिला की गिरफ्तारी से जुड़े मुकदमे में भी आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
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