उत्तराखंड आवास विभाग की ऐतिहासिक उपलब्धि, स्कॉच अवार्ड 2025 में मिली प्लेटिनम श्रेणी का सम्मान
उत्तराखंड आवास विभाग की ऐतिहासिक उपलब्धि: स्कॉच अवार्ड 2025 में मिला प्लेटिनम श्रेणी का सम्मान
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड आवास विभाग ने आज दिल्ली में आयोजित स्कॉच अवार्ड 2025 के 101वें समिट में दो पुरस्कारों के साथ प्लेटिनम श्रेणी सम्मान प्राप्त किया है।
उत्तराखंड के लिए यह गौरव का क्षण है, क्योंकि आज दिल्ली के इंडियन हैबिटेट सेंटर में आयोजित प्रतिष्ठित स्कॉच अवार्ड 2025 के 101वें स्कॉच समिट में आवास विभाग को दो अलग-अलग पहलों के लिए प्लेटिनम श्रेणी पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। प्रमुख सचिव, आवास डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम और उत्तराखंड आवास एवं विकास परिषद के अपर आयुक्त और उड़ा के संयुक्त मुख्य प्रशासक दिनेश प्रताप सिंह ने यह पुरस्कार प्राप्त किया।
दो श्रेणियों में मिला सम्मान
1. ‘ईज-एप’ के लिए सम्मान
उत्तराखंड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण को राज्य में एकीकृत ऑनलाइन एप्लिकेशन “ईज-एप” के सफल संचालन और क्रियान्वयन के लिए प्लेटिनम श्रेणी पुरस्कार मिला है। यह एप एक क्रांतिकारी डिजिटल पहल है जो सभी विकास प्राधिकरणों को ऑनलाइन माध्यम से एक साथ जोड़ती है। यह ‘फेसलेस, पेपरलेस, कैशलेस’ मंत्र पर काम करता है और नागरिकों के लिए सेवाओं को तेज, पारदर्शी और सरल बनाता है।
2. प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के लिए सम्मान
इसके अलावा, उत्तराखंड आवास एवं विकास परिषद को प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत निजी भूमिधारकों के सहयोग से किफायती आवास योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए भी प्लेटिनम पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इस योजना के तहत निजी डेवलपर्स की मदद से 12,856 EWS आवासों का निर्माण किया जा रहा है।
डिजिटल इंडिया की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
यह उपलब्धि केवल पुरस्कार नहीं है, बल्कि उत्तराखंड सरकार की डिजिटल इंडिया और आवास क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों का प्रतिक है। इस तरह की पहलों से ना केवल नागरिकों के जीवन में सरलता लाई जा रही है, बल्कि सरकारी योजनाओं के प्रति अधिक पारदर्शिता और उत्तरदायित्व भी निर्मित हो रहा है।
भविष्य की संभावनाएँ
उत्तराखंड का आवास विभाग लगातार नवोन्मेषी पहलों के साथ आगे बढ़ रहा है। इन पहलों का उद्देश्य न केवल नागरिकों को बेहतर सेवाएं प्रदान करना है, बल्कि राज्य के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देना भी है। आवास विभाग की इन उपलब्धियों से यह स्पष्ट होता है कि कैसे सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग करके पारंपरिक सरकारी प्रक्रियाओं को ज्यादा सुगम और प्रभावशाली बनाया जा सकता है।
भागीदारी और साझा प्रयासों से हम उत्तराखंड की आवास नीतियों को और भी अधिक प्रभावी बना सकते हैं। सरकारी योजनाओं में नागरिकों की भागीदारी से न केवल योजनाओं की बेहतरी होती है, बल्कि समुदाय में जागरूकता और विकास भी होता है।
इसके अंत में, यह कहना गलत नहीं होगा कि उत्तराखंड आवास विभाग की इन पहलों से न केवल राज्य को लाभ होगा, बल्कि पूरे भारत में अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल प्रस्तुत किया गया है।
आइए हम सब मिलकर इस परिवर्तन और विकास के सफर में भाग लें।
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साभार, टीम अम्रिता बाजार पत्रिका (अनु उपाध्याय)
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