उत्तराखंड की वन आग से निपटने की तैयारी: 41 वन प्रभागों में सफल मॉक ड्रिल का आयोजन

Feb 18, 2026 - 21:44
 136  501.8k
उत्तराखंड की वन आग से निपटने की तैयारी: 41 वन प्रभागों में सफल मॉक ड्रिल का आयोजन
उत्तराखंड की वन आग से निपटने की तैयारी: 41 वन प्रभागों में सफल मॉक ड्रिल का आयोजन

उत्तराखंड की वन आग से निपटने की तैयारी: 41 वन प्रभागों में सफल मॉक ड्रिल का आयोजन

Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - Amrita Bazaar Patrika

कम शब्दों में कहें तो उत्तराखंड ने आगामी वनाग्नि काल (फायर सीजन) 2026 की तैयारियों को परखने के लिए व्यापक मॉक ड्रिल का आयोजन किया है।

उत्तराखंड का वन विभाग आज पूरे प्रदेश में ‘फॉरेस्ट फायर मॉक ड्रिल’ का आयोजन कर रहा है, जो 41 वन प्रभागों में फैला हुआ है। इस अभ्यास का उद्देश्य विभाग की कार्यक्षमता को परखना और जिला प्रशासन, पुलिस, सेना और स्थानीय समुदायों के बीच तालमेल का परीक्षण करना है। यह ड्रिल नई रणनीतियों और तैयारियों को सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे संभावित अग्नि संकट के समय में तेजी से प्रतिक्रिया की जा सके।

रियल-टाइम मॉनिटरिंग का उपयोग

इस पूरी कवायद की निगरानी मुख्यालय में स्थित एकीकृत कमान एवं नियंत्रण केंद्र (ICCC) से की गई। प्रमुख वन संरक्षक (HoFF) और मुख्य वन संरक्षक (वनाग्नि एवं आपदा प्रबंधन) ने स्वयं कंट्रोल रूम में बैठकर गतिविधियों का अनुश्रवण किया। मॉक ड्रिल को यथावत रखने के लिए ICCC द्वारा अचानक 41 रैंडम ‘फायर अलर्ट’ जारी किए गए, जिससे फील्ड टीमों की प्रतिक्रिया समय (Response Time) को रिकॉर्ड किया गया।

आधुनिक तकनीकों का प्रयोग

आग की स्थिति की निगरानी के लिए ड्रोन प्रणाली का इस्तेमाल किया गया। सूचनाओं के आदान-प्रदान को और बेहतर करने के लिए वायरलेस नेटवर्क की कार्यक्षमता को परखा गया। इसके अलावा, क्रू-स्टेशनों पर मौजूद व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE) किट, लीफ ब्लोअर, हेलमेट और अन्य अग्निरोधक उपकरणों की उपयोगिता का भी परीक्षण किया गया।

अंतर-विभागीय समन्वय की महत्वपूर्ण भूमिका

अग्निशमन विभाग ने ‘वॉटर टेंडर’ का इस्तेमाल करते हुए आग बुझाने का अभ्यास सम्पन्न किया, वहीं स्वास्थ्य विभाग ने घायलों को प्राथमिक उपचार (First Aid) देने और एम्बुलेंस के जरिए हायर सेंटर भेजने का सफल रिहर्सल किया। यह समन्वय न केवल विभागों के बीच सहयोग को दर्शाता है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करता है कि आपसी तालमेल के माध्यम से संभावित अग्नि संकट का सफल प्रबंधन किया जा सके।

स्थानीय समुदायों की भागीदारी

इस महत्वपूर्ण आयोजन में सरकारी तंत्र के अलावा, NDRF, SDRF, ITBP और स्थानीय समुदायों की भी सक्रिय भागीदारी रही। वन पंचायतों, महिला मंगल दलों और वनाग्नि सुरक्षा समितियों के सदस्यों ने कंधे से कंधा मिलाकर इस अभ्यास में हिस्सा लिया। सुशांत कुमार पटनायक, मुख्य वन संरक्षक (वनाग्नि एवं आपदा प्रबन्धन) के अनुसार, “इस मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य फायर सीजन 2026 से पहले हमारे कार्मिकों की तत्परता और संसाधनों की उपलब्धता को जांचना है। स्थानीय समुदाय और अन्य विभागों के साथ बेहतर समन्वय ही हमारी वनों को आग से बचाने की सबसे बड़ी शक्ति है।”

सफल मॉक ड्रिल और आगे की चुनौतियाँ

मॉक ड्रिल के अंत में सभी 40 मास्टर कंट्रोल रूम और जिला कंट्रोल रूम सक्रिय पाए गए। वन विभाग ने इस सफल आयोजन के लिए सभी सहयोगी विभागों का आभार व्यक्त किया है और प्रदेश के बहुमूल्य वनों को सुरक्षित रखने के लिए आम जनता से सहयोग की अपील की है। यह ड्रिल उत्तराखंड के लिए अपनी वनों को आग से बचाने की दिशा में एक ठोस कदम है और इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि सरकार और स्थानीय समुदायों की एकजुटता कितना महत्वपूर्ण है।

अगले वर्षों में संभावित वनाग्नि से निपटने के लिए उत्तराखंड सजग है और यह मॉक ड्रिल इसकी गंभीरता और प्रतिबद्धता का स्पष्ट प्रमाण है। इस तरह के अभ्यास भविष्य में भी जारी रहेंगे, ताकि वनों की सुरक्षा और प्रबंधन के लिए सभी आवश्यक उपाय सुनिश्चित किए जा सकें।

अधिक अपडेट के लिए, कृपया हमारी वेबसाइट पर जाएँ: amritabazaarpatrika.com

— टीम अमृता बाजार पत्रिका
सुश्री प्रियंका शर्मा

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0