उत्तराखंड में स्वास्थ्य शिक्षा की नई शुरुआत: 10 श्रेणियों में 56 प्रकार की स्वास्थ्य सेवाओं को मिली मान्यता
उत्तराखंड में स्वास्थ्य शिक्षा की नई शुरुआत: 10 श्रेणियों में 56 प्रकार की स्वास्थ्य सेवाओं को मिली मान्यता
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड में स्वास्थ्य शिक्षा को नए स्वरूप में ढाला जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के नेतृत्व में यह ऐतिहासिक कदम उठाया गया है, जिससे राज्य में स्वास्थ्य शिक्षा को राष्ट्रीय मानकों के अनुसार आधुनिक और रोजगारमुखी बनाया जा सकेगा।
हाल ही में, सचिवालय में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने की। इस बैठक में राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के विकास के लिए आवश्यक कदमों पर विस्तृत चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि "उत्तराखंड जैसे पर्वतीय और आपदा-संवेदनशील राज्य में आधुनिक और प्रशिक्षित स्वास्थ्य कार्यबल का निर्माण करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।" इस दिशा में राज्य सहबद्ध एवं स्वास्थ्य देखरेख परिषद का गठन किया जा रहा है, जिससे शिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता में सुधार होगा और राज्य के प्रशिक्षित मानव संसाधनों की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनेगी।
परिषद के गठन पर हुई चर्चा
बैठक में परिषद के गठन, उसकी संरचना तथा भविष्य की आवश्यकताओं पर गहराई से विचार किया गया। निर्णय लिया गया कि परिषद के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति के लिए एक "तलाश-सह-चयन समिति" बनाई जाएगी। स्वास्थ्य सचिव ने यह भी निर्देश दिए कि परिषद के सुचारू संचालन के लिए प्रारंभिक बजट, कार्यालय संरचना और मानव संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
पैरामेडिकल शिक्षा की दिशा में नया बदलाव
वर्तमान में, उत्तराखंड में पैरामेडिकल शिक्षा उत्तराखंड पैरामेडिकल अधिनियम-2009 और स्टेट मेडिकल फैकल्टी के अंतर्गत संचालित होती है। इसमें स्नातक तथा स्नातकोत्तर स्तर पर 22 विषयों के पाठ्यक्रम संचालित हैं। हालांकि, नए राष्ट्रीय अधिनियम के लागू होने के बाद इन सभी पाठ्यक्रमों को और मानकीकृत और कौशल-आधारित बनाया जाएगा। इस नए अधिनियम के तहत, कुल 10 श्रेणियों में 56 प्रकार की स्वास्थ्य सेवाओं को मान्यता दी गई है, जिससे विद्यार्थियों को नए करियर अवसर उपलब्ध होंगे।
स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की संभावनाएँ
बैठक में विशेषज्ञों ने बताया कि इस नये अधिनियम में कई नए विषयों को शामिल किया जा रहा है, जिनमें पोषण विज्ञान, स्वास्थ्य सूचना प्रबंधन, क्लिनिकल साइकोलॉजी, डायलिसिस तकनीशियन और एनेस्थीसिया एवं ऑपरेशन थिएटर तकनीशियन शामिल हैं। इन विषयों को शामिल करने से राज्य के युवाओं को बेहतर प्लेसमेंट और शोध के अवसर मिलेंगे।
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार का बयान
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा, “उत्तराखंड सरकार स्वास्थ्य शिक्षा को मजबूत और राष्ट्रीय स्तर पर मानकों के अनुसार बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य सहबद्ध एवं स्वास्थ्य देखरेख परिषद का गठन परिवर्तनकारी कदम साबित होगा, जिससे पाठ्यक्रमों का मानकीकरण और पंजीकरण प्रक्रिया सरल बनाई जा सकेगी।” उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि राज्य का लक्ष्य गुणवत्ता-आधारित स्वास्थ्य शिक्षा और कौशल विकास का मॉडल बनना है।
इस नई दिशा में कदम उठाते हुए, उत्तराखंड को स्वास्थ्य शिक्षा और सेवा में देश के अग्रणी राज्यों में शुमार किया जाएगा। यह पहल न केवल राज्य के विकास में अहम भूमिका निभाएगी, बल्कि आगे चलकर इसे एक "हेल्थ एजुकेशन हब" के रूप में स्थापित करेगी।
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टीम अमृता बाजार पत्रिका
साक्षी शर्मा
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