उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को मिली मान्यता: 56 प्रकार की नई सुविधाएं शुरू
उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को मिली मान्यता: 56 प्रकार की नई सुविधाएं शुरू
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड में स्वास्थ्य शिक्षा में नवाचार एवं सुधार के तहत 56 प्रकार की स्वास्थ्य सेवाओं को मान्यता प्रदान की गई है, जिससे युवाओं को नए करियर विकल्प और उन्नत स्वास्थ्य सेवाएं हासिल होंगे।
देहरादून। उत्तराखंड में स्वास्थ्य शिक्षा को एक नई दिशा देने की कवायद शुरू हो गई है। राज्य सरकार ने सोमवार को स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार के लिए 56 प्रकार की स्वास्थ्य सेवाओं को मान्यता दी है। यह कदम न केवल छात्रों के लिए नए अवसर लाएगा, बल्कि राज्य के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र को भी सुदृढ़ करेगा। इस प्रक्रिया का समर्थन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने किया है।
पैरामेडिकल शिक्षा में क्रांति
स्वास्थ्य शिक्षा में नई क्रांति की शुरुआत होते हुए, अब छात्र 10 श्रेणियों में पैरामेडिकल शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे। नई विषयवस्तु जोड़ी जाने के कारण छात्रों का दायरा बढ़ेगा, और स्वास्थ्य सेवाओं को में भी मजबूती आएगी। इसके जरिए राज्य में पंजीकरण और लाइसेंसिंग प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया जाएगा, जिससे छात्र आसानी से स्वास्थ्य सेवा में करियर बना सकेंगे।
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि, “हमारा लक्ष्य है कि उत्तराखंड गुणवत्ता–आधारित स्वास्थ्य शिक्षा और हेल्थकेयर स्किल डेवलपमेंट का मॉडल बनकर उभरे।”
उच्चस्तरीय बैठक का आयोजन
इस महत्वपूर्ण निर्णय के पीछे एक उच्चस्तरीय बैठक का आयोजन हुआ, जिसकी अध्यक्षता स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने की। बैठक में परिषद के गठन और उसकी संरचना पर व्यापक चर्चा की गई। स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि पर्वतीय और आपदा संवेदनशील राज्य उत्तराखंड के लिए आधुनिक और प्रमाणित स्वास्थ्य workforce का विकास आवश्यक है।
बैठक में “तलाश–सह–चयन समिति” के गठन का निर्णय भी लिया गया, जो परिषद के अध्यक्ष और सदस्यों का चुनाव करेगी। राज्य में वर्तमान में पैरामेडिकल शिक्षा पैरामेडिकल अधिनियम–2009 के तहत संचालित होती है, जिसमें स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर 22 विषय शामिल हैं। अब नए अधिनियम के लागू होने के बाद इन पाठ्यक्रमों को और अधिक मानकीकृत किया जाएगा।
नये विषयों का समावेश
इस नए अधिनियम के अंतर्गत कई महत्वपूर्ण विषयों का समावेश किया जाएगा जैसे - पोषण विज्ञान, स्वास्थ्य सूचना प्रबंधन, क्लिनिकल साइकोलॉजी, डायलिसिस तकनीशियन, एनेस्थीसिया एवं ऑपरेशन थिएटर तकनीशियन, और आपातकालीन चिकित्सा तकनीशियन।
इन विषयों का जुड़ाव छात्रों के लिए विस्तृत करियर विकल्प में मददगार साबित होगा। अधिकारी बताते हैं कि यह कदम राज्य को स्वास्थ्य शिक्षा और Allied Health Services के क्षेत्र में देशभर में अग्रणी बनाएगा और भविष्य में यह एक “हेल्थ एजुकेशन हब” के रूप में स्थापित होगा।
परिवर्तनकारी कदम
उत्तराखंड सरकार स्वास्थ्य शिक्षा को सुदृढ़, सुगठित और राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने के प्रति प्रतिबद्ध है। राज्य सहबद्ध एवं स्वास्थ्य देखरेख परिषद का गठन एक महत्वपूर्ण परिवर्तन साबित होगा। इससे पाठ्यक्रमों का मानकीकरण होगा और पंजीकरण एवं लाइसेंसिंग प्रक्रिया अत्यधिक सरल होगी। नए अधिनियम के तहत कई उभरते विषय और विशेषज्ञताओं को शामिल किया जाएगा, जिससे छात्रों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने का अवसर मिलेगा।
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने आगे कहा, "हमारे लिए यह एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जिससे हम स्वास्थ्य शिक्षा में गुणवत्ता बढ़ा सकेंगे।"
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सादर,
टीम अमृता बाजार पत्रिका
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