उत्तराखंड में 128 जनजातीय गांवों का चयन: सशक्तिकरण की नई दिशा

Nov 16, 2025 - 07:44
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उत्तराखंड में 128 जनजातीय गांवों का चयन: सशक्तिकरण की नई दिशा
उत्तराखंड में 128 जनजातीय गांवों का चयन: सशक्तिकरण की नई दिशा

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कम शब्दों में कहें तो उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनजातीय समाज के विकास के लिए 128 गांवों के चयन की घोषणा की है। यह कदम जनजातीय समुदाय के सशक्तिकरण और समुचित विकास की दिशा में महत्वपूर्ण है।

देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आदि गौरव महोत्सव के दौरान भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह महोत्सव केवल एक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि जनजातीय समाज की समृद्ध परंपराओं और संस्कृति का सम्मान करने का अवसर है।

जनजातीय समाज की ताकत

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि जनजातीय समाज देश की विविधता की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने बताया कि भगवान बिरसा मुंडा संकल्प और संगठन के प्रतीक थे। उनके योगदान को याद करते हुए, उन्होने कहा कि जब तक समाज की सबसे कमजोर कड़ी मजबूत नहीं होगी, तब तक देश की विकास यात्रा अधूरी रहेगी।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार जनजातीय समाज के सम्मान और सशक्तिकरण के लिए निरंतर प्रयासरत है। जहां जनजातीय बजट को तीन गुना बढ़ाया गया है, वहीं केंद्र सरकार की नीतियां जनजातीय विकास की दिशा में संवेदनशीलता का परिचायक हैं।'

128 जनजातीय गांवों का चयन

सीएम धामी ने यह भी जानकारी दी कि प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान के तहत उत्तराखंड के 128 जनजातीय गांवों को चिन्हित किया गया है। इन गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका के विकास के लिए विशेष कार्यक्रम चलाए जाएंगे।

शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में पहल

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा विभिन्न पहलें की जा रही हैं। प्रदेश में चार एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय संचालित हैं, और पिथौरागढ़ जिले में नए एकलव्य विद्यालय खोलने का प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास है। इसके अलावा, सरकार प्राथमिक से स्नातकोत्तर तक छात्रवृत्ति योजना चला रही है, जिसका लाभ हजारों जनजातीय छात्रों को मिल रहा है।

प्रदेश में आईटीआई कॉलेज भी स्थापित किए गए हैं, जहां युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण की सुविधाएं दी जा रही हैं। इसके अलावा, जनजातीय बेटियों के विवाह हेतु ₹50,000 की अनुदान योजना भी लागू की गई है। यह सभी उपाय जनजातीय समुदाय को मुख्यधारा में लाने का प्रयास करते हैं।

जनजातीय गौरव दिवस का महत्व

सीएम धामी ने इस बात पर जोर दिया कि प्रधानमंत्री मोदी ने 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। यह दिवस न केवल भगवान बिरसा मुंडा के योगदान को याद करने का अवसर है, बल्कि जनजातीय संस्कृति और इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का जरिया भी है।

उन्होंने कहा, "प्रदेश सरकार इस महोत्सव के आयोजन के लिए 50 लाख रुपये की वित्तीय सहायता देती है ताकि जनजातीय संस्कृति का संरक्षण और विकास हो सके।"

आर्थिक और सांस्कृतिक विकास की दिशा में कदम

मुख्यमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि जनजातीय शो और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें राज्यसभा सांसद और अन्य कई जनप्रतिनिधि भी शामिल रहे। यह कार्यक्रम जनजातीय समाज की आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण ठहराए गए हैं।

उन्होंने कहा, "हम 'विकल्प रहित संकल्प' के साथ उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने हेतु दृढ़ संकल्पित हैं।"

इस अवसर पर राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक खजान दास, मुन्ना सिंह चौहान, और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।

इस दिशा में उठाए गए कदम निश्चित रूप से जनजातीय समुदाय के विकास को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाएंगे।

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टीम अमृति बाजार पत्रिका

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