ओमकारानंद महाविद्यालय देवप्रयाग में वैक्सीनेशन पर संगोष्ठी का आयोजन
ओमकारानंद महाविद्यालय देवप्रयाग में वैक्सीनेशन पर संगोष्ठी का आयोजन
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कम शब्दों में कहें तो, ओमकारानंद सरस्वती राजकीय महाविद्यालय, देवप्रयाग में पूर्वाग्रह पर आधारित एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें वैक्सीनेशन के महत्व और इतिहास पर गहन चर्चा की गई।
टिहरी गढ़वाल, 30 अगस्त 2025। आज ओमकारानंद सरस्वती राजकीय महाविद्यालय, देवप्रयाग में आईक्यूएसी के बैनर तले आयोजित साप्ताहिक संकाय संगोष्ठी श्रृंखला में प्राणि विज्ञान विभाग के प्राध्यापक डॉ. आदिल कुरैशी ने “वैक्सीनेशन” विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। इस संगोष्ठी का उद्देश्य छात्रों और faculty के बीच वैक्सीनेशन के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा।
संगोष्ठी की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्रभारी प्राचार्य डॉ. अर्चना धपवाल ने की, जबकि संचालन की जिम्मेदारी डॉ. लीना पुंडीर के कंधों पर थी। कार्यक्रम में महाविद्यालय के सभी प्राध्यापक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
वैक्सीनेशन का महत्व
डॉ. कुरैशी ने अपने व्याख्यान में वैक्सीनेशन के इतिहास और उसकी आधुनिकता को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि वैक्सीनेशन की यात्रा 1780 में फैली चेचक महामारी से शुरू हुई थी और आज के समय में कोविड-19 महामारी तक पहुंच गई है। इस दौरान उन्होंने विभिन्न प्रकार की वैक्सीन और उनकी कार्यप्रणाली की व्याख्या की, जो मानव शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
वैक्सीनेशन पर चर्चा का प्रभाव
संगोष्ठी ने छात्रों के बीच वैक्सीनेशन के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मदद की। डॉ. कुरैशी ने बताया कि सही जानकारी और जागरूकता वैक्सीनेशन के महत्व को समझने में सहायक होती है। उन्होंने बताया कि कैसे वैक्सीनेशन न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि सामुदायिक स्वास्थ्य को भी सुदृढ़ करता है। इस प्रकार की जानकारी से छात्रों को वैक्सीनेशन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में मदद मिलेगी।
संगोष्ठी ने यह भी प्रमाणित किया कि शैक्षिक संस्थानों का यह दायित्व बनता है कि वे छात्रों को स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों पर जागरूक करें।
इस प्रकार की संगोष्ठियों का आयोजन न केवल छात्रों की जानकारी बढ़ाता है, बल्कि यह उन्हें स्वस्थ भविष्य की ओर भी निर्देशित करता है। ऐसे कार्यक्रम समाज में वैक्सीनेशन की आवश्यकता को ही नहीं, बल्कि उसके लाभों को भी दर्शाते हैं।
कार्यक्रम में ओमकारानंद महाविद्यालय के सभी प्राध्यापक उपस्थित रहे। ऐसे महत्वपूर्ण आयोजनों से यह सिद्ध होता है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक जागरूकता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
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संपादित: टीम अमrita बाजार पत्रिका - राधिका शर्मा
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