किसान हमारे असली पूंजी - मुख्यमंत्री धामी का संदेश, सरकार की नीतियाँ बनाएंगी भविष्य को समृद्ध
किसान हमारे असली पूंजी - मुख्यमंत्री धामी का संदेश, सरकार की नीतियाँ बनाएंगी भविष्य को समृद्ध
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कम शब्दों में कहें तो, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पंतनगर कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में वृहद कृषक सम्मेलन का शुभारम्भ किया। उन्होंने राज्य के रजत जयंती उत्सव के अवसर पर किसानों को समर्पित कई महत्वपूर्ण योजनाओं का उल्लेख किया, जिनका उद्देश्य किसानों का सशक्तिकरण और उत्तराखंड के कृषि क्षेत्र को समृद्ध बनाना है।
मुख्यमंत्री धामी ने शुक्रवार को आयोजित वृहद कृषक सम्मेलन में किसानों को बधाई देते हुए कहा कि "किसानों का परिश्रम और त्याग हमारी सच्ची पूंजी है।" उन्होंने बताया कि पिछले 25 वर्षों में किसानों ने राज्य को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह सम्मेलन केवल कृषि योजनाओं की चर्चा नहीं है, बल्कि यह सभी किसानों और उनके परिवारों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का अवसर भी है।
कृषि का महत्व
मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि हमारे समाज की जड़ें खेती-किसानी में ही हैं। उन्होंने कहा कि भारत आदि काल से एक कृषि प्रधान देश है। शास्त्रों में भी कृषि को संपत्ति और मेधा प्रदान करने वाली मान्यता प्राप्त है। धामी का कहना है कि अपने पिता के तौर पर एक किसान से मिलने वाली संतुष्टि की व्याख्या कर पाना मुश्किल है, और यही कारण है कि वह आज भी खेती से जुड़े रहते हैं।
किसानों के लिए सरकारी नीतियाँ
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना को मुख्यमंत्री ने किसानों के लिए वरदान बताया। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद केंद्र सरकार द्वारा किसानों के सशक्तिकरण में अभूतपूर्व कार्य हुए हैं। अब तक देशभर के 11 करोड़ किसानों को इस योजना के माध्यम से आर्थिक सहायता मिल रही है, जिसमें उत्तराखंड के लगभग 9 लाख किसानों को लाभ द्वारा दिया जा रहा है।
किसानों का कल्याण हमारी प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने कृषि मंत्री गणेश जोशी के साथ बैठक में किसानों के कल्याण के लिए विभिन्न योजनाओं का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य में अभूतपूर्व वृद्धि कर किसानों को उनके फसल का उचित मूल्य प्रदान किया जा रहा है। इसी के साथ, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ भी किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से रक्षा कर रहा है।
किसान आय वृद्धि के उपाय
मुख्यमंत्री ने बताया कि 200 करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान कर पॉलीहाउस निर्माण को बढ़ावा दिया गया है। वर्तमान में राज्य में 350 पॉलीहाउस स्थापित किए जा चुके हैं। इसके अलावा, गेहूँ और गन्ना की कीमत में वृद्धि की गई है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में वर्षा आधारित खेती के लिए 1000 करोड़ रुपये की लागत से प्रोजेक्ट स्वीकृत किया गया है।
बागवानी और टी-टूरिज्म के लिए नए अवसर
मुख्यमंत्री ने बागवानी के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योजनाओं का जिक्र किया। जापान के सहयोग से चलाई जा रही उत्तराखंड एकीकृत औद्यानिक विकास परियोजना और सगंध खेती जैसे प्रयासों से 28,000 से अधिक किसान जुड़े हुए हैं। इसके साथ ही चाय उत्पादकता में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर उत्पन्न हो रहे हैं।
भविष्य के लिए एक नई शुरुआत
मुख्यमंत्री धामी ने रजत जयंती वर्ष में उत्तराखंड का किसान-उत्तराखंड का गौरव का संदेश दिया। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि मिलकर उत्तराखंड को एक समृद्ध और आत्मनिर्भर कृषि राज्य बनाएं। उनका मानना है कि यह सभी प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ और समृद्ध भविष्य का निर्माण करेंगे।
किसान सम्मेलन में कृषि मंत्री गणेश जोशी ने भी सभी को रजत जयंती की शुभकामनाएं दीं, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों की प्रशंसा की। उन्होंने कृषि क्षेत्र में सरकार के प्रयासों की जानकारी दी और किसानों के कल्याण की दिशा में निरंतर कार्य करने का आश्वासन दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए क्षेत्रीय विधायक तिलकराज बेहड़ ने भी मुख्यमंत्री के प्रयासों की सराहना की और जनसमस्याओं के समाधान पर ध्यान केंद्रित करने के लिए एक जुटता की आवश्यकता पर बल दिया।
सभी योजनाओं और प्रयासों का उद्देश्य किसानों को सशक्त बनाना, उनकी आय बढ़ाना और कृषि के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को सुनिश्चित करना है। लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में सहभागिता को बढ़ावा देने के लिए यह आवश्यक है कि हम सभी मिलकर किसानों की समस्याओं का समाधान करें।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विभिन्न स्टालों का निरीक्षण भी किया।
टिप्पणीः यह कार्यक्रम यह दर्शाता है कि कैसे किसानों की मेहनत और सरकार की नीतियों का एक सकारात्मक प्रभाव हो सकता है। उत्तराखंड को एक समृद्ध और आत्मनिर्भर कृषि राज्य बनाने की दिशा में उठाए गए कदम निश्चित रूप से आने वाले समय में फलित होंगे।
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सादर,
टीम अमृता बाजार पत्रिका (निर्मला शर्मा)
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