टिहरी में ओलावृष्टि से फसलों को हुआ भारी नुकसान, प्रशासन ने किया स्थल निरीक्षण

May 8, 2026 - 00:44
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टिहरी में ओलावृष्टि से फसलों को हुआ भारी नुकसान, प्रशासन ने किया स्थल निरीक्षण
टिहरी में ओलावृष्टि से फसलों को हुआ भारी नुकसान, प्रशासन ने किया स्थल निरीक्षण

टिहरी में ओलावृष्टि से फसलों को हुआ भारी नुकसान, प्रशासन ने किया स्थल निरीक्षण

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कम शब्दों में कहें तो, टिहरी गढ़वाल में 6 और 7 मई को हुई तेज ओलावृष्टि ने किसानों की फसलों और बगीचों को व्यापक नुकसान पहुंचाया है। यह स्थिति जानने के लिए कृषि और कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी के निर्देश पर प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया।

टिहरी गढ़वाल, 07 मई 2026। पिछले हफ्ते की ओलावृष्टि ने टिहरी जनपद में किसानों के लिए संकट पैदा कर दिया है। जौनपुर विकासखंड के नैनबाग, ललूर पट्टी, पंतवाड़ी, श्रीकोट, सेंडुल, मिरियागांव, सल्तवाड़, भूडगांव, सैंजी, भटोली, बनोगी, और सिलगांव जैसे गांवों की फसलों को गंभीर क्षति पहुंची है।

क्षति का आकलन

निरीक्षण टीम ने गांवों का दौरा करते हुए सेब, आड़ू और अन्य बागवानी फसलों में हुए नुकसान का आकलन किया। इस अवसर पर जिला उद्यान अधिकारी अरविंद शर्मा, कृषि एवं भूमि संरक्षण विभाग के अधिकारी, एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी के प्रतिनिधि और राजस्व विभाग की टीम भी मौके पर उपस्थित थीं। इन सभी ने मिलकर ओलावृष्टि के कारण हुए आर्थिक नुकसान का सही आंकलन करने का प्रयास किया।

किसानों की सहायता के लिए प्रशासन का प्रयास

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने प्रभावित किसानों को फसल क्षति की जानकारी दी और सरकारी योजनाओं तथा फसल बीमा के तहत मिलने वाली राहत के बारे में उन्हें जागरूक किया। सेंडुल गांव के किसान सुरेश ने मौके पर ही भारत सरकार के कृषि रक्षा पोर्टल के टोल फ्री नंबर 14447 पर अपनी सेब की फसल के नुकसान का क्लेम भी दर्ज कराया।

फसल बीमा हेतु समयसीमा

अधिकारियों ने सभी किसानों से अपील की कि वे समय पर फसल बीमा क्लेम दर्ज कराएं ताकि उन्हें जल्द से जल्द राहत मिल सके। यह निर्णय किसानों के कल्याण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, विशेषकर ऐसे समय में जब उन्हें प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ता है।

टीम अमृता बाजार पत्रिका में आईएएस (प्रशिक्षु) ज्योति भी निरीक्षण के दौरान मौजूद रहीं। उनकी उपस्थिति से प्रशासनिक प्रयासों को मजबूती मिली।

इस घटना ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि प्राकृतिक आपदाएँ किसानों के लिए कितनी विनाशकारी हो सकती हैं। उचित प्रबंधन और सरकार की सहायता के बिना, किसानों को इस स्थिति से उबरना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

फसल क्षति के अलावा, स्थानीय कृषि उत्पादकों को भी इस स्थिति से वित्तीय संकट का सामना करना पड़ सकता है, जो उनकी भलाई के लिए चिंताजनक है। ऐसे में आवश्यक है कि सरकार एवं प्रशासन तुरंत कदम उठाएं और आवश्यक सहायता प्रदान करें। इसके साथ ही, किसानों को भी जागरूक रहकर अपनी फसल सुरक्षा की योजनाओं का लाभ उठाना चाहिए।

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