बच्चों में कफ सिरप के उपयोग पर केंद्र की एडवाइजरी को सभी जनपदों में सख्ती से लागू करने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय का आदेश

Oct 6, 2025 - 07:44
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बच्चों में कफ सिरप के उपयोग पर केंद्र की एडवाइजरी को सभी जनपदों में सख्ती से लागू करने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय का आदेश
बच्चों में कफ सिरप के उपयोग पर केंद्र की एडवाइजरी को सभी जनपदों में सख्ती से लागू करने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय का आदेश

बच्चों की सुरक्षा पर केंद्र की सख्त एडवाइजरी

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कम शब्दों में कहें तो, बच्चों की सुरक्षा और उनके स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के मकसद से भारत सरकार ने कफ सिरप के उपयोग पर सख्त निर्देश दिए हैं। यह निर्देश स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार द्वारा सभी जिलाधिकारियों और मुख्य चिकित्साधिकारियों को जारी किए गए हैं।

भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 3 अक्टूबर 2025 को एक महत्वपूर्ण मानक एडवाइजरी जारी की है। इस एडवाइजरी का उद्देश्य बच्चों में कफ सिरप के विवेकपूर्ण उपयोग और वितरण को सुनिश्चित करना है, जिससे उनकी जनस्वास्थ्य में सुधार हो सके।

विशेषज्ञों की सलाह और दवाओं का संयमित उपयोग

डॉ. आर. राजेश कुमार ने स्पष्ट रूप से कहा है कि दो वर्ष से कम आयु के बच्चों को किसी भी प्रकार की खांसी या जुकाम की दवा नहीं दी जानी चाहिए। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी बताया कि पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में इन दवाओं का सामान्य उपयोग अनुशंसित नहीं है। केवल विशेष चिकित्सकों की सलाह पर ही, सही खुराक में और न्यूनतम समय तक इनका उपयोग किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि अक्सर बच्चों की खांसी और जुकाम की समस्या स्वाभाविक रूप से ठीक हो जाती है, इसीलिए चिकित्सकों को अनावश्यक दवाओं के उपयोग से बचना चाहिए। यह दिशा निर्देश माता-पिता के लिए भी महत्वपूर्ण है, उन्हें किसी भी दवा का सेवन करने से पहले विशेषज्ञ से सलाह लेने की सलाह दी गई है।

प्रभावित क्षेत्रों में जांच और अनुपालन सुनिश्चित करना

स्वास्थ्य सचिव ने सभी जिलों के औषधि निरीक्षकों को निर्देश दिए हैं कि वे कफ सिरप के नमूनों को संभालकर प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजें, ताकि बाजार में कुछ भी दोषपूर्ण या हानिकारक दवा हो, उसे तुरंत हटाया जा सके।

उन्होंने यह स्पष्ट किया है कि सभी चिकित्सकों और औषधि विक्रेताओं को केंद्र की इस एडवाइजरी का पालन करना अनिवार्य है। इसके अलावा, सभी स्वास्थ्य संस्थानों, सरकारी अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, और निजी चिकित्सा संस्थानों को यह निर्देश दिया गया है कि वे केवल Good Manufacturing Practices (GMP) के अनुसार निर्मित औषधियों की खरीद और वितरण सुनिश्चित करें।

जनता से अपील

डॉ. आर. राजेश कुमार ने जनता से अपील की है कि कोई भी दवा देने से पहले, विशेषकर बच्चों को, डॉक्टर की सलाह अवश्य लें। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और जनस्वास्थ्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। साथ ही, उन्होंने चेतावनी दी है कि प्रतिबंधित या अधोमानक दवाओं के उपयोग पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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यह नीति न केवल बच्चों की सुरक्षा को सुनिश्चित करेगी बल्कि माँ-बापों को भी सही निर्णय लेने में मदद करेगी। सभी को इस दिशा में ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि हम अपने बच्चों को सुरक्षित और स्वस्थ रख सकें।

साभार, टीम अमृता बाजार पत्रिका द्वारा: सोनिया मेहरा

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