भारत की पहली वेरिएबल पम्प स्टोरेज प्लांट टिहरी (1000 मेगावाट) अंतिम चरण के करीब

Oct 4, 2025 - 14:44
 113  501.8k
भारत की पहली वेरिएबल पम्प स्टोरेज प्लांट टिहरी (1000 मेगावाट) अंतिम चरण के करीब
भारत की पहली वेरिएबल पम्प स्टोरेज प्लांट टिहरी (1000 मेगावाट) अंतिम चरण के करीब

भारत की पहली वेरिएबल पम्प स्टोरेज प्लांट टिहरी (1000 मेगावाट) अंतिम चरण के करीब

टिहरी गढ़वाल, 04 अक्टूबर 2025। Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - Amrita Bazaar Patrika भारत की पहली वेरिएबल पम्प स्टोरेज प्लांट (पीएसपी) टिहरी का कार्य अब अंतिम चरण में पहुँच गया है। इस प्रोजेक्ट के तहत चार इकाइयों में से दो यूनिटें, जो 250 मेगावाट की हैं, वाणिज्यिक उत्पादन शुरू कर चुकी हैं। शेष दो यूनिटों (500 मेगावाट) का कार्य तेजी से चल रहा है और इन्हें जल्द ही भारतीय ग्रिड से जोड़ा जाएगा।

कम शब्दों में कहें तो

भारत की पहली वेरिएबल पम्प स्टोरेज प्लांट टिहरी की पहली दो यूनिटों ने वाणिज्यिक उत्पादन शुरू कर दिया है, जबकि शेष दो यूनिटें अंतिम चरण में हैं। यह परियोजना देश की ऊर्जा सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान

टिहरी पीएसपी परियोजना तकनीकी दृष्टि से ही नहीं, बल्कि पर्यावरणीय और आर्थिक दृष्टि से भी एक ऐतिहासिक कदम है। इसने भारत की कोयले पर निर्भरता कम करने और हरित ऊर्जा के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। परियोजना से जुड़े निर्माण कार्यों ने हजारों रोजगार के अवसर पैदा किए हैं, जो क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद कर रहे हैं।

स्थानीय स्तर पर, परियोजना ने निर्माण सामग्री, परिवहन, आवास, खाद्य सेवाओं और सहायक उद्योगों की मांग में वृद्धि की है। इससे क्षेत्र में एक मजबूत आर्थिक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल दीर्घकालिक आर्थिकी के लिए अनुकरणीय है। टिहरी अब न केवल राष्ट्रीय, बल्कि वैश्विक ऊर्जा मानचित्र पर भी एक प्रमुख स्थान रखती है।

मजबूत ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में कदम

भारत ने 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। इस दिशा में पम्प स्टोरेज परियोजनाएँ ऊर्जा संतुलन और स्थिरता के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो रही हैं। सौर और पवन ऊर्जा मौसम और समय पर निर्भर होती है, जबकि पीएसपी तकनीक वास्तविक समय में बिजली की मांग के अनुसार ऊर्जा का भंडारण और रिलीज़ करने में सक्षम है।

टिहरी पीएसपी ऑफ-पीक घंटों (जब मांग कम होती है) में थर्मल और नवीकरणीय उत्पादन को संतुलित करेगी, वहीं पीक आवर्स (जब मांग अधिक हो) में जल का उपयोग कर विद्युत उत्पादन करेगी। इस प्रकार, यह परियोजना एक “वाटर बैटरी” के रूप में कार्य करेगी।

भविष्य की उम्मीदें

परियोजना के पूरा होने पर उत्तरी क्षेत्र की उत्पादन क्षमता में 1000 मेगावाट की बढ़ोतरी होगी। यह लगभग 2442 मिलियन यूनिट की वार्षिक उत्पादन क्षमता के साथ ग्रिड की स्थिरता, सुरक्षा और विश्वसनीयता में उल्लेखनीय सुधार करेगी। इसके साथ ही, यह भारत के ऊर्जा भंडारण क्षमता में भी एक नई दिशा प्रदान करेगी, जो एक स्वच्छ और सतत भविष्य की ओर ले जाने में सहायक होगी।

इस परियोजना के सफल संचालन से बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करना और पर्यावरणीय दृष्टि से स्थायी विकास को सुनिश्चित करना संभव हो सकेगा।

बायोस्टरिज़ेशन, ऊर्जा संतुलन और स्थिरता की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए यह परियोजना एक उज्जवल भविष्य की ओर इंगित करती है।

इस प्रकार, टिहरी का पम्प स्टोरेज प्लांट न केवल ऊर्जा के क्षेत्र में एक नई क्रांति लाने जा रहा है, बल्कि रोजगार, आर्थिक विकास एवं पर्यावरण संरक्षण के साथ एक समृद्ध भविष्य की भी ओर ले जाएगा।

अधिक अपडेट के लिए, कृपया हमारे वेबसाइट पर जाएं: Amrita Bazaar Patrika.

सादर,

टीम अमृता बाजार पत्रिका
सीमा शर्मा

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0