मुख्यमंत्री धामी का शेफ संवाद: उत्तराखंड के स्वाद को “लोकल से ग्लोबल” बनाने का आह्वान

Jan 18, 2026 - 00:44
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मुख्यमंत्री धामी का शेफ संवाद: उत्तराखंड के स्वाद को “लोकल से ग्लोबल” बनाने का आह्वान
मुख्यमंत्री धामी का शेफ संवाद: उत्तराखंड के स्वाद को “लोकल से ग्लोबल” बनाने का आह्वान

मुख्यमंत्री धामी का शेफ संवाद: उत्तराखंड के स्वाद को “लोकल से ग्लोबल” बनाने का आह्वान

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कम शब्दों में कहें तो, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आम्रपाली विश्वविद्यालय में आयोजित “शेफ संवाद” कार्यक्रम में युवा शेफों के साथ उत्तराखंड के पारंपरिक व्यंजनों को वैश्विक मंच पर लाने की चर्चा की।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आम्रपाली विश्वविद्यालय परिसर से वर्चुअल माध्यम से जुड़ते हुए श्रीअन्न आधारित “शेफ संवाद” कार्यक्रम में अपनी सहभागिता दिखाई। इस अनूठे आयोजन में देशभर के युवा शेफ, होटल और पर्यटन विशेषज्ञ, शिक्षाविद् और छात्र बड़ी संख्या में उपस्थित थे। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य उत्तराखंड के पारंपरिक व्यंजनों और इससे जुड़े रोजगार तथा पर्यटन अवसरों पर संवाद स्थापित करना था।

शेफों का सवाल, मुख्यमंत्री का जवाब

इस कार्यक्रम में, युवा शेफों ने उत्तराखंड के पारंपरिक भोजन के प्रचार, गुणवत्ता मानकों और सरकारी प्रयासों पर कई महत्वपूर्ण प्रश्न किए। शेफ शक्ति प्रसाद ने जब मेन्यू में पारंपरिक व्यंजनों को शामिल करने की बात की, तो मुख्यमंत्री ने पुष्टि की कि राज्य सरकार ने सभी होटलों में उत्तराखंड के पारंपरिक व्यंजनों को शामिल करने का निर्देश दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री आवास और सरकारी कार्यक्रमों में मेहमानों को स्थानीय व्यंजन प्राथमिकता से परोसे जाते हैं, जिससे उनके प्रति सम्मान और पहचान स्थापित हो सके।

शेफ समुदाय को एकीकृत करने की योजना

आगे बढ़ते हुए, शेफ संजीव जुयाल ने सवाल किया कि क्या उत्तराखंड के सभी शेफों को एक मंच पर लाने का कोई योजना है। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि इस दिशा में पर्यटन विभाग को एक समग्र प्रस्ताव बनाने के लिए निर्देशित किया होगा, जिससे राज्य के शेफ समुदाय को एक प्लेटफॉर्म पर लाया जा सके और उन्हें राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवसर प्राप्त हो सकें।

पारंपरिक भोजन की शुद्धता और मानकीकरण

पारंपरिक उत्तराखंडी भोजन की गुणवत्ता बनाए रखने के विषय में, शेफ सुनील उपाध्याय ने सवाल पूछा, जिसके जवाब में मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार इस दिशा में गंभीरता से काम कर रही है। पारंपरिक व्यंजनों की पहचान और गुणवत्ता को संरक्षित करने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

स्थानीय संसाधनों का उपयोग और स्वरोजगार

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि उत्तराखंड के पारंपरिक भोजन में करियर बनाने के इच्छुक युवाओं के लिए सरकार योजनाबद्ध तरीके से प्रयास कर रही है। उनका लक्ष्य है कि युवा स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान के आधार पर स्वरोजगार और उद्यमिता की ओर अग्रसर हों।

संस्कृति का संवाहक: शेफ की भूमिका

धामी ने कार्यक्रम में कहा कि यह संवाद केवल भोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड की संस्कृति, परंपरा और पहचान से घनिष्ठ रूप से जुड़ा हुआ है। उन्होंने शेफों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया क्योंकि वे स्थानीय स्वाद के माध्यम से राज्य की पहचान को वैश्विक मंच पर पहुंचाते हैं।

श्रीअन्न: विकास का सशक्त माध्यम

मुख्यमंत्री ने श्रीअन्न पर चर्चा करते हुए इसे केवल एक फसल नहीं बल्कि उत्तराखंड के समग्र विकास का एक सशक्त माध्यम बताया। उन्होंने मंडुवा, झंगोरा, कोदा और रामदाना जैसी फसलें, जो कम पानी में उगने वाली और पोषक तत्वों से भरपूर हैं, की महत्ता बताई।

नौकरी देने का नया दृष्टिकोण

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उत्तराखंड का युवा अब नौकरी मांगने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बने। पलायन निवारण आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए, उन्होंने बताया कि हाल के वर्षों में 44 प्रतिशत युवा उत्तराखंड वापस लौटे हैं, जो राज्य में बढ़ते अवसरों का प्रमाण है।

सार्वजनिक अपील

कार्यक्रम के अंत में, मुख्यमंत्री धामी ने शेफ समुदाय से विशेष अपील की कि वे उत्तराखंड के पारंपरिक व्यंजनों को “लोकल से ग्लोबल” बनाने के लिए सब मिलकर प्रयास करें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि “शेफ संवाद” से निकले विचार उत्तराखंड को एक नए विजन के साथ आगे बढाने में सहायक होंगे, और राज्य को सशक्त, आत्मनिर्भर और गौरवशाली बनाने की दिशा में नियुक्त कर सकेंगे।

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सादर,
टीम अमृता बाजार पत्रिका
स्नेहा शर्मा

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