मुख्यमंत्री ने कहा: "दिव्यांगजन दिव्यांग नहीं, वे हैं समाज के दिव्य अंग"
मुख्यमंत्री ने कहा: "दिव्यांगजन दिव्यांग नहीं, वे हैं समाज के दिव्य अंग"
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कम शब्दों में कहें तो, विश्व दिव्यांगजन दिवस पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिव्यांगजनों को सम्मानित किया और उन्हें समाज का महत्त्वपूर्ण हिस्सा बताया।
हल्द्वानी में बुधवार को विश्व दिव्यांगजन दिवस के अवसर पर एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिव्यांगजन प्रतिभागियों के लिए राज्य स्तरीय दक्षता पुरस्कारों का वितरण किया। एमबीपीजी कॉलेज ऑडिटोरियम में आयोजित इस समारोह में दिव्यांगजनों को पुरस्कार राशि, मेडल, प्रशस्ति पत्र और मानपत्र प्रदान किए गए।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि आज का दिन केवल एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह उन असाधारण व्यक्तियों को सम्मानित करने का मौका है, जिन्होंने अपनी कठिनाइयों को अवसर में बदला है और समाज में प्रेरणाश्रोत बने हैं। उन्होंने कहा, "दिव्यांगता शरीर में हो सकती है, लेकिन सपनों में नहीं।" इस बात से उन्होंने यह स्पष्ट किया कि दिव्यांगजन विभिन्न क्षेत्रों में देश का गौरव बढ़ा रहे हैं और वे हमारे समाज के दिव्य अंग हैं।
समारोह की प्रमुख बातें
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि भारत के पहले पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता मुरलीकांत पेटकर, इंग्लिश चैनल पार करने वाले सत्येंद्र सिंह लोहिया और बिना हाथों के विश्व पैरा तीरंदाजी चैंपियन बनीं शीतल देवी जैसे प्रेरणाश्रोतों के उदाहरण साझा किए।
इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने भारत की दिव्यांग महिला क्रिकेट टीम द्वारा हाल ही में कोलंबो में आयोजित टी-20 ब्लाइंड वूमेन वर्ल्ड कप-2025 जीतने पर गर्व का अनुभव व्यक्त किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सरकार दिव्यांगजनों के लिए समान अवसर तथा गरिमामय जीवन सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
सरकारी योजनाएं और भविष्य की दिशा
मुख्यमंत्री ने कहा कि नए भवनों, अस्पतालों और बस अड्डों के निर्माण में दिव्यांगजन-अनुकूल व्यवस्थाएँ अनिवार्य की गई हैं। इसके अलावा, कई पुराने भवनों में भी सुगम्यता के लिए आवश्यक परिवर्तन किए गए। “कॉमन साइन लैंग्वेज” के प्रसार और दिव्यांगजन हितैषी स्टार्ट-अप्स को प्रोत्साहन देने की योजना भी सरकार की प्राथमिकता में है।
राज्य सरकार द्वारा दिव्यांगजनों के लिए आर्थिक सहायता के रूप में कई योजनाएं शुरू की गई हैं। राज्य से आर्थिक रूप से कमजोर दिव्यांगजनों को ₹1500 मासिक पेंशन, दिव्यांग बच्चों के अभिभावकों को ₹700 मासिक भरण-पोषण अनुदान और विभिन्न स्थितियों के अनुसार विशेष पेंशन योजनाएं मुहैया कराई जाती हैं।
नवोन्मेष और तकनीकी पहल
मुख्यमंत्री ने राज्य के "यंग इनोवेटिव माइंड्स" से अपील की कि वे अपने आविष्कारों में दिव्यांगजनों की जरूरतों को विशेष स्थान दें और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीक विकसित करें ताकि दिव्यांगजनों के जीवन को और सुगम बनाया जा सके।
समारोह में दी गई पुरस्कार राशि
इस कार्यक्रम में 41 दिव्यांग प्रतिभागियों को ₹8000 की पुरस्कार राशि, मेडल, प्रशस्ति पत्र और मानपत्र प्रदान किए गए। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान सभी प्रतिभागियों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की और उनके मनोबल को बढ़ाया।
इस कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष दीपा दरमवाल, मेयर गजराज बिष्ट, विधायक बंशीधर भगत, सरिता आर्या, और अन्य कई पदाधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
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सादर, टीम अमृता बाजार पत्रिका - साक्षी शर्मा
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