मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संत समाज के योगदान की सराहना की
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कम शब्दों में कहें तो, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संत समाज के योगदान की सराहना करते हुए 34 लाख रुपए की मदद की घोषणा की। यह सहायता प्राकृतिक आपदा से प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण में उपयोग की जाएगी।
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से डामकोठी, हरिद्वार में अखाड़ा परिषद के प्रतिनिधिमंडल ने शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान, परिषद ने हाल ही में उत्तराखंड में आई प्राकृतिक आपदा से प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण हेतु मुख्यमंत्री राहत कोष में ₹34 लाख की सहयोग राशि दी। इसका उद्देश्य प्रभावित क्षेत्रों में व्यापक पैमाने पर पुनर्वास कार्य शुरू करना है।
अखाड़ा परिषद ने अन्य सहायता का भी दायित्व उठाते हुए एक आपदा प्रभावित गांव को गोद लेने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने इसे सेवा और संवेदना का एक अद्वितीय उदाहरण बताया है।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा, "उत्तराखंड की सेवा परंपरा में साधु-संतों का योगदान सदैव अग्रणी रहा है। इस कठिन समय में संत समाज का सहयोग केवल पुनर्निर्माण में ही मदद नहीं करता, बल्कि यह प्रभावित लोगों के लिए आशा एवं संबल की किरण भी बनता है।" उन्होंने ये भी बताया कि राज्य सरकार आपदा प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित कार्य कर रही है और सामाजिक सहयोग से इन कार्यों की गति बढ़ रही है।
संत समाज और सरकार के बीच सामंजस्य
संत समाज ने मुख्यमंत्री के प्रयासों की सराहना की
अखाड़ा परिषद के संतों ने मुख्यमंत्री के ग्राउंड जीरो पर जाकर प्रभावितों से संवाद स्थापित करने और राहत कार्यों की निगरानी करने के प्रयासों की प्रशंसा की। संतों का कहना है कि मुख्यमंत्री ने प्रत्येक प्रभावित परिवार को भरोसा दिलाया है कि संकट के इस समय में सरकार उनके साथ खड़ी है।
इस दौरान महानिर्वाणी अखाड़े के महंत रविंद्र पुरी महाराज, श्री पंचायती नया अखाड़ा उदासीन के अध्यक्ष महंत धुनी दास जी, महामंडलेश्वर हरिचेतनानंद, बाबा हठयोगी, महामंडलेश्वर स्वामी रूपेंद्र प्रकाश सहित अन्य कई प्रमुख संतगण उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री धामी और संत समाज के बीच यह सकारात्मक संवाद देश में सेवा भाव को उजागर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसे देखकर यह कहा जा सकता है कि जब समाज एकजुट होता है, तो कोई भी आपदा हमें कमजोर नहीं कर सकती।
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टीम अमृता बाजार पत्रिका