विकसित भारत@2047: राष्ट्रीय संगोष्ठी में विचारों का मंथन

Dec 20, 2025 - 00:44
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विकसित भारत@2047: राष्ट्रीय संगोष्ठी में विचारों का मंथन
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कम शब्दों में कहें तो, यमकेश्वर और हरिद्वार में 19 दिसंबर 2025 को आयोजित एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी ने भारतीय इतिहास, संस्कृति, राजनीति और समाज के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।

यमकेश्वर/हरिद्वार, 19 दिसंबर 2025। महायोगी गुरु गोरखनाथ राजकीय महाविद्यालय बिथ्याणी (यमकेश्वर, पौड़ी गढ़वाल), राजकीय मॉडल महाविद्यालय मीठीबेरी (हरिद्वार) और राजकीय महाविद्यालय वेदीखाल के संयुक्त तत्वावधान में 'विकसित भारत@2047: एक संकल्प – भारतीय इतिहास, संस्कृति, राजनीति, समाज, ज्ञान व विज्ञान के संदर्भ में' विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का हाइब्रिड मोड में प्रथम दिवस संपन्न हुआ। यह आयोजन शिक्षा एवं विकास के मोर्चे पर एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है जो भारत के भविष्य के विकास के लिए एक संकल्प प्रस्तुत करता है।

संगोष्ठी का शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ बिथ्याणी, मीठीबेरी और वेदीखाल महाविद्यालयों के प्राचार्यों प्रो. योगेश शर्मा, प्रो. अर्चना गौतम और प्रो. वंदना तिवारी द्वारा मां सरस्वती के दीप प्रज्वलन से हुआ। मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत, उच्च शिक्षा निदेशक प्रो. विश्वनाथ खाली, संयुक्त निदेशक प्रो. आनंद सिंह उनियाल और विशिष्ट अतिथि डॉ. शैलेंद्र ने संगोष्ठी को संबोधित किया।

प्रथम सत्र: भारतीय ग्राम ज्ञान परंपरा

इस संगोष्ठी का पहला सत्र 'भारतीय ग्राम ज्ञान परंपरा' पर चर्चा के लिए समर्पित था। संयोजक और इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. उमेश त्यागी ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की और अतिथियों का स्वागत किया। इस सत्र में कई विद्वानों ने भारतीय ग्राम ज्ञान परंपरा पर विचार साझा किए, जिनमें डॉ. बालमुकुंद पांडे (राष्ट्रीय संगठन सचिव, अखिल भारतीय इतिहास संग्रहालय), प्रो. विवेक महेश्वरी (लकुलिश विश्वविद्यालय, अहमदाबाद), डॉ. नरेंद्र सिंह (केंद्रीय विश्वविद्यालय मोतीहारी), डॉ. मोहन चंद्रा रे दोसा पानी और डॉ. परमजीत कौर (खालसा कॉलेज, रूपनगर, पंजाब) शामिल थे।

द्वितीय सत्र: राजनीति और समाज पर विमर्श

संगोष्ठी का दूसरा सत्र राजनीति और समाज पर विमर्श के लिए आयोजित किया गया। इस दौरान प्रो. विग्नेश कुमार (मेरठ कॉलेज के पूर्व विभागाध्यक्ष), प्रो. ज्ञानोबा ढगे (कर्मवीर गणपत महाविद्यालय, नासिक), डॉ. श्वेता कौशल (खालसा कॉलेज, पंजाब), डॉ. सुशील भाटी (लक्सर महाविद्यालय) और डॉ. नागेंद्र पाल (राजकीय महाविद्यालय कांडा) ने अपने विचार साझा किए। आयोजन सचिव डॉ. कुलदीप चौधरी ने आभार व्यक्त किया।

विकसित भारत के संकल्प

संगोष्ठी का अगला दिन विकास के संकल्प पर चर्चा का अवसर प्रदान करेगा, जिसमें प्रो. संगीता मिश्रा (एसडीएसयूवी ऋषिकेश), प्रो. सुनील (केंद्रीय विश्वविद्यालय मोतीहारी), डॉ. सीमा त्यागी (राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर), डॉ. नीरज कुमार पाराशरी (राजकीय महाविद्यालय फरीदपुर आंवला), और डॉ. जगदीश कुमार (एमएम कॉलेज, खेकड़ा, बागपत) ने 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य पर अपनी बातें रखी। विभिन्न शोधार्थियों ने भारतीय ज्ञान परंपरा पर शोध पत्र भी प्रस्तुत किए।

संगोष्ठी ने विकास के संकल्प को मजबूत करने पर जोर दिया, जो भविष्य में भारत के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

संगोष्ठी के द्वितीय दिवस के सत्र कल आयोजित होंगे, जो संगोष्ठी में दी गई चर्चा को आगे बढ़ाएंगे।

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संपर्क: टीम अमृता बाजार पत्रिका

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