श्रीकोट गांव की एकता बनी मिसाल, संकट के समय इंसानियत ने जीती जाति को

Dec 31, 2025 - 00:44
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श्रीकोट गांव की एकता बनी मिसाल, संकट के समय इंसानियत ने जीती जाति को
श्रीकोट गांव की एकता बनी मिसाल, संकट के समय इंसानियत ने जीती जाति को

श्रीकोट गांव की एकता बनी मिसाल, संकट के समय इंसानियत ने जीती जाति को

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कम शब्दों में कहें तो, टिहरी गढ़वाल के श्रीकोट गांव ने मानवता की एक अद्भुत मिसाल पेश की है। जब संकट का समय आया, तो यहाँ के लोगों ने साबित कर दिया कि जाति में विभाजन से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है एकता और सहयोग।

टिहरी गढ़वाल। विकासखंड अंतर्गत ग्राम श्रीकोट (पोस्ट ऑफिस रौड़धार) में हाल ही में एक सामाजिक सौहार्द और आपसी सहयोग की अद्वितीय कहानी सामने आई है। यहां पर मुकेश बागड़ी नाम के एक ग्रामीण पर जंगल में भालू ने हमला किया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। इस हादसे में उनके चेहरे को अत्यधिक क्षति पहुंची। प्राथमिक उपचार के बाद परिवार ने उन्हें श्रीनगर अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उनकी स्थिति को नाजुक देखते हुए चिकित्सकों ने उन्हें एम्स ऋषिकेश रेफर किया।

गांव की एकजुटता पर आई चुनौती

मुकेश बागड़ी की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण, उनका उपचार करना परिवार के लिए कठिनाई भरा था। ऐसे समय में गांव के बागड़ी समाज और रतूड़ी समाज के लोगों ने मानवता को प्राथमिकता देते हुए एकजुटता दिखाई। सभी ने सामूहिक रूप से सहायता का संकल्प लिया और गांव के व्हाट्सएप समूह के माध्यम से आर्थिक सहायता की व्यवस्था की।

आर्थिक मदद की दिशा में पहल

गांव के लोग न केवल स्थानीय, बल्कि विदेशों में निवास कर रहे ग्रामीण भी अपने साथी का साथ देने के लिए आगे आए। उनकी आर्थिक मदद से न केवल मुकेश का उपचार संभव हो पाया, बल्कि गांव की सामाजिक एकजुटता भी मजबूत हुई। ग्रामीणों के अनुसार, ऐसे समय में सहायता करने की परंपरा उनकी संस्कृति का हिस्सा है और इससे गांव की पहचान एक परिवार के रूप में मजबूत होती है।

सामाजिक एकता की ऐतिहासिक परंपरा

ग्रामीणों का कहना है कि श्रीकोट गांव की पहचान उसकी एकता, भाईचारे और संकट में साथ खड़े होने की परंपरा से है। यह न केवल गांव के लिए, बल्कि समाज के लिए प्रेरणास्रोत है कि विपत्ति के समय पूरा गांव एकजुट होकर मानवता की सेवा में जुट जाता है।

निष्कर्ष

इस घटना ने हमें यह सिखाया है कि संकट के समय हमें जातीय और वर्गीय विभेदों को भूलकर एकजुट होना चाहिए। श्रीकोट गांव की इस अनूठी पहल ने मानवता की मिसाल पेश की है, जिसमें जाति नहीं, बल्कि मानवता को पहले रखा गया।

इस परिप्रेक्ष्य में, यह घटना केवल एक उदाहरण नहीं, बल्कि भारतीय समाज के लिए एक महत्वपूर्ण सबक है। ऐसे समय में जब विभाजन की चर्चा होती है, यह कहानी हमें याद दिलाती है कि एकता में ही शक्ति है।

हम मुकेश बागड़ी के स्वास्थ्य की कामना करते हैं और उम्मीद करते हैं कि वह जल्द ही स्वस्थ होकर अपने गांव लौटेंगे।

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Team Amrita Bazaar Patrika, प्रियंका शर्मा

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