सहज योग: आज का महायोग और इसका महत्त्व
सहज योग: आज का महायोग और इसका महत्त्व
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कम शब्दों में कहें तो, सहज योग ने आज पर्वतीय समाज में परिवर्तन लाने का कार्य किया है। हरिद्वार से आए सहज योगी भाई-बहनों की टीम ने 27 से 30 नवंबर तक चम्बा नई टिहरी क्षेत्र के कई विद्यालयों और संस्थानों में जाकर सहज योग के माध्यम से आत्मसाक्षात्कार का अनुभव प्रदान किया।
यह विशेष कार्यक्रम नई टिहरी के बौराडी स्टेडियम स्थित ध्यान केंद्र में आयोजित हवन के साथ समाप्त हुआ। यहां पर्वतीय समाज में व्याप्त रूढ़िवादिता, कर्मकांड और नशे जैसे नकारात्मक प्रभावों के निराकरण का संकल्प लिया गया। कोविड-19 के बाद से बौराडी ध्यान केंद्र सुचारू रूप से नहीं चल पाया था, लेकिन अब यह प्रत्येक रविवार को सुबह 11 बजे ध्यान सत्र आयोजित करेगा। आज इस सत्र में बड़ी संख्या में नए साधकों ने कुंडलिनी शक्ति जागरण कर आत्मसाक्षात्कार प्राप्त किया। सोमवार को सुबह 11 बजे फिर से सेंटर पर फॉलोअप किया जाएगा।
सहज योगी भाई-बहनों की टीम ने संस्कृत महाविद्यालय नई टिहरी, सरस्वती बालिका विद्यामंदिर ढुंगीधार तथा चंबा पुलिस लाइन में सहज योग सत्रों का आयोजन किया। इस दौरान साधकों को सहज योग के अद्भुत लाभों के बारे में बताया गया। इनमें से अनेक नए साधकों ने कुंडलिनी जागरण के जरिए आत्मसाक्षात्कार का अनुभव किया।
सहज योग की इस प्रक्रिया को श्री माताजी निर्मला देवी जी द्वारा 'आज का महायोग' कहा गया है। इसका उद्देश्य मानसिक शांति, विचारों की शुद्धि और जीवन में संतुलन प्रदान करना है। आयोजकों ने इसे तनाव, अवसाद, नशे और नकारात्मक सोच के समाधान के तौर पर प्रस्तुत किया, जो सामाजिक और आध्यात्मिक उन्नति की ओर एक नई किरण साबित हो रहा है।
कुंडलिनी जागरण का वैज्ञानिक और आध्यात्मिक महत्व
कुंडलिनी एक शक्तिशाली जीवंत ऊर्जा है, जो हमारे शरीर में प्रमुख नाड़ियों—इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना—के माध्यम से संचालित होती है। ये ऊर्जा मूलाधार चक्र में स्थित होती है और योगाभ्यास के दौरान जागृत होती है। विज्ञान के अनुसार, कुंडलिनी जागरण से शरीर के हार्मोन, तंत्रिका तंत्र और मस्तिष्क की कोशिकाओं में सक्रियता बढ़ती है। इससे मानसिक स्पष्टता और कायाकल्प की अनुभूति होती है।
इस प्रक्रिया में प्राणायाम, ध्यान और मंत्र जाप का उपयोग होता है, जिससे नाड़ियों में ऊर्जा प्रवाह सुदृढ़ होती है और इससे मानसिक तथा शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। कुंडलिनी जागरण के दौरान यौगिक क्रियाएं स्वाभाविक रूप से घटित होती हैं, जो भौतिक विज्ञान के लिए एक अनसुलझी चुनौती है।
आध्यात्मिक दृष्टिकोण से, कुंडलिनी को ब्रह्मांड की मूल शक्ति माना जाता है। इसका जागरण व्यक्ति को अपने भीतर की दिव्यता, प्रेम, करुणा और आध्यात्मिक जागरूकता से जोड़ता है। जब कुंडलिनी सहस्रार चक्र तक पहुंचती है, तब व्यक्ति अपने भीतर ठंडी ठंडी चैतन्य लहरियों का अनुभव करता है, जो आत्मसाक्षात्कार का संकेत है।
सहज योग को 'आज का महायोग' कहा जाता है और यह एक आध्यात्मिक अनुभव के रूप में जीवन को समृद्ध बनाता है। कुंडलिनी जागरण न केवल आध्यात्मिक बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी मानव जीवन के विकास का मार्ग प्रशस्त करता है।
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सिर्फ आज के लिए नहीं, बल्कि भविष्य के लिए भी यह योग मार्ग एक उज्जवल संभावना प्रस्तुत करता है।
Team Amrita Bazaar Patrika
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