अंकिता हत्याकांड: सीबीआई की जांच से उठेंगे कई राज़

Jan 10, 2026 - 14:44
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अंकिता हत्याकांड: सीबीआई की जांच से उठेंगे कई राज़
अंकिता हत्याकांड: सीबीआई की जांच से उठेंगे कई राज़

अंकिता हत्याकांड: सीबीआई की जांच से उठेंगे कई राज़

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कम शब्दों में कहें तो इस हफ्ते सीबीआई ने अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच का निर्णय लिया है, जिसके बाद मामले में साक्ष्य मिटाने के आरोप और वीआईपी संबंधों का रहस्योद्घाटन होने की संभावना है।

देहरादून। अंकिता भंडारी की हत्या का मामला उत्तराखंड में काफी विवादित हो चुका है। ताजा घटनाक्रम में, सीबीआई जांच की स्वीकृति मिलने के बाद, अब सभी की नजरें देश के प्रमुख जांच एजेंसी पर टिकी हुई हैं। इस मामले में अनेकों अनसुलझे प्रश्न हैं, जिनका जवाब सीबीआई द्वारा दिया जा सकता है।

सीबीआई जांच की आवश्यकता

अंकिता भंडारी, जो कि एक रिसेप्शनिस्ट थीं, का 18 सितंबर 2022 को ऋषिकेश के वनन्तरा रिसॉर्ट में हत्या कर दिया गया था। उनकी लाश 24 सितंबर को चीला नहर से बरामद की गई थी। इस रोकथाम में शामिल अभियुक्तों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी, लेकिन हत्या के कारणों की मूल जड़ पर कोई विशेष जांच नहीं की गई। वीआईपी को एक्स्ट्रा सेवाएं देने का मुद्दा इस मामले से जुड़ा है, जिसके बारे में अंकिता ने अपने मित्र को व्हाट्सएप संदेश में बताया था।

आंदोलन और सरकारी प्रतिक्रिया

तस्वीरों के संग साथ, यह मामला राज्य की राजनीति में भी हलचल पैदा कर चुका है। हाल ही की घटनाओं में, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अंकिता के माता-पिता की भावनाओं का सम्मान करते हुए सीबीआई जांच की सिफारिश की है। उन्होंने कहा, "हमारा उद्देश्य निष्पक्षता और पारदर्शिता को सुनिश्चित करना है।" इसके अलावा, मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच दल का गठन किया गया है।

साक्ष्य मिटाने के आरोप

इस मामले में वीआईपी के साक्ष्य मिटाने की संभावना और खासकर रिसॉर्ट में चल रहे बुलडोजर की गतिविधियों पर सवाल उठाए जा चुके हैं। भाजपा विधायक रेणु बिष्ट और निर्दलीय विधायक उमेश कुमार पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। इसके अलावा, मामले में नार्को टेस्ट के न होने पर भी जांचें चल रही हैं। यह सब सवाल यह उठाते हैं कि सरकार इस मामले में कितनी पारदर्शिता बरत रही है।

क्या सीबीआई इस बार कराएगी न्याय?

अब, देखने वाली बात यह होगी कि क्या सीबीआई अपने प्रयासों में सफल हो पाएगी और क्या वह उन वीआईपी चेहरों को बेनकाब कर सकेगी जो रूबरू हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सीबीआई जांच में कई सफेदपोश लोगों से पर्दा उठने की संभावना है।

मुख्यमंत्री का आश्वासन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने फिर से दोहराया है कि सरकार दोबारा साबित करेगी कि वह हर मामले में निष्पक्षता बरतने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, "अंकिता केवल एक पीड़िता नहीं, बल्कि हमारी बहन और बेटी थी।" उनके वचनों से स्पष्ट है कि सरकार न्याय दिलाने के लिए पूरी गंभीरता से प्रतिबद्ध है।

अंकिता भंडारी की हत्या का मामला न केवल पुलिस विभाग के लिए चुनौती बन गया है, बल्कि यह पूरे समाज के लिए एक महत्वपूर्ण सवाल है। इससे यह भी स्पष्ट हो रहा है कि समाज में वीआईपी और सामान्य नागरिक के बीच का भेद खत्म करना जरूरी है।

अंकिता के मामले में हुई सीबीआई जांच की विस्तृत समीक्षा और राजनीतिक परिणामों से संबंधित आगे की अपडेट्स के लिए, अमृता बाजार पत्रिका पर जुड़े रहें।

टिप्पणी: इस मामले में उठ रहे कई सवालों और जटिलताओं के बीच यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सीबीआई इस बार कितनी प्रभावी होगी और क्या वह वास्तविकता में न्याय दिला सकेगी।

सादर,
टीम अमृता बाजार पत्रिका, अनुराधा शर्मा

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