अज्ञातवास से निकलकर सबूतों के साथ देहरादून पहुंची अभिनेत्री उर्मिला
अज्ञातवास से निकलकर सबूतों के साथ देहरादून पहुंची अभिनेत्री उर्मिला
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कम शब्दों में कहें तो, अभिनेत्री उर्मिला सनावर ने नौ दिन के अज्ञातवास के बाद देहरादून पहुंचकर जांच एजेंसी को सबूत सौंपने का दावा किया है।
देहरादून में एक नाटकीय वापसी में, अभिनेत्री उर्मिला सनावर ने अपने अज्ञातवास के नौ दिनों के बाद शुक्रवार को सबूतों के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उनके इस कदम ने उत्तराखंड की राजनीति में हलचल मचा दी है। वे पहली बार ऐसे सामने आईं हैं जब उत्तराखंड पुलिस उन्हें ढूंढने में नाकाम रही थी। उर्मिला का कहना है कि वे वीआईपी के खिलाफ अपने पास मौजूद सबूतों को जांच एजेंसी के साथ साझा करेंगी।
अंकिता मामले में शामिल दावे
उर्मिला ने कहा कि वे महिषासुर मर्दन के लिए 'अंकिता' की तरह ही सामने आ रही हैं। उनका यह कहना था कि जब दुर्गा महिषासुर का नाश कर सकती हैं, तो वे क्यों नहीं। उन्होंने वीडियो भी शेयर किया जिसमें वे यह कहती हैं कि "जय बदरी केदार"। इस वीडियो में उर्मिला ने अपने अज्ञातवास की तुलना पांडवों के अज्ञातवास से की और दावा किया कि वे गुरुद्वारे और मोदी जी के रैन बसेरों में रहीं।
समर्थक और राजनीतिक तनाव
उर्मिला ने अपने संबोधन में "हिंदू रक्षक" और "जय श्री राम" का नारा भी लगाया। उनके साथ सहायता करने वालों में उनके साथी दर्शन भारती शामिल थे। उर्मिला ने यह भी कहा कि वे एसआईटी की जांच का सामना करेंगी। राजनीतिक पृष्ठभूमि में, उन्होंने पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर से जुड़े एक ऑडियो चैट का स्क्रीनशॉट भी साझा किया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि मामला कितना गंभीर है।
मीडिया की नजरें उर्मिला पर
अंकिता हत्याकांड से जुड़े कई मुद्दों को उठाने वाली उर्मिला की वापसी ने सभी की नजरें खींच ली हैं। उनके अगले कदम पर सभी की निगाहें हैं। उर्मिला ने एक और वीडियो में कहा कि "मैं देहरादून आ रही हूं" जिससे यह संकेतान्वित होता है कि वह अपने खिलाफ लगे फर्जी मुकदमों का सामना करने के लिए तैयार हैं। उनके खिलाफ लगे कई मामले मुख्य राजनीतिक दलों में चर्चा का विषय बने हुए हैं।
आगे क्या होगा?
जांच एजेंसी उनके सबूतों की फोरेंसिक जांच कर रही है और उर्मिला से पूछताछ भी की जाएगी। इस प्रक्रिया में ऑडियो की सत्यता को स्पष्ट किया जाएगा। उर्मिला ने पूर्व में कई नेताओं के खिलाफ सख्त बात की है और उनकी इस वापसी ने जांच एजेंसी को भी सक्रिय कर दिया है।
राजनीतिक हलचल
गैर-जमानती वारंट के कारण उर्मिला की गिरफ्तारी की संभावना भी बनी हुई है। आज उनके जनपद में मूवमेंट को लेकर मीडिया में काफी चर्चा हो रही है। उर्मिला की इस वापसी से पूरे उत्तराखंड में राजनीतिक सरगर्मी जोरों पर है।
उर्मिला द्वारा की गई अपने अधिकारों की रक्षा के लिए इस संघर्ष को समाज में एक विशेष संदेश के रूप में देखा जा रहा है। उनके आने वाले समय में क्या कदम होंगे, यह देखना बेहद रोचक होगा।
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दस्तावेज़ किए गए घटनाक्रम के साथ, उर्मिला की यह कहानी निश्चित रूप से उत्तराखंड के राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित करेगी।
Team Amrita Bazaar Patrika
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