उत्तराखंड का समावेशी विकास: अर्थव्यवस्था, रोजगार एवं अवसंरचना की रणनीतियाँ
उत्तराखंड का समावेशी विकास: अर्थव्यवस्था, रोजगार एवं अवसंरचना की रणनीतियाँ
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कम शब्दों में कहें तो उत्तराखंड में 'विजन 2047' के तहत समावेशी विकास के लिए अर्थव्यवस्था, रोजगार और अवसंरचना के विकास पर चिंतन शिविर आयोजित किया गया।
देहरादून। उत्तराखंड के 'विजन 2047' को साकार करने के उद्देश्य से राजपुर स्थित सिविल सर्विसेज इंस्टीट्यूट में एक चिंतन शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में दो महत्वपूर्ण पैनलों द्वारा अर्थव्यवस्था, रोजगार, विकास सक्षमकर्ताओं एवं अवसंरचना विकास (Growth Enablers & Infrastructure Development) पर हार्दिक विचार-विमर्श किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य के दीर्घकालिक और संतुलित विकास के लिए ठोस रणनीतियाँ तैयार करना था।
पहला पैनल: अर्थव्यवस्था एवं रोजगार
इस पैनल की अध्यक्षता प्रमुख सचिव नियोजन, मीनाक्षी सुंदरम ने की। सह-अध्यक्ष के तौर पर विनय शंकर पांडेय (प्रमुख सचिव, उद्योग) मौजूद थे। पैनल में राज्य की आर्थिक प्रगति में कृषि, उद्योग और पर्यटन के महत्वपूर्ण योगदान पर चर्चा की गई। मीनाक्षी सुंदरम ने कहा कि तीनों क्षेत्रों में संतुलित विकास के माध्यम से ही उत्तराखंड में समग्र विकास संभव है।
मुख्य सचिव ने भूमि के उत्पादक उपयोग, व्यापार में सुधार, उच्च कौशल विकास में योगदान और जनसंख्या के लाभकारी उपयोग पर जोर दिया। पैनल में उद्योग सचिव विनय शंकर पांडेय ने क्लस्टर आधारित औद्योगिकीकरण और स्टार्टअप की संभावनाओं को उजागर किया और कहा कि उत्तराखंड की इकॉनमी का विकास इसके विशेष पारिस्थितिकी से जुड़ा है।
इसके अलावा, डॉ. मनमोहन सिंह चौहान (GBPUAT के कुलपति) ने कौशल-आधारित शिक्षा और महिला व युवा केंद्रित उद्यमिता पर जोर दिया। पर्यटन प्रतिनिधियों ने भी स्थानीय समुदायों की भागीदारी और इकोलॉजिकल टूरिज्म की आवश्यकता को बताया।
दूसरा पैनल: ग्रोथ एनेबलर्स एवं अवसंरचना विकास
दूसरे पैनल की अध्यक्षता फिर से मीनाक्षी सुंदरम ने की। आईटी सचिव नितेश झा सह-अध्यक्ष के रूप में मौजूद थे। पैनल में जलवायु-सहनशील और तकनीकी आधारित अवसंरचना पर जोर दिया गया।
विशाल पराशर (सेतु आयोग के सलाहकार) ने कहा कि उत्तराखंड का विजन 2047 जलवायु-संवेदनशील तकनीकी अवसंरचना पर आधारित होना चाहिए। इस पैनल ने एकीकृत परिवहन, स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल शासन और स्मार्ट शहरी योजनाबद्धता को विकास के प्रमुख क्षेत्रों के रूप में पहचाना।
नितेश झा ने 'From Hills to High-Tech' विजन के अंतर्गत 5C फ्रेमवर्क (Compute, Connectivity, Context, Competence, Cyber Security) की आवश्यकता को बताया। लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. पंकज कुमार पांडेय ने जलवायु-संवेदनशील सड़कों और रियल-टाइम प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग का महत्व बताया।
इन विशेषज्ञों ने हाई-टेक समाधानों जैसे कि ड्रोन-आधारित निरीक्षण और GIS तकनीकों की जरूरत भी बताई। इसके साथ ही, THDC के सीटीओ लक्ष्मी प्रसाद जोशी ने जलविद्युत एवं पम्प्ड स्टोरेज की क्षमता को उजागर किया और जिम्मेदार हाइड्रोपावर विकास की आवश्यकता पर बल दिया।
समावेशी विकास का आधार
इस चिंतन शिविर में यह स्पष्ट हुआ कि उत्तराखंड का विजन 2047 संतुलित अर्थव्यवस्था, गुणवत्तापूर्ण रोजगार, जलवायु-संवेदनशील अवसंरचना, तकनीकी शासन और पर्यावरण संरक्षण पर आधारित है। इन सभी स्तंभों के समन्वय से ही उत्तराखंड को समावेशी, resilient और क्षेत्रीय रूप से संतुलित विकास की दिशा में आगे बढ़ाया जा सकता है।
बैठक में प्रमुख सचिव आर के सुधांशु, सेतु आयोग के सीईओ शत्रुघ्न सिंह, और नीति आयोग की वरिष्ठ सलाहकार डॉ नीलम पटेल सहित कई अन्य विशेषज्ञ मौजूद थे।
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सादर,
टीम अमरिता बाजार पत्रिका - सुवर्णा शर्मा
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