उत्तराखंड: गिरफ्तार सहायक प्रोफेसर से जुड़े गैंग की खोज में पुलिस का त्वरित एक्शन
उत्तराखंड: गिरफ्तार सहायक प्रोफेसर से जुड़े गैंग की खोज में पुलिस का त्वरित एक्शन
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड पुलिस गिरफ्तार सहायक प्रोफेसर आशीष कुमार गुप्ता से जुड़े गैंग के अन्य सदस्यों की खोज में जुटी हुई है। पेपर लीक मामले ने प्रदेश में बवाल मचा दिया है।
देहरादून। देशभर में पेपर लीक के विरोध में चल रहे आंदोलनों के बीच उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (यूटीयू) की सेमेस्टर परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक होने की घटना ने हर किसी को चौंका दिया है। इस मामले में आरोपी सहायक प्रोफेसर आशीष कुमार गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया गया है, लेकिन अन्य संदिग्धों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है।
मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि उत्तराखंड सरकार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले नकल माफियाओं के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति का पालन कर रही है। उन्होंने कहा कि चाहे भर्ती परीक्षाएं हों या विश्वविद्यालय की, नकल और प्रश्नपत्र लीक के मामलों में सख्त कार्यवाही की जाएगी।
धामी ने कहा, "प्रदेश में लागू सख्त नकलरोधी कानून के परिणामस्वरूप 100 से अधिक नकल माफियाओं को गिरफ्तार किया जा चुका है। हमारा लक्ष्य है कि प्रदेश के प्रतिभाशाली युवाओं को निष्पक्ष एवं पारदर्शी परीक्षा में बैठने का मौका मिले।"
पुलिस की कार्रवाई और संभावना
दून पुलिस ने 23 जुलाई को आशीष कुमार गुप्ता को गिरफ्तार किया। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से छात्रों के साथ महत्वपूर्ण प्रश्न साझा किए थे। परीक्षा समाप्ति के बाद, जांचों में पाया गया कि साझा किए गए प्रश्नों और परीक्षा पत्र में काफी समानता थी।
पुलिस ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर त्वरित कार्रवाई करते हुए साक्ष्य संकलित कर गुप्ता को गिरफ्तार किया। इस मामले में और भी संदिग्धों की भूमिका की जांच की जा रही है। संभवतः पेपर लीक गैंग में अन्य सदस्य भी शामिल हो सकते हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ
अविकल उत्तराखण्ड ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया है। कांग्रेस सहित अन्य राजनीतिक दलों ने यूटीयू की परीक्षा प्रणाली को कठघरे में खड़ा कर उच्चस्तरीय जांच करने की मांग की है। इसके साथ, बदरीनाथ मंदिर चढ़ावे में चोरी को भी चुनावी मुद्दा बनाने का ऐलान किया है।
कांग्रेस ने पेपर लीक और मंदिर चढ़ावे की चोरी पर आंदोलन करने की चेतावनी दी है, जिसे विभिन्न संगठनों का समर्थन भी मिल रहा है।
आगे की राह
देखना है कि उत्तराखंड सरकार और पुलिस ने इस मुद्दे पर क्या कदम उठाते हैं। परंतु, यह स्पष्ट है कि नकल माफियाओं के खिलाफ सरकार और पुलिस की सोच में बदलाव आ चुका है और कड़ी कार्रवाई की जा रही है।
इस प्रकार के मामलों के प्रति एक और नकारात्मक पहलू यह है कि इससे विद्यार्थियों के भविष्य पर असर पड़ता है और परीक्षाओं की विश्वसनीयता समाप्त होती है। ऐसे में सरकार को चाहिए कि वह न केवल सख्त कानून बनाए बल्कि उसे इमानदारी से लागू भी करे।
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टीम अम Rita Bazaar Patrika
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