उत्तराखंड में जंगली जानवरों के आतंक से परेशान जनता ने वन मंत्री से की मदद की गुहार

Dec 2, 2025 - 21:44
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उत्तराखंड में जंगली जानवरों के आतंक से परेशान जनता ने वन मंत्री से की मदद की गुहार
उत्तराखंड में जंगली जानवरों के आतंक से परेशान जनता ने वन मंत्री से की मदद की गुहार

उत्तराखंड में जंगली जानवरों के आतंक से परेशान जनता ने वन मंत्री से की मदद की गुहार

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड की जनता जंगली जानवरों के आतंक से परेशान होकर वन एवं पर्यावरण मंत्री से राहत की गुहार लगा रही है। चौंदकोट वेलफेयर सोसाइटी ने हाल ही में अपनी चिंताओं के साथ एक ज्ञापन सौंपा है।

देहरादून में चौंदकोट वेलफेयर सोसाइटी के पदाधिकारियों ने वन मंत्री सुबोध उनियाल को ज्ञापन सौंपते हुए क्षेत्र में जंगली जानवरों के बढ़ते आतंक पर तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता बताई। इस ज्ञापन में ग्रामीणों ने बताया कि उनका जीवन और आजीविका दोनों संकट में हैं।

मानव जीवन पर खतरा

जंगली जानवरों, विशेषकर बाघ, गुलदार और भालू की सक्रियता क्षेत्र में काफी बढ़ गई है। ये हिंसक जानवर अक्सर रिहायशी इलाकों में घुसने लगे हैं, जिससे बच्चों का स्कूल जाना, महिलाओं का घर से बाहर निकलना और बुजुर्गों की दैनिक गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं। हालात ऐसे हैं कि कई लोग जानवरों के हमलों में गंभीर रूप से घायल हुए हैं और कुछ की तो जान भी जा चुकी है। इसके अलावा, पालतू मवेशी लगातार इन जानवरों के शिकार बन रहे हैं, जिससे पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

खेती का प्रभावित होना

जंगली सुअर, बंदर, लंगूर और सेही जैसे जानवरों ने किसानों की फसलों को बर्बाद कर दिया है। किसान साल भर की मेहनत से फसल उगाते हैं, लेकिन कटाई से पहले ही उनकी फसलें चुराई जा रही हैं। इससे ग्रामीणों की एकमात्र आजीविका का स्रोत खतरे में पड़ गया है।

पलायन का बढ़ता खतरा

जान का खतरा और फसल का नुकसान, इन दो समस्याओं से तंग आकर लोग खेती छोड़ने को मजबूर हैं। कई परिवार गांव छोड़कर शहरों की ओर पलायन करने की योजना बना रहे हैं। ग्रामीणों ने इसे उत्तराखंड के लिए एक गंभीर संकट बताया है।

ग्रामीणों की प्रमुख मांगें

ग्रामीणों ने अपने ज्ञापन में कुछ प्रमुख मांगें रखीं हैं:

  • आबादी वाले इलाकों में वन विभाग की गश्त बढ़ाई जाए और हिंसक गुलदार-भालू की जियो-टैगिंग की जाए।
  • गुलदार और भालू पकड़ने के लिए पिंजरे लगाए जाएं।
  • जंगली सुअर, बंदर आदि की संख्या को नियंत्रित करने के लिए युद्धस्तर पर अभियान चलाया जाए।
  • खेतों की सोलर फेंसिंग के लिए अनुदान दिया जाए।
  • फसल और मवेशियों को हुए नुकसान का उचित मुआवजा तुरंत प्रदान किया जाए।

वनमंत्री का आश्वासन

ज्ञापन सौंपने पहुंचे सोसाइटी के अध्यक्ष उमेद सिंह गुसाई और महासचिव कवीन्द्र इष्टवाल ने बताया कि मंत्री सुबोध उनियाल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिया है। सदस्य प्रतिनिधि मंडल ने वन विभाग मुख्यालय जाकर और भी अधिकारियों से मिलकर अपनी चिंताओं को साझा किया। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

इस ज्ञापन में सहभागिता के लिए चौंदकोट वेलफेयर सोसाइटी के अन्य सदस्य भी शामिल थे, जिनमें प्रदीप सिंह रावत, सेवानिवृत्त अपर सचिव धनराज सिंह नेगी और सामाजिक कार्यकर्ता उमेश रावत शामिल हैं।

अधिक जानकारी के लिए कृपया यहाँ क्लिक करें।
लेखक: अनामिका शर्मा
Team Amrita Bazaar Patrika

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