उत्तराखंड में जलवायु लचीलापन और जल स्थिरता पर अंतर्राष्ट्रीय सभा का आयोजन

Oct 6, 2025 - 21:44
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उत्तराखंड में जलवायु लचीलापन और जल स्थिरता पर अंतर्राष्ट्रीय सभा का आयोजन
उत्तराखंड में जलवायु लचीलापन और जल स्थिरता पर अंतर्राष्ट्रीय सभा का आयोजन

उत्तराखंड में जलवायु लचीलापन और जल स्थिरता पर अंतर्राष्ट्रीय सभा का आयोजन

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कम शब्दों में कहें तो, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की (आईआईटी रुड़की) में आज अंतर्राष्ट्रीय जल विज्ञान संघ (आईएएचएस)की बारहवीं वैज्ञानिक सभा का उद्घाटन किया गया। इस सभा में 49 देशों के 627 प्रतिभागियों की उपस्थिति दर्ज की गई, जो इसे खास बनाती है।

आज, 10 अक्टूबर 2023 को, आईआईटी रुड़की में एक ऐतिहासिक सभा का आयोजन हुआ, जिसमें वैश्विक वैज्ञानिक, शोधकर्ता और नीति निर्माता जल-विज्ञान के माध्यम से जल संसाधनों के सतत प्रबंधन पर चर्चा करने के लिए एकत्र हुए। यह सभा जलवायु परिवर्तन, जल स्थिरता, और जल विज्ञान से संबंधित नवाचारों पर चर्चा करने का एक महत्वपूर्ण मंच है।

कार्यक्रम का उद्घाटन

इस कार्यक्रम का उद्घाटन उत्तराखंड के मुख्य सचिव, आनंद बर्द्धन ने किया। उन्होंने जल विज्ञान अनुसंधान और इसके सामाजिक अनुप्रयोगों में आईआईटी रुड़की और आईएएचएस के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा, “जल विज्ञान जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन, आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं सतत विकास के लिए महत्वपूर्ण है। आईआईटी रुड़की जैसे संस्थान वैश्विक ज्ञान को स्थानीय समाधानों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जो समुदायों और नीति निर्माताओं दोनों को सशक्त बनाते हैं।”

सभा के विशेष अतिथि

कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन एवं आईआईटी रुड़की के कुलगीत के साथ हुई। इसके बाद प्रमुख गणमान्य व्यक्तियों ने अपने विचार साझा किए। इनमें शामिल थे:

  • प्रो. के.के. पंत, निदेशक, आईआईटी रुड़की
  • प्रो. साल्वातोरे ग्रिमाल्डी, अध्यक्ष, आईएएचएस
  • डॉ. वी.एम. तिवारी, उपाध्यक्ष, आईएनएसए एवं निदेशक, सीएसआईआर-एनईआईएसटी
  • प्रो. सुमित सेन, अध्यक्ष, आईएएचएस एसए 2025
  • प्रो. अंकित अग्रवाल, संयोजक

वैश्विक सहयोग का महत्त्व

यह सभा जल स्थिरता एवं जलवायु अनुकूलन को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता पैदा करने का एक मंच है। इस कार्यक्रम में शामिल 682 वैज्ञानिक योगदान और सोमवार से शुरू होने वाले तकनीकी सत्र, प्रदर्शनी एवं विचार मंथन के जरिए वैश्विक जल समस्याओं के समाधान की दिशा में सकारात्मक कदम उठाने का प्रयास किया जा रहा है।

भारत की भूमिका

आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. के.के. पंत ने सभा के महत्व को बताते हुए कहा, “यह सभा नए विचारों, दीर्घकालिक साझेदारियों और परिवर्तनकारी नवाचारों के लिए प्रेरित करेगी। हम जल विज्ञान एवं समाज दोनों के लिए सार्थक योगदान देना चाहते हैं।” इस प्रकार, यह सभा जल संसाधनों के प्रबंधन में भारत की अग्रणी भूमिका को भी सुदृढ़ करती है।

सभा के अंत में, आईएएचएस वैज्ञानिक सभा 2025 की कार्यवाही का विमोचन भी किया गया, जो आने वाले दिनों में वैज्ञानिक विचार-विमर्श और सहभागिता का प्रतीक है।

जलवायु परिवर्तन और जल स्थिरता पर इस अंतर्राष्ट्रीय सभा से न केवल जल विज्ञान अनुसंधान का क्षेत्र समृद्ध होगा, बल्कि यह हमारे देश की जल नीति और प्रबंधन के दृष्टिकोण को भी निखारने में मदद करेगा।

स्रोत: [अधिक जानकारी के लिए हमारे पोर्टल पर जाएं](https://amritabazaarpatrika.com)

समापन में, आईआईटी रुड़की और आईएएचएस दोनों का सांझा प्रयास ऐसी सभाओं के माध्यम से जल संसाधनों के स्थायी प्रबंधन के लिए भविष्य की दिशा तय कर सकता है।

Team Amrita Bazaar Patrika - नामिता जैन

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