उत्तराखंड में पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी के निधन पर 3 दिन का राजकीय शोक, सरकारी छुट्टी घोषित
उत्तराखंड में पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी का निधन
कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूड़ी जी का निधन हो गया है, जिसके बाद राज्य सरकार ने 19 से 21 मई तक तीन दिवसीय राजकीय शोक की घोषणा की है। इस दुःखद समाचार ने पूरे राज्य में शोक की लहर पैदा कर दी है। Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - Amrita Bazaar Patrika
राजकीय शोक की घोषणा
देहरादून: पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी जी के निधन के बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शासन द्वारा आधिकारिक आदेश जारी कर 19 मई से 21 मई तक तीन दिनों के राजकीय शोक की घोषणा की है। इस अवसर पर, उन्होंने खंडूड़ी जी की सेवाओं को याद करते हुए राज्य के लिए उनकी अपूरणीय क्षति का उल्लेख किया।
सरकारी अवकाश
राजकीय शोक के तहत, 20 मई (बुधवार) को राज्य में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है। पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी जी का अंतिम संस्कार पुलिस सम्मान के साथ किया जाएगा। इस दिन सभी सरकारी कार्यालय और संस्थान बंद रहेंगे।
राजकीय शोक के नियम
राजकीय शोक के दौरान निम्नलिखित नियम लागू होंगे:
- राष्ट्रध्वज का झुकना: तीन दिनों के राजकीय शोक के दौरान, उत्तराखंड के सभी सरकारी कार्यालयों और भवनों पर राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा) आधा झुका रहेगा।
- मनोरंजन कार्यक्रमों पर रोक: इस अवधि के दौरान, सरकार की ओर से किसी भी प्रकार के सांस्कृतिक या सरकारी मनोरंजन कार्यक्रमों का आयोजन नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री का बयान
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूर्व मुख्यमंत्री के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा है, “भुवन चंद्र खंडूड़ी जी का स्वाभाविक नेतृत्व और राज्य के प्रति उनकी सेवाएं हमारे लिए सदैव याद रहेंगी। उनके योगदान का कोई मोल नहीं हो सकता।”
नाथुल के शोक संदेश
भुवन चंद्र खंडूड़ी जी की छवि एक ऐसे नेता के रूप में है, जिन्होंने राष्ट्र सेवा के साथ-साथ उत्तराखंड के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके आकस्मिक निधन ने केवल परिवार व करीबी लोगों को नहीं, बल्कि समस्त उत्तराखंड को शोक में डाल दिया है।
भुवन चंद्र खंडूड़ी जी के जीवन के कई चेहरे थे—एक सैनिक, एक नेता, और एक कुशल प्रशासक। उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।
राज्य सरकार ने उनके योगदान को देखते हुए सभी नागरिकों से अपील की है कि इस अवधि में संयम बरतें और स्वामी विवेकानंद के सिद्धांतों के अनुसार आगे बढ़ें।
उत्तराखंड राजनीतिक इतिहास में भुवन चंद्र खंडूड़ी जी की भूमिका को भुलाया नहीं जा सकता। उनके कार्य और निर्णयों ने राज्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी अनुपस्थिति राज्य की राजनीति में एक बड़ा शून्य छोड़ेगी।
अंत में, हम सभी भुवन चंद्र खंडूड़ी जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और उनके परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हैं। इसे एक अपूरणीय क्षति मानते हुए, हम उनके योगदान को हमेशा याद रखेंगे।
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सादर,
टीम अमृता बाजार पत्रिका, साक्षी वर्मा
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