उत्तराखंड में बिजली चोरी से बढ़ी चिंता, यूपीसीएल के अधिकारियों पर कार्रवाई
उत्तराखंड में बिजली चोरी से बढ़ी चिंता, यूपीसीएल के अधिकारियों पर कार्रवाई
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कम शब्दों में कहें तो: उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) को बिजली चोरी के एक बड़े मामले से जबरदस्त झटका लगा है, जिसने पूरे प्रदेश में ऊर्जा प्रबंधन की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
देहरादून। उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) को एक बार फिर से एक बड़ा झटका लगा है। हरिद्वार जिले के गुरुकुल नारसन स्थित यूपीसीएल के बिजली घर में वासू स्टील फैक्ट्री के मीटर में छेड़छाड़ की पुष्टि हुई है, जिससे बड़ी मात्रा में बिजली चोरी की गई। इस मामले में यूपीसीएल के कुछ अधिकारियों पर कार्रवाई भी की गई है।
हालांकि यूपीसीएल के अधिकारियों ने कई बार बिजली चोरी को रोकने के लिए दावे किए हैं, लेकिन उनके प्रयास विफल रहे हैं। अब जब यह मामला सामने आया है, तो प्रबंधन के प्रति सवाल उठने लगे हैं। पुलिस और जांच समिति की कार्रवाई
पुलिस ने हाल ही में बिजली घर के बाहर कुछ संदिग्ध लोगों को पकड़ा था, जिन्होंने पूछताछ में मीटर में छेड़छाड़ करने की बात स्वीकार की। जांच में यह स्पष्ट हो गया कि मीटर को न केवल छेड़ा गया था, बल्कि बिजली चोरी के लिए उसका दुरुपयोग किया गया था। इसके चलते यूपीसीएल ने आधिकारिक कार्रवाई करते हुए अधिशासी अभियंता और जेई को निलंबित कर दिया है।
यूपीसीएल के निदेशक परिचालन, एम.आर. आर्य ने निलंबित अधिकारियों को अन्य कार्यालयों में संबद्ध करते हुए नए प्रभारी नियुक्त कर दिए हैं। इसके साथ ही, एक तीन सदस्यीय जांच समिति भी गठित की गई है, जिससे मामले की गहराई से जांच की जा सके। यूपीसीएल की साख पर सवाल
बिजली चोरी का यह मामला केवल एक फैक्ट्री तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य के अन्य क्षेत्रों में भी ऐसे मामलों का स्वागत किया जा रहा है। विशेष रूप से मंगलौर और लंढौरा जैसे शहरों में बिजली चोरी की घटनाएं बढ़ रही हैं। हाल ही में नियामक आयोग ने यूपीसीएल को इस प्रकार की घटनाओं पर नियंत्रण पाने की सलाह दी थी।
हालांकि, एक महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जब कारिंदे गिरफ्तार हो गए हैं, तो फैक्ट्री के मालिक के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई? क्या यह सिर्फ उनके कर्मचारियों का काम था, या फिर मालिक भी इस दुष्कर्म में शामिल थे? इस पर भी गहराई से जांच की आवश्यकता है। एनर्जी अकाउंटिंग ऑडिट का आदेश
यूपीसीएल के प्रबंध निदेशक अनिल कुमार यादव ने ऊर्जा खपत के संबंध में नई योजनाएं लागू करने का निर्णय लिया है। उन्होंने आदेश दिया है कि रुड़की, भगवानपुर और अन्य क्षेत्रों में उच्च बिजली खपत करने वाली सभी उद्योगों का एनर्जी अकाउंटिंग ऑडिट किया जाएगा। ऐसा करने से यह स्पष्ट होगा कि बिजली का किस स्तर पर उपयोग हो रहा है, और कहीं कोई गड़बड़ी पकड़ी गई तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। गंभीरता का आलम
इस मामले में यूपीसीएल के सांसद की नियुक्ति से जुड़े विवाद और अन्य कार्मिक खामियों पर भी चर्चा चल रही है। यूपीसीएल की खासियत यह है कि इसे लगातार घाटे का सामना करना पड़ रहा है, और अब बिजली चोरी की घटनाएं इस व्यवस्था को और भी कमजोर कर रही हैं। इससे साफ है कि ऊर्जा के क्षेत्र में सुधार की जरूरत है।
जनता का मानना है कि अगर इस प्रकार की घटनाओं पर काबू नहीं पाया गया तो उत्तराखंड का ऊर्जा प्रदेश बनने का सपना पूरा नहीं हो पाएगा। इसलिए, यह जरूरी है कि प्रशासन सख्त कदम उठाए और सभी संबंधित मामलों की गहनता से जाँच करे।
इस प्रकार, यह मामला न केवल वर्तमान में बिजली चोरी पर चिंता जताता है, बल्कि प्रदेश की ऊर्जा नीति और इसके उचित प्रबंधन की आवश्यकता को भी बताता है। अधिक अपडेट के लिए हमारी वेबसाइट पर जाएं।
© Team Amrita Bazaar Patrika - स्नेहा जोशी
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