उत्तराखंड में यूनिफाइड पेंशन स्कीम: वादे की सच्चाई और कार्यान्वयन की चुनौतियाँ

Sep 26, 2025 - 00:44
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उत्तराखंड में यूनिफाइड पेंशन स्कीम: वादे की सच्चाई और कार्यान्वयन की चुनौतियाँ
उत्तराखंड में यूनिफाइड पेंशन स्कीम: वादे की सच्चाई और कार्यान्वयन की चुनौतियाँ

उत्तराखंड में यूनिफाइड पेंशन स्कीम: वादे की सच्चाई और कार्यान्वयन की चुनौतियाँ

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड सरकार ने 1 अप्रैल 2025 से यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य कर्मचारियों को सुरक्षित भविष्य प्रदान करना है, लेकिन इसके कार्यान्वयन में अनेक चुनौतियाँ सामने आ रही हैं।

यूनिफाइड पेंशन स्कीम: एक प्रमुख कदम

उत्तराखंड सरकार ने 1 अप्रैल 2025 से यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) लागू कर एक स्वागतयोग्य फैसला लिया है। इसका मकसद राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के तहत आने वाले कर्मचारियों को पूर्व की पेंशन योजना की तरह सुनिश्चित और सुरक्षित भविष्य देना है।

यह स्कीम, जिसमें 10 साल की सेवा पर 15,000 रुपये की न्यूनतम पेंशन और 25 साल की सेवा पर मूल वेतन का 50% पेंशन जैसे आकर्षक लाभ शामिल हैं, वास्तव में कर्मचारियों के लिए एक वरदान साबित हो सकती है। लेकिन इस सुनहरे वादे का असल रंग तब फीका पड़ता है, जब हम इसके कार्यान्वयन की वास्तविकता की ओर देखते हैं। प्रचार-प्रसार की कमी और तकनीकी खामियाँ इस स्कीम को कर्मचारियों के लिए एक पहेली में बदल रही हैं।

HRMS पोर्टल: तकनीकी बाधा या बेपरवाही?

सरकार ने कर्मचारियों से इंटीग्रेटेड फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (IFMS) के HRMS पोर्टल पर आधार के माध्यम से ई-साइन कर आवेदन देने का निर्देश दिया है। लेकिन कर्मचारियों का कहना है कि यह पोर्टल उनके लिए किसी भूलभुलैया से कम नहीं है।

कर्मचारियों का कहना है कि पोर्टल पर यूपीएस चुनने का कोई ऑनलाइन विकल्प मौजूद नहीं है, और जो लिंक दिए गए हैं, वे खुलते ही नहीं। यह तकनीकी कमी तब और गंभीर हो जाती है, जब अंतिम तारीख 30 सितंबर 2025 तेजी से नजदीक आ रही है। सवाल यह उठता है कि क्या यह केवल तकनीकी लापरवाही है या सरकारी तंत्र में व्याप्त सुस्ती?

रिटायर्ड कर्मचारियों का हक भी अधर में

यूपीएस का लाभ केवल मौजूदा कर्मचारियों तक ही सीमित नहीं है; एनपीएस के तहत रिटायर हो चुके कर्मचारियों को भी इस योजना का विकल्प चुनने का अवसर दिया गया है। हालाँकि, उनकी जानकारी का अभाव और पोर्टल पर आवेदन की सुविधा का ना होना बुरी तरह निराशाजनक है। कई रिटायर्ड कर्मचारी, जो अपने जीवन के सुनहरे वर्षों में इस स्कीम का लाभ उठाना चाहते हैं, सूचना के अभाव के कारण ठगे महसूस कर रहे हैं।

यूपीएस के वादे: सपना या हकीकत?

यूनिफाइड पेंशन स्कीम अपने आप में एक प्रगतिशील कदम है। 10 साल की सेवा पर 15,000 रुपये की न्यूनतम पेंशन, जिसमें 52% महंगाई राहत (DR) शामिल है, और 25 साल की सेवा पर मूल वेतन का 50% पेंशन कर्मचारियों को आर्थिक सुरक्षा का भरोसा देता है।

लेकिन दूसरी ओर, एनपीएस में निवेश शेयर मार्केट, सरकारी बॉंड और कॉर्पोरेट डेब्ट पर निर्भर करता है, जिसमें जोखिम की संभावना बनी रहती है। यूपीएस का निश्चित और गारंटीड लाभ कर्मचारियों के लिए एक बड़ा आकर्षण है। हालांकि, जब तक इस योजना की जानकारी और आवेदन की प्रक्रिया कर्मचारियों तक नहीं पहुंचेगी, यह वादा केवल कागजों तक ही सीमित रहेगा।

कर्मचारियों की पुकार: सुनो और समाधान दो

कर्मचारी संगठन बार-बार मांग कर रहे हैं कि सरकार यूपीएस के संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करे, HRMS पोर्टल की तकनीकी समस्याओं का समाधान करे और कर्मचारियों एवं रिटायर्ड कर्मचारियों को जागरूक करने के लिए सूचना शिविर आयोजित करे। यह मांग न केवल उचित है, बल्कि समय की आवश्यकता भी है।

सरकार को यह समझना चाहिए कि किसी भी योजना की सफलता उसके कार्यान्वयन की पारदर्शिता और पहुँच पर निर्भर करती है। जब कर्मचारी यह कह रहे हैं कि “हमें कार्यालय में भी कोई जानकारी नहीं मिल रही,” तो यह सरकारी तंत्र की नाकामी को उजागर करता है।

आगे की राह

एक कर्मचारी ने नाम छुपाने की शर्त पर बताया कि 30 सितंबर की समय सीमा नजदीक है, इसलिए इससे पहले HRMS पोर्टल को दुरुस्त करना, कर्मचारियों को जागरूक करने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार करना और विशेष व्यवस्थाएं करना आवश्यक है। सरकार को चाहिए कि वह जल्द ही कार्यशालाएं आयोजित करे, ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से जानकारी उपलब्ध कराए और तकनीकी समस्याओं का समाधान करे।


यूनिफाइड पेंशन स्कीम कर्मचारियों और रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए एक सुनहरा अवसर प्रदान करती है, जो आर्थिक सुरक्षा और सम्मानजनक रिटायरमेंट का वादा करती है। लेकिन यह अवसर तभी सार्थक होगा जब सरकार इसे लागू करने में उतनी ही तत्परता दिखाए जितनी इसकी घोषणा में की थी। कर्मचारियों की आवाज़ को अनसुना करना न केवल अन्याय होगा बल्कि सरकार की विश्वसनीयता पर भी प्रश्न चिह्न लगाएगा। समय है कि उत्तराखंड सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाए और यूपीएस को सपना नहीं, बल्कि हकीकत बनाए। आखिर, कर्मचारी राज्य के विकास का आधार हैं, और उनके हक का सम्मान करना सरकार की जिम्मेदारी है।

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Team Amrita Bazaar Patrika, Kavita Sharma

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