उत्तराखंड में हॉर्टिटूरिज्म को विकसित करने की योजना, कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा ड्रैगन फ्रूट और कीवी की खेती पर जोर
उत्तराखंड में हॉर्टिटूरिज्म को विकसित करने की योजना
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने प्रदेश में हॉर्टिटूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनमें ड्रैगन फ्रूट और कीवी की खेती को विशेष महत्व दिया गया है।
कृषि मंत्री गणेश जोशी ने हाल ही में उद्यान विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक में कहा कि राज्य में हॉर्टिटूरिज्म की अपार संभावनाएँ हैं। उन्होंने अधिकारियों से अनुरोध किया कि इस क्षेत्र में एक ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए जिससे किसानों को लाभ प्राप्त हो सके। जोशी ने बताया कि इन फलों की खेती न केवल कृषि विविधता को बढ़ाएगी, बल्कि किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि कर सकती है।
ड्रैगन फ्रूट और कीवी की खेती का महत्व
ड्रैगन फ्रूट और कीवी जैसे उभरते फलों की खेती के विस्तार पर जोर देते हुए मंत्री ने कहा कि यह कदम किसानों के लिए एक नई आय का स्रोत बन सकेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसानों को इस दिशा में प्रशिक्षित किया जाना आवश्यक है ताकि वे आधुनिक कृषि तकनीकों का लाभ उठा सकें।
कृषि बीमा योजना में संरचनात्मक बदलाव
बैठक के दौरान, कृषि मंत्री ने सरकार के कृषि बीमा योजना में कुछ महत्वपूर्ण बदलावों की भी घोषणा की। उन्होंने बताया कि अब जंगली जानवरों से होने वाले नुकसान और अतिवृष्टि के कारण फसलों की क्षति के लिए भी योजनाओं में कवरेज जोड़ा गया है। इस निर्णय का उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले वित्तीय नुकसान से सुरक्षित करना है।
जोशी ने अधिकारियों से कहा कि इस योजना के तहत किसानों को बेहतर जानकारी देने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि अधिक से अधिक किसान इस योजना का लाभ उठा सकें। उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को इस योजना के लिए आभार भी प्रकट किया।
न्यूनतम समर्थन मूल्य : एक नई पहल
गणेश जोशी ने बताया कि राज्य सरकार ने वर्ष 2025-26 के लिए "सी" ग्रेड माल्टा और पहाड़ी नींबू (गलगल) के उत्पादकों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य को निर्धारित किया है। ज्ञातव्य है कि "सी" ग्रेड माल्टा का न्यूनतम समर्थन मूल्य ₹10.00 प्रति किलोग्राम और पहाड़ी नींबू (गलगल) का ₹7.00 प्रति किलोग्राम तय किया गया है।
मंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि इस मूल्य निर्धारण की व्यवस्था का लाभ अधिकतम किसानों तक पहुँचाया जाए, जिससे कृषि में उत्पादकों को कोई परेशानियाँ ना हों। उन्होंने खरीद प्रक्रिया को त्वरित और पारदर्शी बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया।
उद्यान विभाग की निगरानी और कार्यान्वयन
जोशी ने अधिकारियों से कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं की नियमित निगरानी होनी चाहिए और सभी योजनाओं को समयानुसार लागू किया जाना चाहिए। बैठक में बागवानी मिशन निदेशक महेंद्र पाल और औद्यानिकी विपणन बोर्ड के सीईओ नरेंद्र यादव ने भी भाग लिया।
इन सभी कदमों के जरिए उत्तराखंड सरकार न केवल हॉर्टिटूरिज्म को बढ़ावा देने का प्रयास कर रही है बल्कि राज्य के किसानों के जीवन स्तर को सुधारने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल कर रही है। कृषि मंत्री की इस प्रकार की योजनाओं से राज्य के कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद की जा रही है।
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सादर, टीम अमृता बाजार पत्रिका
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