उत्तराखंड: सीएम धामी ने आपदा प्रभावितों के साथ मनाई दीवाली, दिया नया संदेश
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कम शब्दों में कहें तो: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दीवाली के दिन सहस्त्रधारा में आपदा प्रभावितों के साथ चढ़ाए दीप जलाए और उनकी समस्याएं सुनी।
सीएम धामी ने आपदा प्रभावितों के बीच मनाई दीपावली
दिवाली का पर्व केवल रोशनी और खुशियों का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह साथ और सहानुभूति का भी समय है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने इस बार की दीपावली का जश्न आपदा प्रभावितों के बीच मनाने का निश्चय किया। सोमवार को, उन्होंने सहस्त्रधारा, देहरादून स्थित मझाड़ा गांव में जाकर उन परिवारों के साथ दीवाली मनाई, जिन्हें हाल के आपदाओं का सामना करना पड़ा है।
आपदा प्रभावितों के साथ बिताया समय
मुख्यमंत्री धामी ने काली गाड़, मझाड़ा गाँव और सहस्त्रधारा क्षेत्र के आपदा प्रभावितों से भेंट की। इस अवसर पर उन्होंने उनकी समस्याओं को ध्यान से सुना और उन्हें दीपावली की शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि इस पर्व पर हमारे लिए आवश्यक है कि हम एक-दूसरे का साथ दें और मुश्किल समय में एकजुट होकर खड़े रहें।
आपदा के बाद का पुनर्वास कार्य
इस समय, जब उत्तराखंड के कई क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं ने अभूतपूर्व बर्बादी की है, मुख्यमंत्री धामी ने राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे पुनर्वास कार्यों की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि सरकार प्रभावितों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं, भोजन, और आश्रय की व्यवस्था पर ध्यान दे रही है।
समर्थन और साहस का संदेश
सीएम का कहना था कि इस दीवाली हमें उन लोगों को नहीं भूलना चाहिए जो कठिन समय से गुजर रहे हैं। उन्होंने सभी से अपील की कि वे इस अवसर पर जरूरतमंदों की मदद करें और एकजुटता का परिचय दें। उन्होंने कहा, "यह पर्व हमें यह याद दिलाता है कि जो भी कठिनाइयां आएं, हमें मिलकर उनका सामना करना है।"
दीवाली का महत्व
दीवाली का पर्व असत्य पर सत्य की जीत और अंधकार पर प्रकाश का प्रतीक है। इस दिन दीयों की रौशनी केवल घरों में नहीं बल्कि दिलों में भी उदासी और कठिनाइयों को दूर करने का संकेत देती है।
मुख्यमंत्री धामी द्वारा आपदा प्रभावितों के बीच जाकर दीवाली मनाने का यह कदम निश्चित रूप से लोगों में साहस और उम्मीद का संचार करेगा। ऐसे में हमें भी अपनी जिम्मेदारी समझते हुए जरूरतमंदों के प्रति सहयोगी बनना चाहिए।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने वहां मौजूद बच्चों को मिठाइयां और दिए वितरित किए, जिससे चेहरे पर मुस्कान और रोशनी छा गई।
दीवाली का यह पर्व हमें सिखाता है कि खुशियों का वितरण केवल अपने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि हमें समाज के सभी वर्गों का ध्यान रखना चाहिए।
आपदा प्रभावितों के साथ बिताए गए इस समय ने न केवल उनकी विरासत की महत्ता को उजागर किया बल्कि यह भी दिखाया कि संकट के समय में हमारा एक-दूसरे के साथ खड़े रहना कितना महत्वपूर्ण है।
अंत में, एक नए प्रकाश को लेकर हमें आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए जो न केवल हमारी बल्कि समाज की भी भलाई के लिए हो।
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सादर,
टीम अमृत बाजार पत्रिका
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