किसानों की समस्याओं के अनुसार प्रशिक्षण और प्रदर्शन कार्यक्रम का निर्धारण आवश्यक: कुलपति

Jul 29, 2026 - 21:44
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किसानों की समस्याओं के अनुसार प्रशिक्षण और प्रदर्शन कार्यक्रम का निर्धारण आवश्यक: कुलपति
किसानों की समस्याओं के अनुसार प्रशिक्षण और प्रदर्शन कार्यक्रम का निर्धारण आवश्यक: कुलपति

किसानों की समस्याओं के अनुसार प्रशिक्षण और प्रदर्शन कार्यक्रम का निर्धारण आवश्यक: कुलपति

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के कुलपति प्रो. भगवती प्रसाद भट्ट ने किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रशिक्षण और प्रदर्शन कार्यक्रमों को उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

टिहरी गढ़वाल, 29 जुलाई। वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली उत्तराखंड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, भरसार के कुलपति प्रो. भगवती प्रसाद भट्ट की अध्यक्षता में कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) रानीचौरी में बुधवार को वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में कृषि, उद्यान, पशुपालन और वानिकी के क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों, वैज्ञानिकों, और प्रगतिशील किसानों ने मिलकर क्षेत्र की कृषि समस्याओं और उनके संभावित उपायों पर गंभीर चर्चा की।

बैठक में प्रस्तुत सुझाव और योजनाएं

बैठक में विश्वविद्यालय के सह निदेशक शोध, प्रो. अमोल वशिष्ठ ने उपस्थित अतिथि और प्रगतिशील किसानों का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि आगामी वर्ष में होने वाले अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को किसानों की स्थानीय समस्याओं और आवश्यकताओं के अनुसार समायोजित किया जाएगा।
डॉ. आलोक येवले, केवीके रानीचौरी के प्रभारी अधिकारी, ने केंद्र की वर्ष 2025-26 की प्रगति रिपोर्ट और 2026-27 की कार्ययोजना प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि समिति के सदस्यों ने कृषि और उद्यान क्षेत्र को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न सुझाव दिए।

विशेषज्ञों की सलाह

औद्यानिकी महाविद्यालय भरसार के अधिष्ठाता प्रो. ए.के. जोशी ने किसानों को अनुशंसा की कि वे रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग समूह के अनुसार बदल-बदलकर करें। उन्होंने अदरक की फसल के प्रकंद सितंबर माह में कल्ले सहित निकालने का सुझाव दिया ताकि किसानों को बेहतर मूल्य मिले।
निदेशक शैक्षणिक डॉ. अरविंद बिजल्वाण ने उद्यान किसानों को आधुनिक तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराने पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "वैज्ञानिकों द्वारा खेतों का नियमित भ्रमण होना चाहिए ताकि तकनीकी मार्गदर्शन समय पर उपलब्ध हो सके।"

नई तकनीकों का प्रचार-प्रसार

आईसीएआर-अटारी, लुधियाना की प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. प्रीति ममगाईं ने सुझाव दिया कि अग्रिम पंक्ति प्रदर्शनों के तहत सब्जी फसलों का क्षेत्रफल बढ़ाना चाहिए। उन्होंने खाद्यान्न फसलों में नई तकनीकों के प्रचार-प्रसार में कृषि विभाग के साथ समन्वय स्थापित करने के महत्व को बताया।
मुख्य कृषि अधिकारी विजय देवड़ाड़ी ने केंद्र में नई तकनीकों पर आधारित मॉडल प्रस्तुत करने का सुझाव दिया और विभाग की ओर से सहयोग का आश्वासन दिया। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. डी.के. शर्मा ने ऑनलाइन बैठक में अपनी बात रखते हुए गोट वैली एवं चारा फसलों के लिए तकनीकी सहायता की आवश्यकता बताई।

किसानों की समस्याओं का समाधान

बैठक में प्रगतिशील किसानों जैसे देवेंद्र सिंह चौहान, सीता चौहान, रीता नेगी, शिवशरण डोभाल एवं उदय सिंह तड़ियाल ने अपने अनुभव साझा करते हुए विभिन्न समस्याएं समिति के समक्ष रखी और वैज्ञानिकों से उनके समाधान के लिए तकनीकी मार्गदर्शन की मांग की।
कुलपति प्रो. भगवती प्रसाद भट्ट ने सभी उपस्थित सदस्यों के प्रयासों की सराहना की और कहा कि वैज्ञानिक तकनीक को किसानों तक पहुँचाने और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए जाएंगे।

इस कार्यक्रम में डॉ. कीर्ति कुमारी, डॉ. सचिन कुमार, डॉ. सुमित चौधरी, डॉ. अरुणिमा पालीवाल, डॉ. पंकज कुमार, डॉ. राजेंद्र सिंह बाली जैसे कई प्रमुख वैज्ञानिक और सहायक प्राध्यापक शामिल थे।

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समाप्त।
टीम अमृति बाजार पत्रिका

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