खटीमा: बाघ के हमले में बुजुर्ग की मौत, ग्रामीणों में दहशत
खटीमा: बाघ ने फिर बनाया ग्रामीण को निवाला
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कम शब्दों में कहें तो, खटीमा के सुरई वन रेंज में बाघ के हमले से 69 वर्षीय बुजुर्ग शेर सिंह कन्याल की मौत ने स्थानीय समुदाय में दहशत फैला दी है। यह घटना तब हुई जब शेर सिंह मवेशियों को चराने के लिए जंगल गए थे।
विवरण
खटीमा के तराई पूर्वी वन प्रभाग के सुरई वन रेंज के बग्गा चौवन क्षेत्र में यह दुखद घटना हुई। शेर सिंह कन्याल अपनी दिनचर्या के अनुसार रविवार को सुबह मवेशियों को चराने जंगल गए थे। लेकिन जब वह देर शाम तक घर नहीं लौटे, तो परिवार के सदस्यों ने उनकी तलाश शुरू की।
पुलिस और वन विभाग की कार्रवाई
ग्रामीणों द्वारा सूचना मिलने पर पुलिस और वन विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। उन्होंने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। स्थानीय वन अधिकारी ने बताया कि बाघ के हमले की ये पहली घटना नहीं है, इससे पहले भी इस क्षेत्र में बाघों के हमले की घटनाएं होती रही हैं।
ग्रामीणों में दहशत का माहौल
बुजुर्ग की मौत ने पूरे गांव में दहशत फैला दी है। स्थानीय निवासी भयभीत हैं और दूसरों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि सुरक्षा के उपाय किए जाएं और बाघों के हमलों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
विशेषज्ञों की राय
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि बाघों के इस तरह के हमले आमतौर पर तब होते हैं जब बाघ शिकार के लिए भोजन की तलाश में होते हैं। ऐसे में, स्थानीय निवासियों को चाहिए कि वे जंगल में जाने से पहले उचित सावधानी बरतें और वन विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन करें।
क्या करना चाहिए?
सरकारी अधिकारियों को चाहिए कि वह वनों में रहने वाले पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करें और लोगों को जागरूक करें ताकि भविष्य में इस तरह के हादसे न हों। इसके अलावा, ग्रामीणों को भी अपनी सुरक्षा के प्रति सजग रहना होगा।
इस घटना ने वन संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष का एक बार फिर से महत्वपूर्ण विषय बना दिया है। इसे लेकर नीति निर्धारण में बदलाव की आवश्यकता महसूस होती है।
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सहमति से, सुमन कुमारी
टीम अमृता बाजार पत्रिका
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