गणेश-हरक-प्रीतम की त्रिवेणी : राजनीति में उभरी नई हलचल
गणेश-हरक-प्रीतम की त्रिवेणी : राजनीति में उभरी नई हलचल
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कम शब्दों में कहें तो कांग्रेस ने 2027 के चुनावों के लिए रणनीति तैयार की है, जिसमें गणेश गोदियाल, प्रीतम सिंह और हरक सिंह रावत की टीम भाजपा के सामने चुनौती पेश करेगी।
देहरादून। हाल के दिनों में उत्तराखंड की राजनीतिक पटल पर काफी हलचल फैली है। कांग्रेस ने अपने अनुभवी नेताओं की टीम तैयार कर भाजपा को कड़ी चुनौती देने का मन बनाया है। खासतौर पर, पिछले तीन सालों से चल रही धामी सरकार की अदूरदर्शी नीतियों के खिलाफ कांग्रेस ने अपने फ़ाइटर उतार दिए हैं। 11 नवंबर को हुई बैठक में, कांग्रेस आलाकमान ने गणेश गोदियाल, प्रीतम सिंह रावत, और हरक सिंह रावत को चुनावी बागडोर सौंपने का फैसला किया। इस नई तिकड़ी ने भाजपा के रणनीतिकारों को नई चुनौतियों का सामना करने पर मजबूर कर दिया है।
कांग्रेस के आलाकमान द्वारा हाल में लिए गए इस फैसले ने तमाम राजनीतिक समीक्षकों का ध्यान आकर्षित किया है। गणेश गोदियाल को फिर से संगठन की कमान सौंपने के साथ ही, करण माहरा को हटाकर नया नेतृत्व स्थापित किया गया है। गोदियाल के साथ उनकी टीम के अन्य सदस्य, प्रीतम सिंह और हरक सिंह, जिनकी राजनीतिक उपलब्धियाँ और सक्रियता को भांपकर इस निर्णय को लिया गया है, वह अपने करिश्माई व्यक्तित्व और चुनावी रणनीतियों के लिए जाने जाते हैं।
हरक सिंह रावत ने हाल के समय में राजनीति में चुनावी जिम्मेदारी से कुछ समय दूर रहने के बाद, अब चुनाव प्रबंधन कमेटी का नेतृत्व किया है। वैसे तो हरक सीबीआई और ईडी के मामलों में उलझे हुए हैं, लेकिन उनके राजनीतिक दृष्टिकोण को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनकी आक्रामक शैली और भाजपा पर हमले करने की क्षमता उन्हें एक सुयोग्य नेता बनाती है जो पार्टी की ओर से नई चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार होगा।
कांग्रेस ने चकराता के विधायक प्रीतम सिंह को भी बड़ी जिम्मेदारी दी है। प्रीतम ने हाल ही में देहरादून की जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट जीतकर भाजपा से बड़ी हार प्राप्त की थी। उनकी आक्रामकता और सफलता ने कांग्रेस को प्रेरित किया है कि वे 2027 के आम चुनाव में मजबूत स्थिति में आ सकें।
कांग्रेस के भीतर इस नई रणनीति का लक्ष्य भाजपा को घेरने और अगले चुनावों में उन्हें कठोर चुनौती देने का है। गढ़वाल से निकले इस त्रिवेणी मॉडल के जरिए कांग्रेस ने अपनी शक्ति को एकजुट करने का प्रयास किया है। पार्टी के अन्य सदस्य, विशेषकर नेता विपक्ष यशपाल आर्य और उपनेता भुवन कापड़ी, भी विधानसभा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
पूर्व सीएम हरीश रावत की भूमिका भी इस नई रणनीति में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पार्टी के भीतर संतुलन बनाने का प्रयास करते हुए, रावत ने अपने पसंदीदा नेताओं को चुनावी जिम्मेदारियाँ दी हैं, जिससे उनकी शक्ति को और भी मजबूती मिली है।
कांग्रेस की नई टीम के गठन के बाद से पार्टी की स्थिति में सुधार आता नजर आ रहा है। जबकि भाजपा की कैबिनेट में आंतरिक मतभेद और टकराव की चर्चा है, कांग्रेस के इन नए फाइटर्स के सामने पैठ बनाना अब भाजपा के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।
2027 के चुनावी मैदान में कांग्रेस का सामना एक नई स्थिति के रूप में दर्ज किया जाएगा। इन तीन नेताओं की तिकड़ी भाजपा के विरुद्ध मुकाबला करती नजर आएगी, जिससे उत्तराखंड की राजनीति में एक नया अध्याय लिखने की उम्मीद है।
उत्तराखंड की राजनीति में इस नए पाठ का प्रतिशत बढ़ता है। आने वाले समय में राजनीतिक उठापटक से भरी स्थिति देखने को मिल सकती है।
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कांग्रेस की इस नई दिशा से संबंधित और जानकारी के लिए विजिट करें: अमृता बाजार पत्रिका।
संपादक द्वारा: नंदिता शर्मा
Team Amrita Bazaar Patrika
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