गुरु तेग बहादुर शहीद दिवस पर अवकाश: 25 नवम्बर को मनाएंगे
गुरु तेग बहादुर शहीद दिवस पर अवकाश: 25 नवम्बर को मनाएंगे
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखण्ड सरकार ने गुरु तेग बहादुर शहीद दिवस पर अवकाश की नई तिथि घोषित की है, जिससे अब यह 25 नवम्बर को मनाया जाएगा।
देहरादून। उत्तराखण्ड सरकार ने हाल ही में गुरु तेग बहादुर शहीद दिवस पर सार्वजनिक अवकाश की तिथि में संशोधन करने का निर्णय लिया है। इस संशोधन के अनुसार, 24 नवम्बर 2025 को निर्धारित अवकाश को अब 25 नवम्बर 2025 (मंगलवार) के रूप में घोषित किया गया है। यह निर्णय सरकारी कार्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
सरकार द्वारा जारी विज्ञप्ति संख्या 1958/xxxi (15) G/24-74 (सा0)/2016, दिनांक 30 दिसम्बर 2024 के अनुसार, अब प्रदेश के सभी सरकारी और गैर-सरकारी कार्यालयों के लिए यह नया अवकाश लागू होगा। शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों को इस संशोधन की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया गया है कि सचिवालय, विधानसभा तथा जिन कार्यालयों में 5-दिवसीय कार्यप्रणाली है, वे इसके अंतर्गत नहीं आते और उन्हें पूर्व की तिथि के अनुसार कार्य करना होगा।
गुरु तेग बहादुर जी की शहादत का महत्व
गुरु तेग बहादुर, जिन्होंने सिख धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी, आज भी पूरे देश में श्रद्धा और सम्मान के साथ याद किए जाते हैं। उनकी शहादत न केवल धार्मिक संघर्ष का प्रतीक है, बल्कि यह आज़ादी के लिए लड़ाई का भी एक महत्वपूर्ण भाग है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य उनकी निस्वार्थ सेवा और बलिदान को याद करना है।
राज्य में इस महत्वपूर्ण दिन को मनाने के लिए कई आयोजन होते हैं, जहां लोग भाग लेते हैं और गुरु तेग बहादुर के विचारों को फैलाते हैं। इस साल भी उम्मीद की जा रही है कि विभिन्न संगठनों द्वारा शहीद दिवस पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
सरकारी अवकाश का महत्व
सरकारी अवकाश की घोषणा से ना केवल कर्मचारियों को छुट्टी मिलती है, बल्कि यह समाज को भी एकजुट होने का अवसर प्रदान करता है। यह दिन हमें सिखाता है कि हम अपने देश के प्रति अपने कर्तव्यों को समझें और उन्हें निभाएं।
निष्कर्ष
गुरु तेग बहादुर शहीद दिवस का अवकाश 25 नवम्बर को मनाने के निर्णय से न केवल कर्मचारियों को एक दिन का अवकाश मिलेगा, बल्कि यह दिन हमें उन मूल्यों की याद दिलाएगा, जिनके लिए हमारे पूर्वजों ने संघर्ष किया। समाज को मिलकर इस दिन को मनाना चाहिए और गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान को न भूलने का संकल्प लेना चाहिए।
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साभार, टीम अमृत बाजार पत्रिका, अंजलि शर्मा
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