जिले के जर्जर स्कूल भवन होंगे ध्वस्त, बच्चों की सुरक्षा के लिए उठाए जा रहे अहम कदम
जिले के जर्जर स्कूल भवन होंगे ध्वस्त, बच्चों की सुरक्षा के लिए उठाए जा रहे अहम कदम
कम शब्दों में कहें तो: प्रशासन ने कई वर्षों से जर्जर पड़े विद्यालय भवनों के ध्वस्तीकरण का निर्णय लिया है। बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है और जल्द ही इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
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देहरादून। उत्तराखंड के जिला प्रशासन ने वर्षों से जर्जर अवस्था में पड़े विद्यालय भवनों के खिलाफ ठोस कदम उठाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के तहत, बच्चों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए उन भवनों का ध्वस्तीकरण किया जाएगा, जो किसी भी प्रकार से जोखिम भरे साबित हो सकते हैं। जिलाधिकारी सविन बंसल ने स्पष्ट किया है कि बच्चों के जीवन से खिलवाड़ बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
100 विद्यालयों की रिपोर्ट: 79 पूर्णतः निष्प्रोज्य
जिलाधिकारी की सख्ती के परिणामस्वरूप, मात्र 10 दिनों के भीतर 100 विद्यालयों के जर्जर भवनों की रिपोर्ट प्राप्त हुई है। शिक्षा विभाग ने सभी विद्यालयों की विस्तृत सूची जिला प्रशासन को सौंपी है। रिपोर्ट के अनुसार, 79 विद्यालयों के भवन पूर्णतः निष्प्रोज्य पाए गए हैं, जिनमें 13 माध्यमिक और 66 प्राथमिक विद्यालय शामिल हैं।
इसके अवलंब, 1 करोड़ रुपये की धनराशि ध्वस्तीकरण और सुरक्षा कार्यों के लिए स्वीकृत की गई है, ताकि किसी भी प्रकार की देरी न हो सके। इनमें से 63 विद्यालयों में बच्चों के सुरक्षित पठन-पाठन की वैकल्पिक व्यवस्था पहले से सुनिश्चित कर दी गई है।
वैकल्पिक शिक्षण व्यवस्था:
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि जिन विद्यालयों में वैकल्पिक शिक्षण व्यवस्था उपलब्ध है, उन्हें प्राथमिकता देते हुए तुरंत ध्वस्तीकरण किया जाएगा। वहीं जिन विद्यालयों में ऐसी व्यवस्था नहीं है, वहां पहले बच्चों की सुरक्षित पढ़ाई की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। इसके बाद ही ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
सुरक्षा प्राथमिकता:
जिलाधिकारी सविन बंसल ने स्पष्ट किया है कि बच्चों की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी स्थिति में जोखिमपूर्ण विद्यालयों में शिक्षा का संचालन नहीं होने दिया जाएगा। प्रशासन समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से आवश्यक कार्रवाई करेगा।
इस संकल्प के साथ, प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि जर्जर भवनों के ध्वस्तीकरण और सुरक्षित स्थान पर बच्चों के लिए पढ़ाई की व्यवस्था की जाएगी। ऐसे कदम न केवल बच्चों की सुरक्षा को बढ़ावा देंगे, बल्कि शिक्षा के आवश्यक मानकों को भी बनाए रखेंगे।
शिक्षा संस्थानों की सुरक्षा अपने आप में एक महत्वपूर्ण विषय है, और इस दिशा में उठाए गए प्रशासनिक कदम निस्संदेह सराहनीय हैं। इसके लिए सभी stakeholders को सहयोग करना होगा ताकि बच्चों के भविष्य को सुरक्षित बनाया जा सके।
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स्वतंत्र लेखिका, नीतू शर्मा
टीम अमृता बाजार पत्रिका
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