टिहरी की ऐतिहासिक रामलीला महोत्सव: प्रतिभासंपन्न कलाकारों ने मनाया अद्भुत अभिनय

Oct 6, 2025 - 00:44
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टिहरी की ऐतिहासिक रामलीला महोत्सव: प्रतिभासंपन्न कलाकारों ने मनाया अद्भुत अभिनय
टिहरी की ऐतिहासिक रामलीला महोत्सव: प्रतिभासंपन्न कलाकारों ने मनाया अद्भुत अभिनय

टिहरी की ऐतिहासिक रामलीला महोत्सव: प्रतिभासंपन्न कलाकारों ने मनाया अद्भुत अभिनय

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कम शब्दों में कहें तो, टिहरी की रामलीला महोत्सव ने अपने अद्भुत प्रदर्शन से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

देहरादून। पिछले कुछ दिनों में, रेसकोर्स स्थित श्री गुरुनानक मैदान में 22 सितंबर से 3 अक्टूबर तक आयोजित “टिहरी की ऐतिहासिक रामलीला महोत्सव देहरादून – 2025” में टिहरी के कलाकारों ने अपने उत्कृष्ट अभिनय, संवाद कला और मंचीय समर्पण से एक अद्भुत आयोजन का निर्माण किया। इस समारोह में न केवल मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की कथा का जीवंत चित्रण किया गया, बल्कि टिहरी की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी दर्शकों के समक्ष पेश किया गया।

कलाकारों की बहुमुखी प्रतिभा

रामलीला के दौरान, जयेंद्र मोहन पाण्डेय (मोंटी) ने अपनी बहुमुखी प्रतिभा से सभी को प्रभावित किया। उन्होंने विभिन्न पात्रों जैसे रावण के दूत, दशरथ मंत्री, जनक मंत्री और ताड़का आदि का सहज चित्रण किया। उनके हर किरदार में उनकी आवाज़ और अभिनय की गहराई दर्शकों पर एक अमिट छाप छोड़ गई।

लक्ष्मण की भूमिका में शिवम गिरी का जादू

लक्ष्मण की भूमिका में शिवम गिरी का अभिनय इस वर्ष की रामलीला का मुख्य आकर्षण बना। उनकी ऊर्जावान अभिव्यक्ति और भावनात्मक संवाद ने दर्शकों को “जय लक्ष्मण जी” के जयकारों से गूंजने पर मजबूर कर दिया। नारद और ब्रह्मा के रूप में उनकी सहज अभिनय ने मंच को भक्तिभाव और हास्य से भर दिया।

अन्य पात्रों का योगदान

भरत के किरदार में गबर राम ने गहरी संवेदना और समर्पण से भूमिका को जीवंत किया। जितेंद्र कुमार घई ने ताड़का और मेघनाद के रूप में अपने जोशीले अभिनय से भी दर्शकों की प्रशंसा प्राप्त की। महंत गोपाल गिरी और चरण सिंह नेगी ने भाट के रूप में हास्य का तड़का लगाकर दर्शकों को हंसाया और सोचने पर मजबूर किया।

अमित बहुगुणा ने अंगद के किरदार में अपनी जोरदार संवाद अदायगी से दर्शकों का दिल जीत लिया। तपेन्द्र चौहान का हनुमान रूप तो जैसे जीवंत प्रतीक बन गया — जब वे मंच पर प्रकट हुए, पूरा मैदान “जय बजरंगबली” के नारों से गूंज उठा।

उपसंहार

इस वर्ष का रामलीला महोत्सव केवल एक कला का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि टिहरी की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक भी था। यह महोत्सव न केवल टिहरी के कलाकारों की प्रतिभा को उजागर करता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा भी बनता है।

इस महोत्सव की हर क्षण में एक खास संदेश छिपा था, और वह संदेश था—संस्कृति की धरोहर को संजोकर रखना और उसे नए रूप में प्रस्तुत करना। इसके जरिए उन्होंने दर्शकों के दिलों में एक नई उमंग और उत्साह का संचार किया।

इस अद्भुत महोत्सव को पुनः जीने के लिए दर्शकों में एक उत्साह दिखाई दे रहा है और उन्हें अगली बार फिर से इस प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम का इंतजार रहेगा।

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Team Amrita Bazaar Patrika

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