टिहरी गढ़वाल में धूमधाम से मनाया गया सशस्त्र सेना झण्डा दिवस

Dec 8, 2025 - 00:44
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टिहरी गढ़वाल में धूमधाम से मनाया गया सशस्त्र सेना झण्डा दिवस
टिहरी गढ़वाल में धूमधाम से मनाया गया सशस्त्र सेना झण्डा दिवस

सशस्त्र सेना झण्डा दिवस की रौनक से गूंजा टिहरी गढ़वाल

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कम शब्दों में कहें तो, टिहरी गढ़वाल में 07 दिसंबर 2025 को सशस्त्र सेना झण्डा दिवस समारोह धूमधाम से मनाया गया। इस विशेष अवसर पर राजकीय अधिकारियों ने सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए एकत्रित धनराशि का वितरण किया।

इस साल, सहायक सैनिक कल्याण अधिकारी कप्तान बलवंत रावत ने जिलाधिकारी नितिका खण्डेलवाल, एसएसपी आयुष अग्रवाल, एडीएम अवधेश कुमार सिंह, और जिला विकास अधिकारी मो. असलम सहित अन्य अधिकारियों के साथ मिलकर सशस्त्र सेना झण्डा वितरित किया। यह अवसर शहीद हुए सैनिकों की वीरता को याद करने और उनके परिजनों की सहायता के लिए महत्वपूर्ण है।

सशस्त्र सेना झण्डा दिवस: एक ऐतिहासिक अवसर

सशस्त्र सेना झण्डा दिवस हर साल 07 दिसंबर को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य सेवारत और सेवानिवृत्त सैनिकों, उनके परिवारों तथा शहीद सैनिकों की वीरांगनाओं की सहायता करना है। इस अवसर पर पूरे देश में धनराशि एकत्रित की जाती है, जो सैनिकों के मृतक परिवारों और युद्ध में विकलांग हो गए लोगों की भलाई के लिए उपयोग की जाती है।

धनराशि का संग्रहण

इस बार भी सभी अधिकारियों ने मिलकर एकत्रित धनराशि को सहायक सैनिक कल्याण अधिकारी को सौंपा। इस धनराशि का उपयोग सैनिकों के आश्रितों के जीवन स्तर में सुधार लाने के उद्देश्य से किया जाएगा। यह पहल न केवल सैनिकों के प्रति सहानुभूति दर्शाती है, बल्कि समाज में उनकी सेवाओं को मान्यता देती है।

सामाजिक जिम्मेदारी का एहसास

सशस्त्र सेना झण्डा दिवस का समर्पण और इसकी महत्ता समाज में सैनिकों के प्रति सम्मान बढ़ाने में मदद करता है। हर वर्ष इस दिन राजनीतिक और सामाजिक तौर पर जागरूकता फैलाने की कोशिश की जाती है, ताकि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में भी लोग इस महान परंपरा का हिस्सा बन सकें।

इस दिन को मनाते हुए जिला प्रशासन ने समुदाय को भी आमंत्रित किया, जिससे आम नागरिक भी सैनिकों की भलाई में योगदान कर सकें। ऐसा वातावरण बनाना जरूरी है, जिसमें समाज के हर वर्ग से जोड़े जाने की भावना हो।

निष्कर्ष

सशस्त्र सेना झण्डा दिवस का समारोह केवल एक आयोजन नहीं है, बल्कि यह हमारे सैनिकों के बलिदान की कदर करने और उनके प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझने का भी एक मौका है। हमें हमेशा याद रखना चाहिए कि हमारी सुरक्षा में जिनकी जानें शामिल हैं, उन्हें आर्थिक और भावनात्मक समर्थन देना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।

इसके अलावा, इस परंपरा को बनाए रखने और इसके महत्व को समझने की ज़रूरत है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को भी इससे प्रेरणा मिले।

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सादर, टीम अमृता बाजार पत्रिका - साक्षी शर्मा

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