टिहरी में प्रसव के बाद रवीना की दुखद मौत, स्वास्थ्य व्यवस्था के खिलाफ धरना जारी

Oct 25, 2025 - 21:44
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टिहरी में प्रसव के बाद रवीना की दुखद मौत, स्वास्थ्य व्यवस्था के खिलाफ धरना जारी
टिहरी में प्रसव के बाद रवीना की दुखद मौत, स्वास्थ्य व्यवस्था के खिलाफ धरना जारी

टिहरी में प्रसव के बाद रवीना की दुखद मौत, स्वास्थ्य व्यवस्था के खिलाफ धरना जारी

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कम शब्दों में कहें तो, रवीना की मौत ने टिहरी क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को गंभीर सवालों के घेरे में ला दिया है।

अविकल उत्तराखंड, टिहरी। टिहरी जिले के पिलखी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में प्रसव के बाद श्रीनगर बेस अस्पताल में हुई 22 वर्षीय रवीना कठैत की मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। इस दुखद घटना के बाद, स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य व्यवस्था में खामियां उजागर करने के लिए पैदल धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है।

धरने का आह्वान और प्रदर्शन

घनसाली क्षेत्र में, पिलखी अस्पताल के बाहर सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न राजनीतिक-सामाजिक संगठनों ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया है। इस धरने का नेतृत्व सामाजिक कार्यकर्ता संदीप आर्य कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी अस्पतालों में चिकित्सा सुविधा की कमी, जरूरी उपकरणों की अनुपलब्धता और प्रसव सेवाओं की लचर व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।

टिहरी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. श्याम विजय भी धरना स्थल पर पहुंचे और उन्होंने सुधार का आश्वासन दिया। हालांकि, स्थानीय लोगों ने सीएमओ के उस बयान पर नाराजगी जताई जिसमें उन्होंने कहा कि यदि रवीना ने डॉक्टर को अपनी संपूर्ण चिकित्सा जानकारी दी होती, तो शायद वह आज हमारे बीच होती। प्रदर्शनकारियों का यह कहना है कि डॉक्टरों का कर्तव्य है कि वे मरीज की स्थिति को समझें और समय पर उचित उपचार दें, न कि जिम्मेदारी मरीज पर डालें।

रवीना की पारिवारिक पृष्ठभूमि

ग्राम पंचायत सेम बासर की निवासी रवीना कठैत को प्रसव पीड़ा के कारण गुरुवार सुबह 6 बजे पीएचसी पिलखी लाया गया। उन्होंने सुबह 8 बजे एक बच्चे को जन्म दिया, लेकिन शाम तक उनकी तबीयत बिगड़ गई और सांस लेने में कठिनाई होने लगी। उन्हें तुरंत श्रीनगर बेस अस्पताल रेफर किया गया, जहां शुक्रवार को उनकी दुखद मृत्यु हो गई।

रवीना के पति, कुलदीप कठैत, ने आरोप लगाया कि अस्पताल में रात के समय कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था, केवल वार्ड ब्वाय थे। उन्होंने कहा कि चिकित्सकीय लापरवाही की स्थिति साफ झलक रही है और इस मामले की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। यह भी उल्लेखनीय है कि इसी अस्पताल में 6 सितंबर को एक अन्य महिला की डिलीवरी के बाद मौत हुई थी।

चिकित्सकीय इतिहास और सीएमओ का बयान

सीएमओ डॉ. श्याम विजय ने कहा कि रवीना के केस हिस्ट्री से पता चलता है कि पहले से ही उन्हें हृदय संबंधी बीमारी थी और बाइपास हार्ट सर्जरी की गई थी। परिजनों ने इसकी जानकारी डॉक्टरों को नहीं दी। प्रसव के सामान्य होने के 24 घंटे बाद रवीना को सांस लेने में कठिनाई हुई, जिसके बाद उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट के साथ श्रीनगर रेफर किया गया।

धरने की मुख्य मांगें

धरने में शामिल लोग अपनी मुख्य मांगें भी बता रहे हैं:

  • पहाड़ी अस्पतालों में पर्याप्त डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती
  • प्रसव और आपातकालीन सेवाओं के लिए जरूरी उपकरण उपलब्ध कराना
  • चिकित्सकीय लापरवाही के मामलों में त्वरित जांच और कार्रवाई
  • अस्पतालों में 24 घंटे निगरानी सुनिश्चित करना

यह घटना न केवल रवीना के परिवार के लिए एक त्रासदी है बल्कि टिहरी की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में भी एक बड़ा सवाल उठाती है। जरूरत है कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार किया जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।

इसके अलावा, यह भी आवश्यक है कि जनता अपनी आवाज उठाती रहे और सरकार पर इन मुद्दों के समाधान के लिए दबाव डाले। स्वास्थ्य विभाग से मांग की जा रही है कि वह इस मामले की गंभीरता को समझे और तत्काल ठोस कदम उठाए।

इस समाचार में अपडेट्स के लिए, कृपया हमारी वेबसाइट Amrita Bazaar Patrika पर जाएं।

— Team Amrita Bazaar Patrika, निधि शर्मा

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