देहरादून में अधिवक्ताओं की हड़ताल, बार एसोसिएशन का समर्थन - चैंबर निर्माण की मांग
देहरादून में अधिवक्ताओं की हड़ताल, बार एसोसिएशन का समर्थन - चैंबर निर्माण की मांग
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कम शब्दों में कहें तो, देहरादून के अधिवक्ता पिछले 6 दिनों से चैंबर निर्माण की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। शनिवार को बार एसोसिएशन के समर्थन से प्रदेशभर में हड़ताल हुई।
देहरादून में स्थित पुरानी जिला अदालत की खाली जमीन पर चैंबर बनाने की मांग को लेकर अधिवक्ताओं ने पिछले छह दिनों से शांतिपूर्वक प्रदर्शन जारी रखा है। आज शनिवार को, बार एसोसिएशन ने पूरे प्रदेशभर में अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा की है, जिससे न्यायालय का कामकाज ठप रहेगा। पिछले 5 दिनों से अधिवक्ता सीमित समय के लिए हड़ताल पर जा रहे थे, लेकिन आज उनका प्रदर्शन पूर्ण रूप से स्थायी हो गया है। अधिवक्ताओं ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो उनका आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है। इस दौरान कांग्रेस के उपनेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी ने भी आंदोलन का समर्थन किया और सरकार पर मनमानी का आरोप लगाया है।
चैंबर निर्माण की आवश्यकता
बता दें कि अब से 6 नवंबर से अधिवक्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर सांकेतिक जाम का आयोजन किया, जिसमें उन्होंने क्रमिक तरीके से आंदोलन किया। सोमवार को 10:30 से 11:30 तक और मंगलवार को 10:30 से 12:30 तक जाम लगाया गया। इस क्रम में अधिवक्ताओं ने धीरे-धीरे चरणबद्ध तरीके से प्रदर्शन को जारी रखा है। आज की हड़ताल में प्रदेश के बार एसोसिएशन ने दून बार एसोसिएशन का समर्थन किया है, जिससे अधिवक्ताओं की ताकत और बढ़ गई है।
जिला न्यायालय परिसर में विवाद
अधिवक्ता जिला जज न्यायालय परिसर में रैन बसेरे का निर्माण करने के विरोध में खड़े हुए हैं। बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि परिसर में वकीलों और अन्य कर्मचारियों की संख्या काफी अधिक है, जिससे उन्हें आवंटित भूमि अपर्याप्त साबित हो रही है। देहरादून में लगभग 5,000 अधिवक्ता, 5,000 टाइपिस्ट और वेंडर कोर्ट में आते हैं जो कि इमारत के भीतर पर्याप्त स्थान नहीं है। इस समस्या का समाधान निकालने के लिए अधिवक्ताओं ने चैंबर निर्माण के लिए अतिरिक्त भूमि आवंटित करने का अनुरोध किया है, जिसमें जिला जज न्यायालय परिसर में हरिद्वार रोड की जमीन भी शामिल है।
अधिवक्ताओं की समर्थन की आवाज
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनमोहन कंडवाल ने कहा है कि अन्य राज्यों में सरकारें वकीलों के चैंबरों का निर्माण करती हैं क्योंकि न्यायपालिका और अधिवक्ता एक ही गाड़ी के दो पहिए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि दून के अधिवक्ता न केवल सरकार के लिए न्यायालय में मुकदमे लड़ते हैं, बल्कि राज्य आंदोलकारियों के खिलाफ होने वाले मामलों की पैरवी भी करते हैं। इसीलिए, सरकार को अधिवक्ताओं की समस्याओं को गंभीरता से लेना चाहिए। पिछले 6 दिनों से अधिवक्ता शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन अगर उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं होतीं तो आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है। इसकी जिम्मेदारी पूरी तरह से सरकार की होगी।
अंत में, यह महसूस किया जा सकता है कि अधिवक्ताओं का यह संघर्ष केवल अपने हक के लिए नहीं, बल्कि न्यायपालिका की स्थिरता और सही कामकाज के लिए भी है। उम्मीद है कि सरकार इस मुद्दे को जल्द से जल्द सुलझाएगी।
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Team Amrita Bazaar Patrika - साक्षी रंजन
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