देहरादून: रैपिडो के खिलाफ परिवहन विभाग की कड़ी कार्रवाई, एग्रीगेटर लाइसेंस निलंबन की सिफारिश
देहरादून: रैपिडो पर परिवहन विभाग का बड़ा एक्शन
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कम शब्दों में कहें तो, देहरादून में बाइक टैक्सी सेवा रैपिडो के खिलाफ परिवहन विभाग ने कड़ा रूख अपनाया है। इस कार्रवाई के तहत एग्रीगेटर लाइसेंस निलंबित करने की सिफारिश की गई है।
सुनवाई करते हुए संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) श्री संदीप सैनी के नेतृत्व में विभाग की टीम ने हाल ही में कंपनी के कार्यालय पर औचक निरीक्षण किया। इस जांच में विभाग ने कई अनियमितताएं पाई, जिससे इस कंपनी की सेवा के प्रति गंभीर प्रश्न उठ खड़े हुए हैं।
अनियमितताओं की भरमार
आरटीओ की जांच में सामने आया कि रैपिडो ने कैनाल रोड स्थित अपना मुख्य कार्यालय बिना पूर्व सूचना के रिंग रोड पर शिफ्ट कर दिया है। यह भी गौर करने वाली बात है कि कंपनी का यह नया कार्यालय एक पुराने रेस्टोरेंट में संचालित हो रहा था। पते में बदलाव की जानकारी न होने के कारण पिछले कुछ समय से कंपनी के साथ कोई पत्राचार संभव नहीं हो पा रहा था।
अवैध रजिस्ट्रेशन की शिकायतें
लंबे समय से उपभोक्ताओं से शिकायतें आ रही थीं कि कंपनी निजी दोपहिया वाहनों को अपनी ऐप पर रजिस्टर कर रही है। यह न केवल मोटर वाहन अधिनियम का उल्लंघन है, बल्कि यह यात्रियों की सुरक्षा को भी खतरे में डालता है। इसके अलावा, इसके चलते राज्य सरकार को भी भारी राजस्व का नुकसान हो रहा है।
उपभोक्ताओं की परेशानियाँ
कई उपभोक्ताओं ने यह भी बताया कि कंपनी बुक की गई गाड़ी की बजाय दूसरी गाड़ी भेजती है और साथ ही एडवांस पेमेंट भी ले लेती है। इसके अलावा, कंपनी ने अपने प्राइसिंग सिस्टम (Algorithm) की कोई जानकारी विभाग के साथ साझा नहीं की, जिससे पारदर्शिता का अभाव बना हुआ है।
राजस्व में चोरी और डेटा छिपाना
कंपनी ने लाइसेंस की शर्तों का भी उल्लंघन किया है, जिसमें प्रति राइड 2% राजस्व सरकार को देना था, जो अभी तक नहीं जमा किया गया। विभाग को ऐप पर कितने वाहन रजिस्टर्ड हैं, इसकी जानकारी भी नहीं दी गई है, जिससे और भी शंकाएँ उठती हैं।
कड़ा एक्शन और भविष्य की योजनाएँ
आरटीओ संदीप सैनी ने कहा कि इस कार्रवाई के दौरान कंपनी के सहायक मैनेजर और ऑपरेशन मैनेजर की उपस्थिति थी। विभाग अब राज्य परिवहन प्राधिकरण (STA) को रैपिडो का लाइसेंस निलंबित करने के लिए संस्तुति भेज रहा है।
विभाग ने रैपिडो को हिदायत दी है कि सभी निजी वाहनों को तुरंत डी-एक्टिवेट कर दिया जाए। अगर कंपनी जनता और वाहन स्वामियों को गुमराह करना बंद नहीं करती, तो उसके खिलाफ कठोर विधिक कार्रवाई की जाएगी।
यह कार्रवाई केवल रैपिडो के लिए नहीं, बल्कि अन्य कंपनियों के लिए भी एक चेतावनी है कि उन्हें नियमों का पालन करना होगा। अगर उन्होंने यह नहीं किया, तो उन्हें भी गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है।
बस इतना ही नहीं, इस मामले में आने वाले समय में और भी खुलासे हो सकते हैं, जो इस कंपनी की नीति और कार्यशैली पर प्रश्न उठाते रहेंगे।
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सादर,
टीम अमृता बाजार पत्रिका
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