नवरात्रि पर्व 2025: मां दुर्गा का हाथी पर आगमन और दस दिन की भव्य पूजा
नवरात्रि पर्व 2025: मां दुर्गा का हाथी पर आगमन और दस दिन की भव्य पूजा
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कम शब्दों में कहें तो, इस बार नवरात्रि पर्व 22 सितंबर से शुरू होकर दस दिनों तक चलेगा, जिसमें मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आएंगी और डोली पर लौटेंगी। आइए जानते हैं इस पर्व से जुड़ी खास जानकारियों के बारे में।
हरिद्वार। नृसिंह वाटिका आश्रम रायवाला हरिद्वार के परमाध्यक्ष नृसिंह पीठाधीश्वर स्वामी रसिक महाराज ने बताया कि हिंदू कैलेंडर के अनुसार आश्विन शुक्ल प्रतिपदा के दिन शारदीय नवरात्रि की आरंभ होती है। इस बार शारदीय नवरात्रि पर्व 22 सितंबर 2025 से शुरू होकर 29 सितंबर तक चलेगा। यह पर्व इस बार 10 दिनों का होगा, जो अपने आप में खास है।
नवरात्रि की विशेषताएँ
नवरात्रि का पर्व 9 दिनों का होता है, जिसमें मां दुर्गा की पूजा की जाती है। खास बात यह है कि इस बार चतुर्थी तिथि दो दिनों तक रहेगी, जिससे नवरात्रि का यह विशेष पर्व दस दिन चलेगा। 30 सितंबर को अष्टमी का पर्व होगा, जबकि 1 अक्टूबर को नवमी पूजन होगा। इसके बाद, 2 अक्टूबर को दशहरा मनाया जाएगा। शास्त्रों के अनुसार, नौ से अधिक दिनों का नवरात्र फलदायी होता है, जो पुण्य और समृद्धि का प्रतीक है।
मां दुर्गा का आगमन और विदाई
मां दुर्गा का हाथी पर आगमन, डोली पर विदाई
इस बार मां दुर्गा के आगमन की विशेषता यह है कि वह हाथी पर सवार होकर आएंगी और विदाई डोली पर होगी। हाथी पर सवार होकर मां का आगमन अगले वर्ष अच्छी बारिश का संकेत देता है, जबकि डोली पर विदाई सुख और समृद्धि का प्रतीक है।
शुभ मुहूर्त और कलश स्थापना
आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि का शुभारंभ 22 सितंबर, सोमवार को सुबह 01:23 पर होगा और इसका समापन 23 सितंबर, मंगलवार को 02:55 बजे होगा। इस दौरान कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 22 सितंबर को सुबह 6:09 से 8:06 बजे तक रहेगा। इसके लिए आपको पूजा सामग्री की व्यवस्था पहले से कर लेनी चाहिए।
कलश स्थापना की विधि
कलश स्थापना सामग्री
- मिट्टी या पीतल का कलश
- गंगाजल
- सात प्रकार के अनाज
- जटावाला नारियल
- आम और अशोक के पत्ते
- धूप, दीप, मिठाई आदि
कलश स्थापना कैसे करें? सबसे पहले स्नान के बाद व्रत और पूजा का संकल्प करें। पूजा स्थान पर एक चौकी रखें और उस पर पीला कपड़ा बिछाएं। इसके बाद, सात प्रकार के अनाज रखें और कलश स्थापित करें। कलश में गंगाजल डालें और ऊपरी हिस्से को आम और अशोक के पत्तों से सजाएं।
घटस्थापना के नियम और महत्व
घट स्थापन के नियम बहुत महत्वपूर्ण हैं। नवरात्रि पूजा में घट गंदा या टूटा नहीं होना चाहिए तथा पूजा के स्थान को शुद्ध रखना आवश्यक है।
कलश स्थापना का महत्व
नवरात्रि में कलश स्थापित कर मां दुर्गा का आह्वान किया जाता है, जिससे त्रिदेवों ब्रह्मा, विष्णु और महेश सहित अन्य देवी-देवताओं की उपस्थिति बनी रहती है।
नवरात्रि और दशहरा
नवरात्रि के दिनों की विशेष पूजा होती है, जिसमें पहले दिन शैलपुत्री की पूजा होती है और अंतिम दिन नवमी पर सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। इसके बाद दशहरा पर्व मनाया जाता है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
नवरात्रि का व्रत करने में नियमों का पालन आवश्यक होता है। व्रति को नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए और तामसिक भोजन से बचना चाहिए।
इस अद्भुत पर्व की तैयारियों के लिए सभी श्रद्धालुओं से निवेदन है कि वे अपने घरों में नवरात्रि पूजा की भव्यता को न केवल महसूस करें बल्कि अपने पारिवारिक संबंधों को भी मजबूत करें।
अंत में, हम सभी पाठकों से अनुरोध करते हैं कि वे इस नवरात्रि पर्व को हर्षोल्लास के साथ मनाएं और मां दुर्गा से प्रार्थना करें कि वे हम सभी पर अपना आशीर्वाद बरसाएं।
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टीम अमृता बाजार पत्रिका
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