परेड ग्राउंड पर आंदोलनकारियों से बातचीत करते डीएम और एसएसपी

Sep 27, 2025 - 21:44
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परेड ग्राउंड पर आंदोलनकारियों से बातचीत करते डीएम और एसएसपी
परेड ग्राउंड पर आंदोलनकारियों से बातचीत करते डीएम और एसएसपी

परेड ग्राउंड पर आंदोलनकारियों से बातचीत करते डीएम और एसएसपी

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड बेरोज़गार संघ के आंदोलनकारियों ने मांगें पूरी नहीं होने तक धरना जारी रखने का निर्णय लिया है।

देहरादून: उत्तराखंड बेरोज़गार संघ के नेतृत्व में परेड ग्राउंड में धरना-प्रदर्शन लगातार पांचवे दिन भी जारी रहा, जिसमें सैकड़ों युवा भाग ले रहे हैं। ये युवा उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित स्नातक स्तरीय परीक्षा में कथित अनियमितताओं की सीबीआई जांच, परीक्षा निरस्त करने और आयोग के अध्यक्ष जी.एस. मर्तोलिया के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

विरोध के इस प्रदर्शन के दौरान, शुक्रवार की दोपहर जिलाधिकारी सविन बंसल और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) अजय कुमार धरना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने आंदोलनकारियों को अब तक की कार्रवाई से अवगत कराया। हालांकि, इसके बावजूद, आंदोलनकारी असंतुष्ट बने रहे। बेरोज़गार संघ के अध्यक्ष राम कंडवाल ने दोहराया कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो प्रदेशव्यापी कूच का ऐलान भी किया जा सकता है।

संघ के उपाध्यक्ष सुरेश सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार आंदोलन को बदनाम करने और तोड़ने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन में शामिल युवा, जिनका उच्च शिक्षण में महत्वपूर्ण योगदान है, किसी भी बहकावे में नहीं आएंगे।

यह ध्यान देने योग्य है कि संघ के इस आंदोलन को कई सामाजिक और राजनीतिक दलों का समर्थन प्राप्त हो रहा है। इस अवसर पर संघ के संरक्षक बॉबी पंवार, महासचिव संजेंद्र कठैत सहित बड़ी संख्या में युवा मौजूद थे। ऐसे आंदोलनों में युवाओं का जुझारूपन यह दर्शाता है कि वे अपनी मांगों को लेकर कितने गंभीर हैं。

आंदोलनकारियों की इस शक्ति को देखना महत्वपूर्ण है, और यह भी दर्शाता है कि युवा वर्ग अपने हक्कों के लिए आवाज उठाने में पीछे नहीं हटता। राज्य सरकार के निर्णयों को प्रभावित करने और युवाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए इस तरह के प्रदर्शनों का महत्व बढ़ता जा रहा है।

अंततः, युवा संघ की इस पहल का सम्पूर्ण उत्तराखंड पर महत्वपूर्ण प्रभाव हो सकता है, जब वे अपनी मांगों के लिए एकजुट होकर खड़े होते हैं। उनकी निरंतरता और एकता से यह स्पष्ट होता है कि युवा कोई भी अन्याय सहन नहीं करेंगे और अपनी मांगों के लिए संघर्ष करते रहेंगे।

आप जानते हैं कि इस समय में रोजगार एक बड़ी समस्या है और ऐसे आंदोलनों की जरूरत और भी बढ़ गई है। अधिक अपडेट के लिए हमारे साथ जुड़े रहें।

टीम अमृता बाजार पत्रिका - प्रियंका शर्मा

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