फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम: IPR जागरूकता पर आधारित पाँचवे दिन की精彩 यात्रा

Sep 16, 2025 - 00:44
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फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम: IPR जागरूकता पर आधारित पाँचवे दिन की精彩 यात्रा
फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम: IPR जागरूकता पर आधारित पाँचवे दिन की精彩 यात्रा

फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का पाँचवाँ दिन – IPR जागरूकता पर केंद्रित

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कम शब्दों में कहें तो, ऋषिकेश में चल रहे फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के पाँचवे दिन, बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) की जागरूकता पर महत्वपूर्ण चर्चा हुई।

ऋषिकेश 15 सितम्बर 2025। “Empowering Educators through IPR Literacy and Innovation” शीर्षक से प्रारंभ हुए फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) के पाँचवे दिन, विशेषज्ञों ने बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) के विधिक, आर्थिक और अंतरराष्ट्रीय पहलुओं पर विचार-विमर्श किया। इस कार्यक्रम का उद्देश शिक्षकों को IPR के प्रति जागरूक करना था।

कार्यक्रम की शुरुआत

कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. सुधीर सिंह (दयाल सिंह कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय) के व्याख्यान से हुआ। उन्होंने कहा कि भारत में IPR कानूनों की चुनौतियाँ हैं, जहाँ जन-जागरूकता और क्रियान्वयन की कमी सबसे बड़ी बाधा बनती है। डॉ. सिंह ने यह भी बताया कि शोध एवं नवाचार की सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए IPR को मजबूत करने की आवश्यकता है।

IPR और आर्थिक विकास

इसके बाद, डॉ. चन्द्र मोहन नेगी (दिल्ली विश्वविद्यालय) ने अपने विचार साझा करते हुए बताया कि पेटेंट, कॉपीराइट और ट्रेडमार्क किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने आह्वान किया कि यदि भारत अपने नवाचारों को उचित संरक्षण प्रदान करे तो वैश्विक प्रतिस्पर्धा में हम अग्रणी बन सकते हैं। इससे न केवल देश की अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा, बल्कि इससे समाज को भी सभी स्तरों पर तेजी मिलेगी।

व्याख्यान के सत्र

भोजनावकाश के बाद, सुश्री मुस्कान रस्तोगी ने दो सत्र की मेज़बानी की। पहले सत्र में उन्होंने औद्योगिक डिज़ाइन, SICLDR और पादप प्रजाति अधिनियम पर चर्चा की। इस चर्चा के दौरान उन्होंने बताया कि नए डिज़ाइन और पौध किस्मों की सुरक्षा क्यों आवश्यक है। दूसरे सत्र में, उन्होंने अंतरराष्ट्रीय पेटेंट संधियों और WIPO की भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया, जो वैश्विक स्तर पर IPR जागरूकता फैलाने में सहायक है।

IPR का सामाजिक-आर्थिक महत्व

प्रो. अनीता तोमर (निदेशक, FDC) ने कार्यक्रम के समापन के समय कहा कि ऐसे आयोजन शिक्षकों को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं और शोध व नवाचार के मार्ग को प्रशस्त करते हैं। उन्होंने IPR को केवल कानूनी न होकर, सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण का भी माध्यम बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षा संस्थानों को IPR कानूनों की प्रक्रिया को समझना और अपनाना चाहिए।

कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. सीमा बेनीवाल ने किया, जिन्होंने सभी प्रतिभागियों का आभार प्रकट किया। इस आयोजन ने यह स्पष्ट किया कि IPR जागरूकता का महत्व केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक आवश्यकता भी है, जो देश के विकास में मददगार साबित हो सकती है।

अंत में, हम सभी शिक्षकों और शिक्षार्थियों से यह अपील करते हैं कि वे IPR की जानकारी बढ़ाएं और इसे अपने कार्यों में लागू करें। इसके लिए और अधिक अपडेटस् के लिए, यहाँ क्लिक करें.

साभार, टीम अमृता बाजार पत्रिका

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