बीजेपी प्रभारी दुष्यंत गौतम ने हाईकोर्ट और थाने का दरवाजा खटखटाया
बीजेपी प्रभारी दुष्यंत गौतम ने हाईकोर्ट और थाने का दरवाजा खटखटाया
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कम शब्दों में कहें तो, बीजेपी प्रभारी दुष्यंत गौतम ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है और पुलिस थाने में भी शिकायत दर्ज कराई है, जिसका केंद्र बिंदु अंकिता भंडारी हत्याकांड है।
देहरादून/नई दिल्ली: अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच को लेकर पूरे राज्य में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) ने इस संवेदनशील मामले में उठाए गए सवालों का जवाब देने के लिए खुद को एक नई रणनीति में ढाल लिया है। दुष्यंत कुमार गौतम, जो बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री और उत्तराखंड प्रभारी हैं, ने 5 जनवरी को डालनवाला थाने में आधा दर्जन धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई, जिसमें कांग्रेस के पूर्व विधायक सुरेश राठौर, अभिनेत्री उर्मिला सनावर और अन्य अज्ञात लोगों को नामजद किया गया है।
दुष्यंत ने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर वायरल हुए ऑडियो और वीडियो क्लिप पूरी तरह से मनगढ़ंत और भ्रामक हैं, इनका उद्देश्य उन्हें, उनकी पार्टी और उसके वरिष्ठ नेताओं को बदनाम करना है। उन्होंने कहा कि इस संवेदनशील मामले में उन्हें झूठा फंसाने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे उनकी व्यक्तिगत छवि को नुकसान पहुंचेगा और राज्य में शांति व्यवस्था भी भंग होगी।
साजिश का आरोप
दुष्यंत गौतम ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में कहा है कि यह सब एक सुनियोजित आपराधिक साजिश है, जिसमें विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े लोग शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे ऑडियो और वीडियो से न केवल उत्तराखंड, बल्कि अन्य राज्यों में भी अशांति पैदा करने का प्रयास किया जा सकता है।
– डालनवाला कोतवाली में एफआईआर दर्ज की गई
– सुरेश राठौर और उर्मिला सनावर के नाम शामिल
– कांग्रेस और यूकेडी समेत अन्य अज्ञात पर आरोप
दुष्यंत ने यह स्पष्ट किया कि उनकी शिकायत में शामिल ऑडियो-वीडियो में आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया गया है, जिससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचने का खतरा है। उन्होंने इसे मानसिक उत्पीड़न कहते हुए कहा कि यह न केवल आईटी एक्ट का उल्लंघन है, बल्कि भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों का भी उल्लंघन है।
दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका
दुष्यंत गौतम ने दिल्ली हाईकोर्ट की शरण भी ली है, जिसमें उर्मिला और सुरेश राठौर समेत 11 व्यक्तियों के खिलाफ कार्यवाही करने की मांग की गई है। यह याचिका लगभग 250 पेजों की है और इसे दिल्ली हाईकोर्ट के अधिवक्ता सिमरन बरार और नीलमणि गुहा ने पेश किया है। दुष्यंत ने अदालत से इस मामले में जल्द सुनवाई की अपील की है।
यहां ध्यान देने योग्य है कि भारतीय जनता पार्टी ने इस संवेदनशील मामले में अपनी विरोधी पार्टियों के खिलाफ कानूनी लड़ाई के लिए कमर कस ली है। यह स्पष्ट है कि आने वाले समय में यह मामला राजनीतिक तौर पर बड़ा रूप ले सकता है।
भविष्य की संभावनाएं
दुष्यंत के इस कदम से एक बात तो साफ हो गई है कि बीजेपी अंकिता के समर्थन में उठे आंदोलनों के खिलाफ राजनीतिक लड़ाई को सड़क से लेकर कोर्ट तक ले जाने की तैयारी कर रही है। इसके परिणामस्वरूप, यह लड़ाई एक बड़ी राजनीतिक धारा बनने की संभावना रखती है।
इसके साथ ही, दुष्यंत गौतम ने अनुरोध किया है कि पुलिस और न्यायपालिका इस मामले में त्वरित और प्रभावी पहल करें ताकि भविष्य में ऐसी साजिशों का सामना किया जा सके।
हमारी टिप्पणी: यह मामला केवल व्यक्तिगत बदनामी का नहीं है, बल्कि इसमें राजनीतिक प्रतिशोध का भी प्रभाव हो सकता है। इसको लेकर पार्टी के भीतर एवं बाहर दोनों जगह गंभीर कारण नजर आ रहे हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में इस मामले पर और क्या-क्या गतिविधियां होती हैं।
भविष्य में इस मामले का क्या परिणाम होगा, इसका अंदाज़ा लगाना मुश्किल है, लेकिन यह राजनीतिक विषय आज पूरी उत्तराखंड राजनीति को प्रभावित करने वाला है। अधिक जानकारी और अपडेट के लिए यहां क्लिक करें.
Team Amrita Bazaar Patrika
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