भगवान रुद्रनाथ के कपाट खुले: 21 किमी कठिन चढ़ाई पार कर पहुंचे श्रद्धालु, दिव्य दर्शन का आनंद लिया

May 18, 2026 - 21:44
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भगवान रुद्रनाथ के कपाट खुले: 21 किमी कठिन चढ़ाई पार कर पहुंचे श्रद्धालु, दिव्य दर्शन का आनंद लिया
भगवान रुद्रनाथ के कपाट खुले: 21 किमी कठिन चढ़ाई पार कर पहुंचे श्रद्धालु, दिव्य दर्शन का आनंद लिया

भगवान रुद्रनाथ के कपाट खुले: 21 किमी कठिन चढ़ाई पार कर पहुंचे श्रद्धालु, दिव्य दर्शन का आनंद लिया

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कम शब्दों में कहें तो, चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ के कपाट आज श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं, जिससे भक्तों ने एक अद्भुत अनुभव का आनंद लिया। यह कपाट समुद्रतल से 11,800 फीट की ऊंचाई पर विहित समय पर खोले गए, और इस दौरान रुद्रनाथ धाम में भारी भीड़ जुटी थी।

कपाट खोलने की विधि और पूजा

रुद्रनाथ/चमोली: ‘बम-बम भोले’ और ‘जय रुद्रनाथ’ के उद्घोष के साथ आज रुद्रनाथ धाम के कपाट भक्तों के दर्शन के लिए खोल दिए गए। इस पावन पल का आयोजन ठीक दोपहर 1 बजकर 40 मिनट पर, विधि-विधान और विशेष पूजा-अर्चना के बाद किया गया। इस ऐतिहासिक अवसर का साक्षी बनने के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु रुद्रनाथ पहुंचे।

भगवान का भव्य श्रृंगार

मुख्य पुजारी हरीश भट्ट ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूजा की प्रक्रिया को संचालित किया। शीतकाल के दौरान, भगवान रुद्रनाथ के विग्रह को स्थानीय ‘बुगला’ फूलों से ढका जाता है, जो कि पारंपरिक मान्यता के अनुसार किया जाता है। आज पूजा के समय, पुजारी ने इन पवित्र बुगला फूलों को हटाते ही भगवान रुद्रनाथ का विशेष श्रृंगार कर भव्य आरती उतारी। भक्तों को यह पुष्प प्रसाद के रूप में वितरित किया गया, जिससे श्रद्धालुओं का दिल खुश हो गया।

उच्च पर्व की गुफा में धाम

भगवान रुद्रनाथ का यह मंदिर प्राकृतिक पत्थरों की गुफा के भीतर बना हुआ है, और इसे चारों ओर मखमली घास के मैदानों से घेरा गया है। यहां भगवान शिव के ‘मुख’ की पूजा की जाती है, जो इस अलौकिक धाम को विशेष बनाता है।

पूजा का समय

इस पावन धाम में ग्रीष्मकाल में (मई से अक्टूबर) भगवान रुद्रनाथ की पूजा होती है। वहीं, शीतकाल (नवंबर से अप्रैल) में भारी बर्फबारी के कारण भगवान की पूजा गोपेश्वर स्थित गोपीनाथ मंदिर में होती है।

कठिन यात्रा लेकिन अटूट श्रद्धा

रुद्रनाथ धाम की यात्रा को पंच केदारों में सबसे कठिन माना जाता है। श्रद्धालुओं को यहां पहुंचने के लिए चमोली के ‘सगर’ गांव से लगभग 21 किलोमीटर की बेहद खड़ी और थका देने वाली पैदल चढ़ाई पार करनी पड़ती है। दुर्गम रास्ता होने के बावजूद भक्तों की आस्था के आगे यह चुनौतियाँ बौनी साबित होती हैं। अनेक श्रद्धालु इस कठिन यात्रा को करके भगवान के दर्शन का प्रयास करते हैं।

इस अद्वितीय अनुभव को और भी खास बनाने के लिए भक्तों का आह्वान है कि वे अपनी श्रद्धा के साथ इस धाम की यात्रा करें। प्रतिवर्ष लाखों भक्त इस यात्रा को करने का संकल्प लेते हैं, और यह यात्रा उन सभी के लिए एक अद्भुत अनुभव रहती है।

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सादर, Team Amrita Bazaar Patrika

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